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माजरा एम्स : जल्द शिलान्यास कराने, मुआवजा देने की उठाई मांग
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रेवाड़ी। माजरा एम्स का जल्द शिलान्यास कराने की प्रमुख मांग के साथ मंगलवार को एम्स संघर्ष समिति के पांच सदस्यीय शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एडीसी जयदीप कुमार को दिया है। साथ ही परियोजना से संबंधित 228 एकड़ भूमि का मुआवजा जल्द दिलाने और भूमि को जल्द से जल्द सरकार के नाम स्थानांतरित कराने की गुहार भी लगाई है।
जिला पार्षद आजाद सिंह नांधा के नेतृत्व में यह शिष्टमंडल उपायुक्त यशेंद्र सिंह से मुलाकात करने आया था। चूंकि उपायुक्त उस वक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। इसलिए उनकी ओर से प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) जयदीप कुमार से शिष्टमंडल के सदस्यों ने मुलाकात की। साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इस पर एडीसी ने एम्स जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर हरसंभव सहयोगात्मक प्रयास करने और उपायुक्त के माध्यम से जल्द इस ज्ञापन को मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवाने का आश्वास दिया। शिष्टमंडल में कर्नल राजेंद्र सिंह, सचिव ओमप्रकाश सैन, मास्टर लक्ष्मण सिंह अहरोद और जयवीर शामिल रहे।
कितनी जमीन पर बनेगा एम्स
एम्स के निर्माण के लिए अब तक सरकार की ओर से निर्धारित पोर्टल पर 228 एकड़ भूमि, किसानों की ओर से अपलोड की जा चुकी है। इसमें से 200 एकड़ भूमि का इस्तेमाल एम्स के विभिन्न भवनों के लिए, जबकि 28 एकड़ भूमि का उपयोग व्यापारिक एससीओ के निर्माण में होगा।
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किसानों को 40 लाख रुपये प्रति एकड़ का भाव मिला
समिति के सचिव ओमप्रकाश सैन ने कहा कि एम्स के लिए अधिगृहित भूमि के लिए सरकार की ओर से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ भाव दिया गया है। एक एकड़ जमीन वाले किसान को 500 वर्ग गज का एससीओ वाणिज्यिक श्रेणी का दिया जाएगा, जहां संबंधित किसान अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए कोई व्यापारिक गतिविधि संचालित कर पाएगा।
510 किसानों की ली गई है भूमि
समिति के अनुसार एम्स परियोजना के लिए 510 से अधिक किसानों की भूमि ली गई है, जिसमें एक मरला से 40 कनाल से अधिक सभी भू मलकियत वाले किसान शामिल हैं। समिति के वरिष्ठ सदस्य कर्नल राजेंद्र सिंह ने कहा कि माजरा के उन किसानों की ओर से एम्स परियोजना में दी गई अपनी बेशकीमती जमीन के लिए समिति माजरा और संबंधित किसानों के त्याग की तहेदिल से तारीफ करती है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को ज्ञापन सौंपने का मकसद यह है कि सरकार जल्द इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य शुरू कराए। संबंधित किसानों को उनकी भूमि का जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जाए और एम्स परियोजना के लिए अधिगृहित की गई जमीन को संबंधित पोर्टल से सरकार अपने नाम और स्वास्थ्य मंत्रालय स्थानांतरित कराए ताकि आगे की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जा सके।
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जिला पार्षद आजाद सिंह नांधा के नेतृत्व में यह शिष्टमंडल उपायुक्त यशेंद्र सिंह से मुलाकात करने आया था। चूंकि उपायुक्त उस वक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। इसलिए उनकी ओर से प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) जयदीप कुमार से शिष्टमंडल के सदस्यों ने मुलाकात की। साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इस पर एडीसी ने एम्स जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर हरसंभव सहयोगात्मक प्रयास करने और उपायुक्त के माध्यम से जल्द इस ज्ञापन को मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवाने का आश्वास दिया। शिष्टमंडल में कर्नल राजेंद्र सिंह, सचिव ओमप्रकाश सैन, मास्टर लक्ष्मण सिंह अहरोद और जयवीर शामिल रहे।
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कितनी जमीन पर बनेगा एम्स
एम्स के निर्माण के लिए अब तक सरकार की ओर से निर्धारित पोर्टल पर 228 एकड़ भूमि, किसानों की ओर से अपलोड की जा चुकी है। इसमें से 200 एकड़ भूमि का इस्तेमाल एम्स के विभिन्न भवनों के लिए, जबकि 28 एकड़ भूमि का उपयोग व्यापारिक एससीओ के निर्माण में होगा।
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किसानों को 40 लाख रुपये प्रति एकड़ का भाव मिला
समिति के सचिव ओमप्रकाश सैन ने कहा कि एम्स के लिए अधिगृहित भूमि के लिए सरकार की ओर से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ भाव दिया गया है। एक एकड़ जमीन वाले किसान को 500 वर्ग गज का एससीओ वाणिज्यिक श्रेणी का दिया जाएगा, जहां संबंधित किसान अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए कोई व्यापारिक गतिविधि संचालित कर पाएगा।
510 किसानों की ली गई है भूमि
समिति के अनुसार एम्स परियोजना के लिए 510 से अधिक किसानों की भूमि ली गई है, जिसमें एक मरला से 40 कनाल से अधिक सभी भू मलकियत वाले किसान शामिल हैं। समिति के वरिष्ठ सदस्य कर्नल राजेंद्र सिंह ने कहा कि माजरा के उन किसानों की ओर से एम्स परियोजना में दी गई अपनी बेशकीमती जमीन के लिए समिति माजरा और संबंधित किसानों के त्याग की तहेदिल से तारीफ करती है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को ज्ञापन सौंपने का मकसद यह है कि सरकार जल्द इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य शुरू कराए। संबंधित किसानों को उनकी भूमि का जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जाए और एम्स परियोजना के लिए अधिगृहित की गई जमीन को संबंधित पोर्टल से सरकार अपने नाम और स्वास्थ्य मंत्रालय स्थानांतरित कराए ताकि आगे की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जा सके।