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माजरा पंचायत ने एम्स के लिए 100 एकड़ जमीन दी निशुल्क, सरकार किसानों को 50 लाख रुपये मुआवजा की घोषणा कर मंशा करे साफ
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वर्ष 2015 में बावल की रैली से मनेठी एम्स की घोषणा को पांच साल बीत जाने केे बाद अब मनेठी की बजाय माजरा गांव में जमीन उपलब्ध होने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। ऐसे में माजरा पंचायत की ओर से जहां 100 एकड़ जमीन निशुल्क एम्स के लिए दे दी गई है। वहीं अब सरकार को भी बची हुई 100 एकड़ जमीन के लिए 50 लाख रुपये प्रति एकड़ देने की घोषणा कर अपनी मंशा साफ करनी चाहिए। बता दें कि एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन की जरूरत है, जबकि माजरा की गांव की ओर से 306 एकड़ जमीन ई-भूमि पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है।
पंचायत की कुछ जमीन पर पेड़ : सरपंच
माजरा गांव के सरपंच देशराज ने बताया कि एम्स के लिए ग्राम पंचायत ने 100 एकड़ के लगभग जमीन प्रति एकड़ एक रुपये के हिसाब से दी है। सरपंच ने बताया कि पंचायत ने एम्स के लिए फ्री जमीन देे दी है, लेकिन किसान अपनी जमीन को फ्री में नहीं दे सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ एकड़ में ग्राम पंचायत की जमीन पर कुछ पेड़ है, बाकि जमीन पर खेती हो रही है। एम्स संघर्ष समिति के आह्वान पर किसानों ने जमीन तो दे दी है, लेकिन क्या सरकार किसानों को प्रति एकड़ 50 लाख मुआवजा राशि देगी। जो किसानों के लिए दुविधा की स्थिति पैदा कर रहा है।
50 लाख का आश्वासन मिलने के बाद ही जमीन की अपलोड
एम्स के लिए पोर्टल पर जमीन देने वाले माजरा के किसान रोहताश ने बताया कि एम्स संघर्ष समिति व जिला उपायुक्त के आह्वान पर माजरा के किसानों ने एम्स के लिए जमीन दी है। जबकि सरकार प्रति एकड़ 29 लाख रुपये देने की बात कर रही है। जबकि एम्स संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल क्षेत्र के विधायक व मंत्री को साथ लेकर मुख्यमंत्री से मिले थे, जब आश्वासन दिया गया था एम्स के लिए जो जमीन चाहिए, वह पूरी होते है किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि मिलने के आश्वासन पर अपनी भूमि ई-पोर्टल पर अपलोड की है। अगर सरकार किसानों को 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि नहीं देती है किसान अपनी जमीन नहीं देंगे।
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सरकार को मुआवजे की घोषणा कर जल्द काम करना चाहिए शुरू
माजरा निवासी ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन व खोल ब्लॉक भाजपा अध्यक्ष जितेन्द्र उर्फ जीतू ने बताया कि किसानों ने 50 लाख रुपये मुआवजा राशि मिलने के आश्वासन पर अपनी जमीन एम्स के लिए दी है। कलेक्टर रेट सरकार 29 लाख रूपए प्रति एकड़ की बात कर रही है, जो किसान लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एम्स संघर्ष समिति को आश्वासन दिया था कि किसानों को उचित मुआवजा राशि दी जाएगी। अगर सरकार प्रति एकड़ 49 लाख भी देती है किसान कभी नहीं मानेगा। इसलिए किसानों को मान रखते हुए सरकार को प्रति एकड़ 50 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जानी चाहिए।
सरकार लटकाने की बजाय, जल्द शुरू कराये निर्माण
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा के लोगों के लिए यह मुद्दा है ही नही कि एम्स मनेठी में बने या माजरा-भालखी में बने। इलाके का एक ही मुद्दा व मांग है कि एम्स बने और उसका निर्माण शीघ्र शुरू हो। विद्रोही ने कहा कि प्रशासन व भाजपा सरकार बहानेबाजी से एम्स निर्माण मामले को लंबा खींचने की बजाय इसे शीघ्र निपटाये। विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार एम्स निर्माण के प्रति न तो गंभीर है और न ही शीघ्रता में भाजपा सरकार इस मुद्दे को 2024 लोकसभा व विधानसभा चुनावों तक लटकाये रखने की फिराक में है।
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पंचायत की कुछ जमीन पर पेड़ : सरपंच
माजरा गांव के सरपंच देशराज ने बताया कि एम्स के लिए ग्राम पंचायत ने 100 एकड़ के लगभग जमीन प्रति एकड़ एक रुपये के हिसाब से दी है। सरपंच ने बताया कि पंचायत ने एम्स के लिए फ्री जमीन देे दी है, लेकिन किसान अपनी जमीन को फ्री में नहीं दे सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ एकड़ में ग्राम पंचायत की जमीन पर कुछ पेड़ है, बाकि जमीन पर खेती हो रही है। एम्स संघर्ष समिति के आह्वान पर किसानों ने जमीन तो दे दी है, लेकिन क्या सरकार किसानों को प्रति एकड़ 50 लाख मुआवजा राशि देगी। जो किसानों के लिए दुविधा की स्थिति पैदा कर रहा है।
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50 लाख का आश्वासन मिलने के बाद ही जमीन की अपलोड
एम्स के लिए पोर्टल पर जमीन देने वाले माजरा के किसान रोहताश ने बताया कि एम्स संघर्ष समिति व जिला उपायुक्त के आह्वान पर माजरा के किसानों ने एम्स के लिए जमीन दी है। जबकि सरकार प्रति एकड़ 29 लाख रुपये देने की बात कर रही है। जबकि एम्स संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल क्षेत्र के विधायक व मंत्री को साथ लेकर मुख्यमंत्री से मिले थे, जब आश्वासन दिया गया था एम्स के लिए जो जमीन चाहिए, वह पूरी होते है किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि मिलने के आश्वासन पर अपनी भूमि ई-पोर्टल पर अपलोड की है। अगर सरकार किसानों को 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि नहीं देती है किसान अपनी जमीन नहीं देंगे।
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सरकार को मुआवजे की घोषणा कर जल्द काम करना चाहिए शुरू
माजरा निवासी ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन व खोल ब्लॉक भाजपा अध्यक्ष जितेन्द्र उर्फ जीतू ने बताया कि किसानों ने 50 लाख रुपये मुआवजा राशि मिलने के आश्वासन पर अपनी जमीन एम्स के लिए दी है। कलेक्टर रेट सरकार 29 लाख रूपए प्रति एकड़ की बात कर रही है, जो किसान लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एम्स संघर्ष समिति को आश्वासन दिया था कि किसानों को उचित मुआवजा राशि दी जाएगी। अगर सरकार प्रति एकड़ 49 लाख भी देती है किसान कभी नहीं मानेगा। इसलिए किसानों को मान रखते हुए सरकार को प्रति एकड़ 50 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जानी चाहिए।
सरकार लटकाने की बजाय, जल्द शुरू कराये निर्माण
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा के लोगों के लिए यह मुद्दा है ही नही कि एम्स मनेठी में बने या माजरा-भालखी में बने। इलाके का एक ही मुद्दा व मांग है कि एम्स बने और उसका निर्माण शीघ्र शुरू हो। विद्रोही ने कहा कि प्रशासन व भाजपा सरकार बहानेबाजी से एम्स निर्माण मामले को लंबा खींचने की बजाय इसे शीघ्र निपटाये। विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार एम्स निर्माण के प्रति न तो गंभीर है और न ही शीघ्रता में भाजपा सरकार इस मुद्दे को 2024 लोकसभा व विधानसभा चुनावों तक लटकाये रखने की फिराक में है।