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हेल्पलाइन पर नहीं मिल रही छूट संबंधी जानकारी, असमंजस में व्यापारी और दुकानदार
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मंडी में खरीदारी करते ग्राहक, सोशल डिस्टेंस का नहीं रखा जा रहा ध्यान।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। केंद्र सरकार की ओर से ग्रीन जोन में छूट के लिए कुछ दुकानदारों, पलंबर और मैकेनिक सहित लंबी फेहरिस्त जारी की हुई हैं। इसके बावजूद छूट के लिए बनाई गई वेबसाइट सरल हरियाणा छोटे दुकानदारों व व्यापारियों के लिए आफत बनी हुई है। लोग प्रशासन की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करते हैं तो छूूट के सवाल पर केवल सरल हरियाणा की वेबसाइट बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
जब ये दुकानदार वेबसाइट पर जाते हैं तो पंजीकरण के नाम पर अनेक जानकारी के साथ लॉंगिट्यूड व लैटिट्यूड जैसे भौगोलिक प्वाइंट की जानकारी भरवाई जाती है। अधिकतर छोटे दुकानदारों के पास जहां पंजीकरण ही नहीं, वहीं भौगोलिक प्वाइंट की जानकारी तो विशेषज्ञ भी देने में चकरा जाएंगे। ऐसे में दूध, ब्रेड जैसा सामान बेचने से लेकर पलंबर व मैकेनिक की दुकान चलाने वाले लोगों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि या तो प्रशासन की ओर से मंजूरी बिल्कुल बंद कर दी जाए या फिर कोई आसान प्रक्रिया जारी की जाए। ताकि लोग परेशान होने से बच सकें।
एक माह से नहीं कोई आमदनी, ऊपर से किराये की मार
छोटे दुकानदारों की पीड़ा भी वाजिब है, इन दुकानदारों के भरोसे एक नहीं तीन से चार परिवारों का गुजारा चलता है। एक माह से दुकान बंद है। ऐसे में आमदनी तो दूर की बात है, किराये व बिजली बिल की चिंता सताने लगी है। इतना ही आमदनी बंद होने से घर के खर्चे पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है। बुधवार को कुछ दुकानदारों ने बताया कि दुकान खोलने की अनुमति मिलेगी या नहीं इसका पता नहीं। लेकिन आने वाले दिन उनके चिंता बढ़ा रहे हैं। दुकानों पर काम करने वाले लड़कों के वेतन आदि कहां से दे पाएंगे यह भी एक बड़ा सवाल है।
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व्यवस्था का दूसरा पहलू
जहां छूट मिली वहां सोशल डिस्टेंसिंग की नहीं परवाह
बुधवार को अमर उजाला की ओर से की गई पड़ताल में एक और सच सामने आया। एक ओर जहां कुछ दुकानदार-व्यापारी आमदनी ठप होने से परेशान हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग हैं जिनको छूट दी गई हैं वो सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कुछ गिनती के लोगों की लापरवाही के चलते ही जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैंक के सामने भीड़
प्रशासन की ओर से बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह उपभोक्ताओं द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराएं। प्रयास भी होते दिखाई देते हैं बावजूद इसके कुछ लोगों की लापरवाही 10 लाख की आबादी को खतरे में डाल रही है। शहर के झज्जर चौक के पास स्थित बैंक के सामने लगी भीड़ से देखा जा सकता है कि यदि एक व्यक्ति को भी कोराना पॉजिटिव हुआ तो वह कितने लोगों के लिए आफत बन सकता है।
पुरानी सब्जी मंडी में आम दिनों जैसी भीड़
शहर के बीचोबीच स्थित पुरानी सब्जी मंडी को देखकर यूं नहीं लगता है कि लॉकडाउन चल रहा है। यहां पर एक महीने पहले जैसे हालात देखे जा सकते हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से सब्जी विक्रेताओं के लिए अलग-अलग कॉलोनी व सेक्टर निर्धारित किए थ, लेकिन बुधवार को पुरानी सब्जी मंडी 20 से ज्यादा सब्जी व फल विक्रेता एक जगर पर ही जमा हुए थे। एक-एक रेहड़ी पर अनेक ग्राहकों की भीड़ लगी देखी जा सकती है।
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जब ये दुकानदार वेबसाइट पर जाते हैं तो पंजीकरण के नाम पर अनेक जानकारी के साथ लॉंगिट्यूड व लैटिट्यूड जैसे भौगोलिक प्वाइंट की जानकारी भरवाई जाती है। अधिकतर छोटे दुकानदारों के पास जहां पंजीकरण ही नहीं, वहीं भौगोलिक प्वाइंट की जानकारी तो विशेषज्ञ भी देने में चकरा जाएंगे। ऐसे में दूध, ब्रेड जैसा सामान बेचने से लेकर पलंबर व मैकेनिक की दुकान चलाने वाले लोगों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि या तो प्रशासन की ओर से मंजूरी बिल्कुल बंद कर दी जाए या फिर कोई आसान प्रक्रिया जारी की जाए। ताकि लोग परेशान होने से बच सकें।
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एक माह से नहीं कोई आमदनी, ऊपर से किराये की मार
छोटे दुकानदारों की पीड़ा भी वाजिब है, इन दुकानदारों के भरोसे एक नहीं तीन से चार परिवारों का गुजारा चलता है। एक माह से दुकान बंद है। ऐसे में आमदनी तो दूर की बात है, किराये व बिजली बिल की चिंता सताने लगी है। इतना ही आमदनी बंद होने से घर के खर्चे पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है। बुधवार को कुछ दुकानदारों ने बताया कि दुकान खोलने की अनुमति मिलेगी या नहीं इसका पता नहीं। लेकिन आने वाले दिन उनके चिंता बढ़ा रहे हैं। दुकानों पर काम करने वाले लड़कों के वेतन आदि कहां से दे पाएंगे यह भी एक बड़ा सवाल है।
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व्यवस्था का दूसरा पहलू
जहां छूट मिली वहां सोशल डिस्टेंसिंग की नहीं परवाह
बुधवार को अमर उजाला की ओर से की गई पड़ताल में एक और सच सामने आया। एक ओर जहां कुछ दुकानदार-व्यापारी आमदनी ठप होने से परेशान हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग हैं जिनको छूट दी गई हैं वो सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कुछ गिनती के लोगों की लापरवाही के चलते ही जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैंक के सामने भीड़
प्रशासन की ओर से बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह उपभोक्ताओं द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराएं। प्रयास भी होते दिखाई देते हैं बावजूद इसके कुछ लोगों की लापरवाही 10 लाख की आबादी को खतरे में डाल रही है। शहर के झज्जर चौक के पास स्थित बैंक के सामने लगी भीड़ से देखा जा सकता है कि यदि एक व्यक्ति को भी कोराना पॉजिटिव हुआ तो वह कितने लोगों के लिए आफत बन सकता है।
पुरानी सब्जी मंडी में आम दिनों जैसी भीड़
शहर के बीचोबीच स्थित पुरानी सब्जी मंडी को देखकर यूं नहीं लगता है कि लॉकडाउन चल रहा है। यहां पर एक महीने पहले जैसे हालात देखे जा सकते हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से सब्जी विक्रेताओं के लिए अलग-अलग कॉलोनी व सेक्टर निर्धारित किए थ, लेकिन बुधवार को पुरानी सब्जी मंडी 20 से ज्यादा सब्जी व फल विक्रेता एक जगर पर ही जमा हुए थे। एक-एक रेहड़ी पर अनेक ग्राहकों की भीड़ लगी देखी जा सकती है।