{"_id":"6999f4dc9dfc2f353908bfb8","slug":"learning-from-mother-tongue-is-easy-pradeep-kumar-rewari-news-c-198-1-rew1001-233948-2026-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"मातृभाषा से सीखने की प्रक्रिया होती है सहज : प्रदीप कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मातृभाषा से सीखने की प्रक्रिया होती है सहज : प्रदीप कुमार
Sat, 21 Feb 2026 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:39 PM IST
विज्ञापन
रेवाड़ी। निपुण हरियाणा मिशन के तहत शनिवार को सभी प्राथमिक विद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया।जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार दहिया ने कहा कि मातृभाषा में बच्चों की सीखने की प्रक्रिया सहज और प्रभावी होती है।
जिला एफएलएन समन्वयक चरण सिंह ने बताया कि मातृभाषा बच्चों की पहचान, सोच और सीखने की आधारशिला होती है। विद्यालयों में संवाद, चित्र वार्ता, लोकगीत एवं बाल कविताएं, कहानी श्रवण एवं पुनर्कथन, दादी-नानी की कहानियां, भूमिका निर्वहन तथा समाचार पत्र पठन जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की गईं।
इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमताओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षण से बच्चों की संप्रेषण क्षमता, शब्द भंडार, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह पहल प्राथमिक स्तर पर बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो रही है।
विज्ञापन
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार दहिया ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षण बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को सहज, प्रभावी और आनंददायक बनाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा में शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है, ताकि बच्चे अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उन्होंने आगे बताया कि जिले में निरंतर अकादमिक मार्गदर्शन, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की भाषा एवं गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। मातृभाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बच्चों में भाषा के प्रति रूचि और आत्मविश्वास विकसित करने में सहायक होगी।
विज्ञापन
जिला एफएलएन समन्वयक चरण सिंह ने बताया कि मातृभाषा बच्चों की पहचान, सोच और सीखने की आधारशिला होती है। विद्यालयों में संवाद, चित्र वार्ता, लोकगीत एवं बाल कविताएं, कहानी श्रवण एवं पुनर्कथन, दादी-नानी की कहानियां, भूमिका निर्वहन तथा समाचार पत्र पठन जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की गईं।
विज्ञापन
इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमताओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षण से बच्चों की संप्रेषण क्षमता, शब्द भंडार, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह पहल प्राथमिक स्तर पर बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो रही है।
विज्ञापन
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार दहिया ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षण बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को सहज, प्रभावी और आनंददायक बनाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा में शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है, ताकि बच्चे अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उन्होंने आगे बताया कि जिले में निरंतर अकादमिक मार्गदर्शन, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की भाषा एवं गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। मातृभाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बच्चों में भाषा के प्रति रूचि और आत्मविश्वास विकसित करने में सहायक होगी।