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शरद पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा सुनना विशेष फलदायी : वीके शर्मा
Sat, 28 Oct 2023 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 28 Oct 2023 11:56 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहर की यादव नगर कॉलोनी में शरद पूर्णिमा पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। राकेश जांगड़ा के आवास पर पुरोहित पंडित अजय शर्मा ने अनुष्ठान संपन्न कराया।
उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा अनेक रूपों में की जाती है। उनमें से भगवान का सत्यनारायण रूप इस कथा में बताया गया है। गुरुग्राम निवासी उद्योगपति वीके शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा विशेष फलदायी है। कथा में छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया कि जीवन में सत्यव्रत का पालन पूरी निष्ठा व शुद्धता के साथ करना चाहिए। पूर्णिमा को इस कथा का परिवार के साथ वाचन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण भगवान की पूजा के लिए दूध, केला, गंगाजल, तुलसी, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है जो भगवान को अत्यंत प्रिय है। प्रसाद के रूप में फल मिष्ठान के अतिरिक्त आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर प्रसाद बनता है, जिसे पंजीरी कहा जाता है। उसका भी भोग लगाया जाता है। इस अवसर पर सत्यपाल जांगिड़, जितेंद्र कुमार, माया देवी, भरपाई देवी, मुकेश जांगड़ा, पूनम देवी, पूजा देवी, यशपाल, नीलम देवी, संयोगिता, सिमरन सहित अनेक भक्तों ने कथा का श्रवण कर प्रसाद ग्रहण किया।
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रेवाड़ी। शहर की यादव नगर कॉलोनी में शरद पूर्णिमा पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। राकेश जांगड़ा के आवास पर पुरोहित पंडित अजय शर्मा ने अनुष्ठान संपन्न कराया।
उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा अनेक रूपों में की जाती है। उनमें से भगवान का सत्यनारायण रूप इस कथा में बताया गया है। गुरुग्राम निवासी उद्योगपति वीके शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा विशेष फलदायी है। कथा में छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया कि जीवन में सत्यव्रत का पालन पूरी निष्ठा व शुद्धता के साथ करना चाहिए। पूर्णिमा को इस कथा का परिवार के साथ वाचन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण भगवान की पूजा के लिए दूध, केला, गंगाजल, तुलसी, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है जो भगवान को अत्यंत प्रिय है। प्रसाद के रूप में फल मिष्ठान के अतिरिक्त आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर प्रसाद बनता है, जिसे पंजीरी कहा जाता है। उसका भी भोग लगाया जाता है। इस अवसर पर सत्यपाल जांगिड़, जितेंद्र कुमार, माया देवी, भरपाई देवी, मुकेश जांगड़ा, पूनम देवी, पूजा देवी, यशपाल, नीलम देवी, संयोगिता, सिमरन सहित अनेक भक्तों ने कथा का श्रवण कर प्रसाद ग्रहण किया।
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