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Rewari News: पंचायतों की तरह अब शहर के वार्ड भी किए जाएंगे टीबी मुक्त

Sun, 05 Oct 2025 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 05 Oct 2025 12:30 AM IST
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Like the Panchayats, now the city wards will also be made TB free.
रेवाड़ी। टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब ग्राम पंचायतों की तरह शहर के वार्डों को भी टीबी मुक्त बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए जिलास्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। तय मानकों को पूरा करने वाले वार्डों को विश्व क्षय रोग दिवस पर जिला उपायुक्त की ओर से टीबी फ्री वार्ड का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
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यदि कोई वार्ड लगातार तीन साल तक टीबी मुक्त रहता है तो उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्वर्ण प्रतिमा देकर सम्मानित किया जाएगा। पहले वर्ष में टीबी मुक्त वार्ड को महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा दी जाएगी। चयन प्रक्रिया के तहत हर साल प्रति 1000 लोगों पर कम से कम 30 व्यक्तियों की टीबी जांच की जाएगी। साथ ही टीबी मरीजों के परिजनों, सहकर्मियों व जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वालों की भी जांच अनिवार्य होगी।
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जिला टीबी अधिकारी व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि केवल खांसी ही टीबी का लक्षण नहीं है। इसके अन्य लक्षण भी हैं।बलगम वाली खांसी, बलगम में खून आना, लगातार थकान रहना, रात को पसीना आना, वजन कम होना, सीने में दर्द, बुखार, ठंड में भी पसीना आना, सांस लेने में परेशानी होना और शरीर में गांठ होना भी लक्षण हैं।
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उन्होंने अपील की है कि लोग समय पर जांच कराएं। पौष्टिक आहार लें और पूरा इलाज करवाएं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है।
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आठ माह में 25,503 की हुई जांच, 1246 में टीबी की हुई पुष्टि
जिले में टीबी की रोकथाम के लिए जनवरी से अगस्त तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25,503 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई थी जिनमें 1246 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार इनमें से अधिकतर मरीजों में लंबे समय से बीमारी के लक्षण मौजूद थे लेकिन उन्होंने समय पर जांच नहीं करवाई। यदि ये लोग पहले ही जांच करवा लेते तो खुद समय से इलाज कराने के साथ ही अपने परिवार और आसपास के अन्य लोगों को संक्रमण से बचा सकते थे। टीबी विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि सर्वे के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनमें लक्षण होने के बाद भी जांच या इलाज नहीं करवाते। यही कारण है कि बीमारी फैलती जाती है। एक संक्रमित मरीज 10 से 15 अन्य लोगों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है।

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यह होंगे मानदंड

प्रति 1000 जनसंख्या पर सिर्फ 1 केस हो।

हर 1000 पर कम से कम 30 बलगम की जांच हो।

सभी मरीजों का ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट हो।

किसी भी मरीज में दवा छोड़ने की स्थिति न हो।

सभी मरीजों को निक्षय पोषण योजना का लाभ मिले।

सभी मरीज गोद लिए गए हों और पोषण किट प्राप्त करें।

वर्जन
वार्डों को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 31 वार्डों में विशेष कैंपेन चलाया जाएगा। टीबी मरीजों की पहचान कर उपचार करवाया जाएगा।-डॉ. दीपक वर्मा, नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन रेवाड़ी।
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