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Rewari News: हिंदुस्तान को गाली देने पर अंग्रेज सिपाही को जमकर पीटा था मंगल सिंह ने
Tue, 08 Aug 2023 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 08 Aug 2023 11:47 PM IST
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रेवाड़ी। आजादी की जंग का इतिहास शूरवीरों के किस्सों से भरा पड़ा है। इनमें कई ऐसे हैं, जिनकी बहादुरी के चर्चे गांव कोसली के बड़े बुजुर्ग युवा पीढ़ी को सुनाते हैं। आजादी की लड़ाई में कोसली का बड़ा योगदान रहा। गांव के करीब 103 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगल सिंह बताते हैं कि वह करीब 5 साल तक बर्मा की सेंट्रल जेल में बंद रहे। इस दौरान एक अंग्रेज सिपाही ने हिंदुस्तान को गाली देने के साथ ही अभद्र व्यवहार किया। इस पर मंगल सिंह ने उस अंग्रेज सिपाही की जमकर धुनाई कर दी। इससे बौखलाए जेलर ने उन्हें एक सप्ताह तक भूखा रखा। देश की आजादी की लालसा में उन्हें इन यातनाओं का कोई फर्क नहीं पड़ा।
मंगल सिंह बेशक शारीरिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम सुनते ही उनकी आंखों में चमक आ जाती है। सूरत सिंह के परिवार में जन्मे मंगल सिंह तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं। उन्होंने बताया कि लोगों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम सुनते थे, तभी से उन्होंने सेना में भर्ती होने का मन बना लिया था। उस समय ब्रिटिश सेना में भर्ती होना आसान था इसलिए नेताजी तक पहुंचने के लिए वह अगस्त 1940 में ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए। इसी दौरान अंग्रेजों की जापान के साथ लड़ाई हो गई। उन्हें अन्य साथियों के साथ सिंगापुर से बर्मा की सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया।
जेल में अन्य कैदियों के साथ मिलकर उन्होंने बगावत कर दी। कैदियों के विद्रोह का समाचार पाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस उनसे मिलने गए और सभी को जेल से आजाद कराया। जेल में ही नेताजी के साथ देश के लिए काम करने की इच्छा जताई। इसके बाद वह नेताजी के साथ आजादी की जंग में शामिल हो गए।
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1948 में दोबारा सेना में हुए भर्ती
आजादी के बाद वर्ष 1948 में वह फिर सेना में भर्ती हो गए। करीब 25 साल बाद 1974 में सेवानिवृत्त हो गए। सरकार की ओर से उन्हें पेंशन दी जा रही है। मंगल सिंह के परिवार में उनकी पत्नी शांति देवी का निधन हो चुका है। इसके अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं।
चीन को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए
मंगल सिंह कहते हैं कि नेताओं ने देश की हालत खराब कर दी है। ओछी राजनीति के कारण राजनेता देशसेवा की ओर कम ध्यान दे रहे। यह चिंता का कारण है। वह कहते हैं कि जिस तरह जम्मू कश्मीर में आंतरिक युद्ध के हालात हैं, भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन को सबक सिखाने की जरूरत है। चुप रहने को लोग कमजोर समझते हैं। हालांकि सरकार अपना कार्य कर रही है।
देश के निर्माण में ऊर्जा लगाएं युवा
मंगल सिंह ने युवाओं को संदेश भरे स्वर में कहा कि युवा ही देश का भविष्य है। उन्हें अपनी उर्जा देश के निर्माण में लगानी चाहिए। इसके साथ ही सरकार को भी युवाओं को रोजगार देने के बारे में ठोस नीति बननी चाहिए। रोजगार के अभाव में देश का युवा पथ भ्रष्ट हो रहा है।
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मंगल सिंह बेशक शारीरिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम सुनते ही उनकी आंखों में चमक आ जाती है। सूरत सिंह के परिवार में जन्मे मंगल सिंह तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं। उन्होंने बताया कि लोगों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम सुनते थे, तभी से उन्होंने सेना में भर्ती होने का मन बना लिया था। उस समय ब्रिटिश सेना में भर्ती होना आसान था इसलिए नेताजी तक पहुंचने के लिए वह अगस्त 1940 में ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए। इसी दौरान अंग्रेजों की जापान के साथ लड़ाई हो गई। उन्हें अन्य साथियों के साथ सिंगापुर से बर्मा की सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया।
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जेल में अन्य कैदियों के साथ मिलकर उन्होंने बगावत कर दी। कैदियों के विद्रोह का समाचार पाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस उनसे मिलने गए और सभी को जेल से आजाद कराया। जेल में ही नेताजी के साथ देश के लिए काम करने की इच्छा जताई। इसके बाद वह नेताजी के साथ आजादी की जंग में शामिल हो गए।
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1948 में दोबारा सेना में हुए भर्ती
आजादी के बाद वर्ष 1948 में वह फिर सेना में भर्ती हो गए। करीब 25 साल बाद 1974 में सेवानिवृत्त हो गए। सरकार की ओर से उन्हें पेंशन दी जा रही है। मंगल सिंह के परिवार में उनकी पत्नी शांति देवी का निधन हो चुका है। इसके अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं।
चीन को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए
मंगल सिंह कहते हैं कि नेताओं ने देश की हालत खराब कर दी है। ओछी राजनीति के कारण राजनेता देशसेवा की ओर कम ध्यान दे रहे। यह चिंता का कारण है। वह कहते हैं कि जिस तरह जम्मू कश्मीर में आंतरिक युद्ध के हालात हैं, भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन को सबक सिखाने की जरूरत है। चुप रहने को लोग कमजोर समझते हैं। हालांकि सरकार अपना कार्य कर रही है।
देश के निर्माण में ऊर्जा लगाएं युवा
मंगल सिंह ने युवाओं को संदेश भरे स्वर में कहा कि युवा ही देश का भविष्य है। उन्हें अपनी उर्जा देश के निर्माण में लगानी चाहिए। इसके साथ ही सरकार को भी युवाओं को रोजगार देने के बारे में ठोस नीति बननी चाहिए। रोजगार के अभाव में देश का युवा पथ भ्रष्ट हो रहा है।