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शहादत को सलाम: बंकर में लगी आग तो साथियों को बचाते हुए शहीद हुए सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान, राजकीय सम्मान के साथ अन्तयेष्टि

Fri, 07 Jan 2022 09:29 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कोसली/रेवाड़ी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कोसली/रेवाड़ी (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Fri, 07 Jan 2022 09:29 PM IST
सार

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव रतनथल गांव में शहीद सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान की राजकीय सम्मान के साथ अन्तयेष्टि की गई। कोसली के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव, डीसी यशेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष मास्टर हुकम चंद यादव ने भी इस दौरान श्रद्धांजलि दी।

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Martyr Subedar Major Shamsher Singh Chauhan was cremated with state honours in Rewari of Haryana
कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, दूसरी ओर शहीद सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

लेह में ड्यूटी के दौरान बंकर में लगी आग में फंसे साथियों को बचाते हुए शहीद हुए सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान की उनके पैतृक गांव रतनथल में राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि कर दी गई। हरियाणा पुलिस और सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर शहीद को सलामी दी।

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कोसली के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव, डीसी एवं जिला सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष यशेंद्र सिंह ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित श्रद्धांजलि दी। शमशेर चौहान का पार्थिव शरीर शुक्रवार को जैसे ही रतनथल गांव पहुंचा, तो हर कोई अपने लाडले सपूत को देखने उमड़ पड़ा।
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गौरतलब है कि गांव रतनथल निवासी 41 वर्षीय शमशेर सिंह चौहान आर्मी एजूकेशन कोर में 22 मेक लेह लद्दाख में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात थे। गत 2 जनवरी की रात को अपने साथियों के साथ बंकर में मौजूद थे कि इसी दौरान साथ वाले बंकर में आग लगने की सूचना पाकर सैनिकों को बचाने के लिए शमशेर सिंह चौहान व उनके साथी वहां पहुंचे और वहां उन्होंने सभी जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन बंकर में एक सिगड़ी में हुए बलास्ट की चपेट में सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान आ गए। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

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इसी माह ही उन्हें प्रमोशन से सूबेदार मेजर रैंक मिला

ग्रामीणों ने बताया कि शमशेर सिंह एक निर्भीक और हंसमुख प्रवृति के इंसान थे। उन्होंने बताया कि शमशेर सिंह चौहान तीन बहनों का अकेला भाई था। इसी माह ही उन्हें प्रमोशन से सूबेदार मेजर रैंक मिला था। 41 वर्षीय शमशेर सिंह चौहान अपने पीछे पिता भवानी सिंह, माता कमलेश देवी, पत्नी रजनी देवी, 17 वर्षीय बेटे प्रयाग, दो बेटियों फाल्गुनी व धनिया को छोड़ गए। 

माहौल गमगीन हो गया और हर किसी की आंखें नम रहीं 

शुक्रवार की सुबह सूबेदार मेजर शमशेर चौहान के पार्थिव शरीर को मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ गुरावडा से गांव रतनथल लाया गया, तो माहौल गमगीन हो गया और हर किसी की आंखें नम हो गई। जब तक सूरज चांद रहेगा शमशेर सिंह तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय जैसे गगनभेदी नारों के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने होनहार बेटे को अश्रुपूर्ण विदाई दी। 

ये रहे मौजूद

दिवंगत सूबेदार मेजर शमशेर सिंह चौहान की अंतिम संस्कार यात्रा में भाजपा जिलाध्यक्ष हुकम चंद यादव, एईसी के मेजर जनरल रिटायर्ड रणजीत सिंह, पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह यादव, एसडीएम होशियार सिंह, सांसद डॉ. अरविंद शर्मा के राजनीतिक सलाहकार पंडित राज पारिक, मेजर डॉ. टीसी राव, वेस्ट कमांड चंडी मंदिर के सूबेदार मेजर अनिल कुमार, विजय भूरथला, सूबेदार मेजर सुरेश कुमार, जिला सैनिक बोर्ड की सचिव लैफ्टिनेंट कर्नल सरिता यादव, तहसीलदार जितेंद्र कुमार, भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह चौहान, जिला क्षेत्रीय महासभा के जिलाध्यक्ष रणविजय तंवर, रोहडाई थाना प्रभारी रतनलाल, निवर्तमान सरपंच जयभगवान, दल सिंह चौहान, रामफल कोसलिया, बलजीत यादव, दीवान सिंह चौहान के अलावा कई गांवों के ग्रामीणों ने भाग लेकर अंतिम विदाई दी।

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