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तीसरी बार हुआ टिड्डी दल का हमला, किसान रातभर बजाते रहे थाली, 8 गांवों में अधिक नुकसान की संभावना
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पिछले एक माह के दौरान जिला में तीसरी बार टिड्डी के चार दलों द्वारा एक साथ हमला करने से किसानों सहमें हुए। शुक्रवार शाम से चार सक्रिय दलों ने शनिवार को भी किसानों की धड़कनों को बढ़ाए रखा। किसानों व अधिकारियों के प्रयासों से टिड्डी दल को जिला से बाहर किया गया। टिड्डी दल से बावल क्षेत्र के करीब 8 गांवों की फसलों को ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। वहीं अधिकारियों का दावा है कि करीब 60 फीसदी टिड्डियों को स्प्रे से मार गिराया है।
बता दें कि शुक्रवार शाम को 4 बजे पहला दल पड़ोसी प्रदेश राजस्थान के कोटकासिम की सीमा से जिला के बावल खंड में प्रवेश कर गया। 8 से 10 गांवों के ऊपर मंडराने के 10 किलोमीटर लंबा व चार किलोमीटर चौड़ाई में फैला यह दल हवा के रुख के साथ फिर दोबारा से कोटकासिम की सीमा में प्रवेश कर गया। लेकिन शाम को ही दूसरे 3 किलोमीटर लंबे व 2 किलोमीटर चौड़े दल ने मुंडावर साइड से जिले की सीमा में प्रवेश किया।
इस दल नेे रात को गांव नांगल शहबाजपुर, खिजुरी, भादोज, नंगली परसापुर, बीदावास व बावल आदि में ठहराव किया। इस दौरान फसलें प्रभावित भी हुई हैं। वहीं शनिवार दोपहर करीब 12 बजे पड़ोसी जिला महेंद्रगढ़ के कनीना की ओर से जिला की सीमा में प्रवेश किया, लेकिन यह दल अधिक ऊंचाई पर होने के कारण खेतों में नहीं उतरा सका तथा कारोली बब्वा व झोलरी होते हुए चरखी दादरी जिले में प्रवेश कर गया। चौथे दल ने भी सुबह करीब 11 बजे महेंद्रगढ़ की ओर से जिला की सीमा में प्रवेश किया तथा हवा का रुख बदलते ही वापस कनीना की ओर रवाना हो गया।
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ढोल नगाड़ों के साथ खेतों में डटे रहे किसान
टिड्डी दल सक्रिय होने की सूचना मिलते ही किसान शुक्रवार शाम चार बजे से ही ढोल, थाली, लौहे के टीन, परात सहित अन्य उपकरण लेकर अपने खेतों में डटे रहे। वहीं खोल खंड के गांव पाली, चीताडूंगरा, नांधा, बलवाड़ी, खोल, लुहाना, धवाना, सीहा, बुड़ौली, जैनाबाद व डहीना होते हुए कनीना की तरफ यह दल शनिवार शाम को आगे बढ़ गया। किसान एवं प्रशासनिक अधिकारी भी रातभर बचाव में जुटे रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग अपने परिवार सहित फसलों को बचाने की जुगत में रातभर खेतों में डटे रहे।
बावल खंड में शाम को 4 बजे टिड्डी दल ने प्रवेश किया। इसके बाद रात के समय करीब 8 गांवों में ठहराव किया। इस दौरान किसानों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने स्प्रे छिड़काव से लेकर थाली, ड्रम, पीपे आदि बजाते रहे। किसानों द्वारा तेज आवाज करने पर जिला के गांवों के नजदीक लगती राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर गया।
पिछले दो दिन से क्षेत्र में टीडी दल के आने की सूचना से किसानों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। किसान टीडी दल से अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों में पहरा दे रहे हैं। शनिवार की सुबह बावल से दो दल टीडी दल खंड खोल क्षेत्र के गांवों में प्रवेश कर गए, जो अलग-अलग गांवों से होकर गुजरे। टीडी के आने की सूचना पर गांव में टीडी आने की मुनादी चौकीदारी द्वारा करवाई गई। शनिवार की सुबह टीडी दल गांव पाली से होते हुए, चीताडूंगरा, नांधा, बलवाड़ी, खोल, लुहाना, धवाना, सीहा, बुड़ौली, जैनाबाद व डहीना होते हुए कनीना की तरफ आगे बढ़ गया।
जिले में तीन तरफ से किया प्रवेश
शुक्रवार शाम को कोटकासिम की ओर से सबसे बड़े दल ने बावल क्षेत्र में प्रवेश किया। कृषि अधिकारियों के अनुसार यह दल 10 किमी. लंबे तथा 8 किलोमीटर चौड़ाई में फैला हुआ था। इसके उपरांत यह दल हवा के रुख के साथ ही वापिस कोटकासिम में प्रवेश कर गया। इसके उपरांत शाम के चार बजे अचानक दूसरे दल का हमला हुआ यह दल रात के समय जैतड़ावास के आसपास के गांव में ठहरा। इस दल की लंबाई 3 किमी. तथा चौड़ाई करीब 2 किमी तक थी। रात्रि ठहराव के बाद यह दल सुबह गांव पाली की तरफ रुख कर गया। वहीं तीसरे दल ने शनिवार सुबह पड़ोसी जिला के कनीना खंड की ओर से जिला में प्रवेश किया लेकिन गनिमत रही है यह अधिक ऊंचाई पर उड़ रहा था जो बुड़ौली, बव्वा झोलरी होते हुए दादरी की सीमा में प्रवेश कर गया। चौथा दल महेंद्रगढ़ की ओर से जिला में प्रवेश कर गया लेकिन यह दल आकार में काफी छोटा था जो हवा के रुखे के साथ खंड खोल के कुछ गांवों में होते हुए राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर गया।
अधिकारियों का दावा स्प्रे सेे 60 प्रतिशत टिड्डी मरीं
गांव जैतड़ावास सहित आसपास के पांच गांवों में टिड्डी दल के रात्रि ठहराव के दौरान प्रशासन द्वारा दल पर स्प्रे कार्य शुरू कर दिया। करीब चार घंटे स्प्रेे के उपरांत अधिकारियों का दावा था इस दल की करीब 60 प्रतिशत टिड्डी मर चुकी हैं। लेकिन सुबह के समय यह दल हवा के रुख के साथ राजस्थान की सीमा मेें प्रवेश कर गया।
किसानों की जागरूकता से नहीं हुआ अधिक नुकसान
किसानों की जागरूकता के चलते आसपास जिलों के किसानों से संपर्क कर टिड्डी दल की स्थित का पता लगा रहे हैं। इसके उपरांत दल का हमला होने से पूर्व किसान अपने खेतों में पहुंचकर फसलों को बचाने के प्रबंध में जुट जाते हैं। किसानों द्वारा किए जा रहे शोर के कारण टिड्डी दल जमीन पर भी नहीं उतर पा रहा है।
पड़ोसी प्रदेश व जिलों के अधिकारियों से संपर्क में हैं: एसडीएओ
उपमंडल कृषि अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों से जिला में चार दल एक्टिव हैं। पड़ोसी राज्य व जिलों के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने से इनकी सही स्थिति का पता चल गया था। इसके कारण जहां का रुख होता है वहीं किसानों को अलर्ट कर दिया जाता है। केवल एक दल ने रात के समय ठहराव किया है बाकी तीन अन्य दलों को नीचे भी नहीं उतरने दिया। अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं।
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बता दें कि शुक्रवार शाम को 4 बजे पहला दल पड़ोसी प्रदेश राजस्थान के कोटकासिम की सीमा से जिला के बावल खंड में प्रवेश कर गया। 8 से 10 गांवों के ऊपर मंडराने के 10 किलोमीटर लंबा व चार किलोमीटर चौड़ाई में फैला यह दल हवा के रुख के साथ फिर दोबारा से कोटकासिम की सीमा में प्रवेश कर गया। लेकिन शाम को ही दूसरे 3 किलोमीटर लंबे व 2 किलोमीटर चौड़े दल ने मुंडावर साइड से जिले की सीमा में प्रवेश किया।
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इस दल नेे रात को गांव नांगल शहबाजपुर, खिजुरी, भादोज, नंगली परसापुर, बीदावास व बावल आदि में ठहराव किया। इस दौरान फसलें प्रभावित भी हुई हैं। वहीं शनिवार दोपहर करीब 12 बजे पड़ोसी जिला महेंद्रगढ़ के कनीना की ओर से जिला की सीमा में प्रवेश किया, लेकिन यह दल अधिक ऊंचाई पर होने के कारण खेतों में नहीं उतरा सका तथा कारोली बब्वा व झोलरी होते हुए चरखी दादरी जिले में प्रवेश कर गया। चौथे दल ने भी सुबह करीब 11 बजे महेंद्रगढ़ की ओर से जिला की सीमा में प्रवेश किया तथा हवा का रुख बदलते ही वापस कनीना की ओर रवाना हो गया।
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ढोल नगाड़ों के साथ खेतों में डटे रहे किसान
टिड्डी दल सक्रिय होने की सूचना मिलते ही किसान शुक्रवार शाम चार बजे से ही ढोल, थाली, लौहे के टीन, परात सहित अन्य उपकरण लेकर अपने खेतों में डटे रहे। वहीं खोल खंड के गांव पाली, चीताडूंगरा, नांधा, बलवाड़ी, खोल, लुहाना, धवाना, सीहा, बुड़ौली, जैनाबाद व डहीना होते हुए कनीना की तरफ यह दल शनिवार शाम को आगे बढ़ गया। किसान एवं प्रशासनिक अधिकारी भी रातभर बचाव में जुटे रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग अपने परिवार सहित फसलों को बचाने की जुगत में रातभर खेतों में डटे रहे।
बावल खंड में शाम को 4 बजे टिड्डी दल ने प्रवेश किया। इसके बाद रात के समय करीब 8 गांवों में ठहराव किया। इस दौरान किसानों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने स्प्रे छिड़काव से लेकर थाली, ड्रम, पीपे आदि बजाते रहे। किसानों द्वारा तेज आवाज करने पर जिला के गांवों के नजदीक लगती राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर गया।
पिछले दो दिन से क्षेत्र में टीडी दल के आने की सूचना से किसानों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। किसान टीडी दल से अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों में पहरा दे रहे हैं। शनिवार की सुबह बावल से दो दल टीडी दल खंड खोल क्षेत्र के गांवों में प्रवेश कर गए, जो अलग-अलग गांवों से होकर गुजरे। टीडी के आने की सूचना पर गांव में टीडी आने की मुनादी चौकीदारी द्वारा करवाई गई। शनिवार की सुबह टीडी दल गांव पाली से होते हुए, चीताडूंगरा, नांधा, बलवाड़ी, खोल, लुहाना, धवाना, सीहा, बुड़ौली, जैनाबाद व डहीना होते हुए कनीना की तरफ आगे बढ़ गया।
जिले में तीन तरफ से किया प्रवेश
शुक्रवार शाम को कोटकासिम की ओर से सबसे बड़े दल ने बावल क्षेत्र में प्रवेश किया। कृषि अधिकारियों के अनुसार यह दल 10 किमी. लंबे तथा 8 किलोमीटर चौड़ाई में फैला हुआ था। इसके उपरांत यह दल हवा के रुख के साथ ही वापिस कोटकासिम में प्रवेश कर गया। इसके उपरांत शाम के चार बजे अचानक दूसरे दल का हमला हुआ यह दल रात के समय जैतड़ावास के आसपास के गांव में ठहरा। इस दल की लंबाई 3 किमी. तथा चौड़ाई करीब 2 किमी तक थी। रात्रि ठहराव के बाद यह दल सुबह गांव पाली की तरफ रुख कर गया। वहीं तीसरे दल ने शनिवार सुबह पड़ोसी जिला के कनीना खंड की ओर से जिला में प्रवेश किया लेकिन गनिमत रही है यह अधिक ऊंचाई पर उड़ रहा था जो बुड़ौली, बव्वा झोलरी होते हुए दादरी की सीमा में प्रवेश कर गया। चौथा दल महेंद्रगढ़ की ओर से जिला में प्रवेश कर गया लेकिन यह दल आकार में काफी छोटा था जो हवा के रुखे के साथ खंड खोल के कुछ गांवों में होते हुए राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर गया।
अधिकारियों का दावा स्प्रे सेे 60 प्रतिशत टिड्डी मरीं
गांव जैतड़ावास सहित आसपास के पांच गांवों में टिड्डी दल के रात्रि ठहराव के दौरान प्रशासन द्वारा दल पर स्प्रे कार्य शुरू कर दिया। करीब चार घंटे स्प्रेे के उपरांत अधिकारियों का दावा था इस दल की करीब 60 प्रतिशत टिड्डी मर चुकी हैं। लेकिन सुबह के समय यह दल हवा के रुख के साथ राजस्थान की सीमा मेें प्रवेश कर गया।
किसानों की जागरूकता से नहीं हुआ अधिक नुकसान
किसानों की जागरूकता के चलते आसपास जिलों के किसानों से संपर्क कर टिड्डी दल की स्थित का पता लगा रहे हैं। इसके उपरांत दल का हमला होने से पूर्व किसान अपने खेतों में पहुंचकर फसलों को बचाने के प्रबंध में जुट जाते हैं। किसानों द्वारा किए जा रहे शोर के कारण टिड्डी दल जमीन पर भी नहीं उतर पा रहा है।
पड़ोसी प्रदेश व जिलों के अधिकारियों से संपर्क में हैं: एसडीएओ
उपमंडल कृषि अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों से जिला में चार दल एक्टिव हैं। पड़ोसी राज्य व जिलों के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने से इनकी सही स्थिति का पता चल गया था। इसके कारण जहां का रुख होता है वहीं किसानों को अलर्ट कर दिया जाता है। केवल एक दल ने रात के समय ठहराव किया है बाकी तीन अन्य दलों को नीचे भी नहीं उतरने दिया। अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं।