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Rewari News: साइबर ठगों के लिए म्यूल अकाउंट सप्लाई करने का आरोपी गिरफ्तार
Tue, 14 Oct 2025 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:29 AM IST
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भिवाड़ी। पुलिस ने विभिन्न फर्मों और व्यक्तियों के बैंक खातों को कमीशन पर हासिल कर साइबर ठगों को उपलब्ध कराने के आरोप में जिला बागपत के ग्राम बड़ा गांव, खेखड़ा निवासी अंकित शर्मा को गिरफ्तार किया है।
अंकित के कब्जे से 38 विभिन्न बैंकों की चेकबुक, 4 पासबुक, 20 एटीएम कार्ड, 8 क्यूआर कोड, 1 स्वाइप मशीन, 9 मोबाइल फोन, 9 रबर मोहरें, 1 इंक पैड और 2 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने बताया कि अंकित के कब्जे वाले खातों पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (1930) पर पूरे भारत में विभिन्न राज्यों से 183 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें ठगों ने 122 करोड़ 21 लाख 59 हजार 57 रुपये की ठगी की वारदातों को अंजाम दिया हैं।
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प्रकरण में पूर्व में दो अन्य अभियुक्त राशिद और अजमत को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके कब्जे से 11 चेकबुक, 4 एटीएम कार्ड, 4 क्यूआर कोड, 1 स्वाइप मशीन और 5 मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इन बदमाशों के खातों पर 96 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है।
बताया कि जिले में संदिग्ध बैंक खाते (म्यूल अकाउंट), सिम विक्रेता (पीओएस) और रिसाइवल कंप्लेन के निस्तारण के लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान महानिदेशक साइबर क्राइम से प्राप्त म्यूल अकाउंट लिस्ट की गहनता से छानबीन की गई।
खातों की छानबीन में ओवरसीज बैंक, बेस्ट कलेक्शन, भगत सिंह कॉलोनी भिवाड़ी का पता चला, जिसका प्रोप्राइटर राशिद है। इस खाते पर 63 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 50 करोड़ रुपये का फ्रॉड ट्रांजेक्शन हुआ। इसी तरह, तमिलनाडु बैंक में एक खाता अजमत के कब्जे से बरामद हुआ, जिसमें 33 शिकायतें और 11 करोड़ रुपये का फ्रॉड दर्ज है। पूछताछ में अजमत ने बताया कि वह बैंक खाते भारी कमीशन पर अभियुक्त अंकित शर्मा को बेचता था।
इस आधार पर अंकित शर्मा की तलाश की गई और उसे दिल्ली के वेस्ट कांति नगर से गिरफ्तार कर लिया गया। अंकित शर्मा को पूछताछ के दौरान उसके कब्जे से ये सामान बरामद किया गया।
साइबर ठगी रैकेट की तीसरी कड़ी है संदीप शर्मा :
भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने मंगलवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि संदीप शर्मा साइबर फ्रॉड रैकेट की तीसरी कड़ी के रूप में काम कर रहा था। पहली कड़ी खाताधारक होता है दूसरी कड़ी के रूप में वह स्थानीय लोग होते हैं जो इन खाताधारकों से संपर्क करते हैं एवं तीसरी कड़ी के रूप में यह खाताधारकों से संपर्क करने के बाद संदीप शर्मा तक उनको पहुंचाते हैं। उसके बाद संदीप शर्मा अपने से ऊपर काम कर रहे व्यक्ति तक उन खातों की डिटेल देता है और उसके बाद पांचवीं कड़ी के रूप में जो साइबर फ्रॉड का मास्टरमाइंड है उस तक यह अकाउंट की डिटेल पहुंचती है और फिर वह इन खातों में साइबर का पैसा ट्रांसफर करता है। एसपी ने बताया की साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा हैं जल्दी ही उस तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया जाएगा। इस पूरे रैकेट को चलाने वाले लोग विदेश में बैठकर इसे ऑपरेट कर रहे हैं।
खाताधारक को प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर साढे तीन पर्सेंट मिलता है कमीशन :
एसपी प्रशांत किरण ने बताया की पूछताछ में अंकित शर्मा ने बताया कि वह खाताधारक को प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर साढे तीन पर्सेंट कमीशन देता है। अगर किसी खाता होल्डर के अकाउंट में 1 लाख आते हैं तो उसे साढ़े तीन हजार रुपये का कमीशन दिया जाता है। इसमें ज्यादातर करंट अकाउंट होल्डर के खातों में ही पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं क्योंकि करंट अकाउंट में बड़ा अमाउंट ट्रांजेक्शन होने पर अकाउंट फ्रीज नहीं होता और यह अकाउंट्स किसी भी फर्म के नाम होते हैं। जबकि सेविंग अकाउंट में अगर 10 लाख रुपये या उससे ऊपर का ट्रांजेक्शन एक साथ होता है तो बैंक उसे ऑटोमेटिक फ्रीज कर देता है।
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अंकित के कब्जे से 38 विभिन्न बैंकों की चेकबुक, 4 पासबुक, 20 एटीएम कार्ड, 8 क्यूआर कोड, 1 स्वाइप मशीन, 9 मोबाइल फोन, 9 रबर मोहरें, 1 इंक पैड और 2 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
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भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने बताया कि अंकित के कब्जे वाले खातों पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (1930) पर पूरे भारत में विभिन्न राज्यों से 183 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें ठगों ने 122 करोड़ 21 लाख 59 हजार 57 रुपये की ठगी की वारदातों को अंजाम दिया हैं।
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प्रकरण में पूर्व में दो अन्य अभियुक्त राशिद और अजमत को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके कब्जे से 11 चेकबुक, 4 एटीएम कार्ड, 4 क्यूआर कोड, 1 स्वाइप मशीन और 5 मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इन बदमाशों के खातों पर 96 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है।
बताया कि जिले में संदिग्ध बैंक खाते (म्यूल अकाउंट), सिम विक्रेता (पीओएस) और रिसाइवल कंप्लेन के निस्तारण के लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान महानिदेशक साइबर क्राइम से प्राप्त म्यूल अकाउंट लिस्ट की गहनता से छानबीन की गई।
खातों की छानबीन में ओवरसीज बैंक, बेस्ट कलेक्शन, भगत सिंह कॉलोनी भिवाड़ी का पता चला, जिसका प्रोप्राइटर राशिद है। इस खाते पर 63 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 50 करोड़ रुपये का फ्रॉड ट्रांजेक्शन हुआ। इसी तरह, तमिलनाडु बैंक में एक खाता अजमत के कब्जे से बरामद हुआ, जिसमें 33 शिकायतें और 11 करोड़ रुपये का फ्रॉड दर्ज है। पूछताछ में अजमत ने बताया कि वह बैंक खाते भारी कमीशन पर अभियुक्त अंकित शर्मा को बेचता था।
इस आधार पर अंकित शर्मा की तलाश की गई और उसे दिल्ली के वेस्ट कांति नगर से गिरफ्तार कर लिया गया। अंकित शर्मा को पूछताछ के दौरान उसके कब्जे से ये सामान बरामद किया गया।
साइबर ठगी रैकेट की तीसरी कड़ी है संदीप शर्मा :
भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने मंगलवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि संदीप शर्मा साइबर फ्रॉड रैकेट की तीसरी कड़ी के रूप में काम कर रहा था। पहली कड़ी खाताधारक होता है दूसरी कड़ी के रूप में वह स्थानीय लोग होते हैं जो इन खाताधारकों से संपर्क करते हैं एवं तीसरी कड़ी के रूप में यह खाताधारकों से संपर्क करने के बाद संदीप शर्मा तक उनको पहुंचाते हैं। उसके बाद संदीप शर्मा अपने से ऊपर काम कर रहे व्यक्ति तक उन खातों की डिटेल देता है और उसके बाद पांचवीं कड़ी के रूप में जो साइबर फ्रॉड का मास्टरमाइंड है उस तक यह अकाउंट की डिटेल पहुंचती है और फिर वह इन खातों में साइबर का पैसा ट्रांसफर करता है। एसपी ने बताया की साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा हैं जल्दी ही उस तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया जाएगा। इस पूरे रैकेट को चलाने वाले लोग विदेश में बैठकर इसे ऑपरेट कर रहे हैं।
खाताधारक को प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर साढे तीन पर्सेंट मिलता है कमीशन :
एसपी प्रशांत किरण ने बताया की पूछताछ में अंकित शर्मा ने बताया कि वह खाताधारक को प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर साढे तीन पर्सेंट कमीशन देता है। अगर किसी खाता होल्डर के अकाउंट में 1 लाख आते हैं तो उसे साढ़े तीन हजार रुपये का कमीशन दिया जाता है। इसमें ज्यादातर करंट अकाउंट होल्डर के खातों में ही पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं क्योंकि करंट अकाउंट में बड़ा अमाउंट ट्रांजेक्शन होने पर अकाउंट फ्रीज नहीं होता और यह अकाउंट्स किसी भी फर्म के नाम होते हैं। जबकि सेविंग अकाउंट में अगर 10 लाख रुपये या उससे ऊपर का ट्रांजेक्शन एक साथ होता है तो बैंक उसे ऑटोमेटिक फ्रीज कर देता है।