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Rewari News: आजाद हिंद फौज में शामिल होकर मंगल सिंह व हरि सिंह ने लड़ी थी आजादी की लड़ाई

Thu, 14 Aug 2025 11:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 11:58 PM IST
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Mangal Singh and Hari Singh fought for independence by joining the Azad Hind Fauj
फोटो : 8स्वतंत्रता सेनानी मंगल सिंह
रेवाड़ी। आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज के दो स्वतंत्रता सेनानी मंगल सिंह व हरि सिंह के सहयोग को आज भी याद किया जाता है। इन स्वतंत्रता सेनानियों को पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की ओर से सम्मानित भी किया गया था।
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गांव भुरथला निवासी स्वतंत्रता सेनानी हरि सिंह आजाद हिंद फौज में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के साथ प्रारंभिक चरण में अक्तूबर 1941 में भर्ती हुए थे और मार्च 1946 तक आजाद हिंद फौज के सिपाही के रूप में सेवाएं दी थीं। 22 साल की आयु में देश की आजादी के लिए जीवन समर्पित किया।
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हरि सिंह सुभाष चंद्र के संपर्क में जर्मनी में आए थे और उस दौरान आयोजित सभा में सुभाष चंद्र बोस ने आह्वान किया था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। इस आह्वान के दौरान वे देशभक्ति के जज्बे के साथ देश सेवा को समर्पित होकर आगे बढ़े और सुभाष चंद्र के सिपाही के रूप में अपना दायित्व निभाया।
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जर्मनी के बाद वे ईरान, इराक, बेल्जियम, इटली, अफगानिस्तान होते हुए कराची बंदरगाह से भारत आए थे। गांव में हरि सिंह का एक बेटा, पुत्रवधू, दो पौत्र, 2 पौत्र वधु हैं। 106 वर्ष की आयु में हरि सिंह का 11 माह पहले निधन हुआ था।
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मंगल सिंह 1941 में आईएनए में हुए थे भर्ती

गांव कोसली के मंगल सिंह का जन्म 5 जनवरी 1921 को एक किसान परिवार में हुआ था। स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के बाद मंगल सिंह 1941 में आईएनए में भर्ती हुए थे। स्वतंत्रता सेनानी मंगल सिंह नेताजी सुभाष चंद्र बोस से बहुत प्रभावित थे।
आजाद हिंद फौज की सेवाओं के दौरान मंगल सिंह को जनरल मोहन सिंह, बाबू रास बिहारी बोस, जनरल शाहनवाज खां, जनरल सहगल, ब्रिगेडियर ढिल्लों और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संपर्क में रहने का अवसर मिला था।
स्वतंत्रता सेनानी मंगल सिंह 1941 से 1945 तक नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथ सैनिक की भूमिका में रहे और अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए अपनी भूमिका अदा की। 1945 में बर्मा में रंगून सेंट्रल जेल में कैद रहे। बतौर सैनिक जीवन काल में इन्होंने चार लड़ाई लड़ी।

द्वितीय विश्व युद्ध, भारत-पाक युद्ध 1948, भारत-चीन युद्ध 1962 व भारत-पाक युद्ध 1971 में देश सेवा के साथ सैनिक दायित्व निभाया था। गांव में मंगल सिंह के दो बेटे धर्मवीर व उमेद सिंह और दो बेटियां इंदिरा देवी और लीलावती हैं। 105 वर्ष की आयु में मंगल सिंह का जून 2025 को निधन हुआ था।
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