सलाखों से सुरों का तक सफर: 'उड़ान' बैंड से जिंदगी को नई दिशा दे रहे पूर्व कैदी, समाज को सकारात्मक संदेश
रेवाड़ी के गुलाबी नगर निवासी राजकुमार पहले शिक्षक थे। छेड़छाड़ के आरोपों के मामले में वह लंबे समय तक भौंडसी जेल में रहे। फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जनवरी 2026 में जेल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात प्रदीप से हुई।
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किसी की जिंदगी में हुई एक गलती उसे लंबे समय तक पहचान दे सकती है, लेकिन क्या वही गलती पूरी जिंदगी का फैसला भी कर दे। इसी सवाल का जवाब तलाश रही है हरियाणा की एक अनूठी पहल ‘उड़ान म्यूजिक बैंड’। जेल में रहे और अब बाहर आ चुके ऐसे लोगों को संगीत के मंच से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिनमें गाने और संगीत की प्रतिभा है। मकसद है कि अतीत की पहचान पीछे छूटे और हुनर उनकी नई पहचान बने।
इस पहल की शुरुआत झज्जर जिले के बहादुरगढ़ निवासी और नूंह जिला जेल में तैनात हवलदार प्रदीप जेलपुरिया ने की है। अब तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों के करीब 10 लोग इस समूह से जुड़ चुके हैं। इनमें कोई ट्रक चलाकर परिवार पाल रहा है तो कोई संगीत के जरिए अपनी पुरानी पहचान बदलने की कोशिश कर रहा है। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने जेल में संगीत सीखा और बाहर आने के बाद उसी हुनर को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना।
प्रदीप बताते हैं कि जेल में ड्यूटी के दौरान उन्होंने कई ऐसे लोगों को देखा, जो काम करते हुए गुनगुनाते थे। उनके भीतर संगीत की प्रतिभा थी, लेकिन उसे मंच नहीं मिला था। यहीं से विचार आया कि यदि इन लोगों को सही दिशा और मंच दिया जाए तो उनकी ऊर्जा को सकारात्मक काम में लगाया जा सकता है।
डीजीपी के सामने रखा प्रस्ताव, अब रिहर्सल शुरू
7 फरवरी 2026 को जेल पासिंग कार्यक्रम के दौरान डीजीपी आलोक मित्तल के सामने इस पहल का प्रस्ताव रखा गया था। मार्च में समूह के माध्यम से काम करने की अनुमति मिलने के बाद ‘उड़ान’ से जुड़े सदस्य रिहर्सल कर रहे हैं। अब उनका लक्ष्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देना है। आगे इन सदस्यों को संगीत से जुड़े स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी कोशिश की जा रही है।
रेवाड़ी के राजकुमार... शिक्षक से फिर संगीत की राह
रेवाड़ी के गुलाबी नगर निवासी राजकुमार पहले शिक्षक थे। छेड़छाड़ के आरोपों के मामले में वह लंबे समय तक भौंडसी जेल में रहे। फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जनवरी 2026 में जेल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात प्रदीप से हुई। प्रदीप ने उनकी संगीत प्रतिभा पहचानी और ‘उड़ान’ से जोड़ दिया। अब राजकुमार संगीत को अपनी नई पहचान बनाने का जरिया मान रहे हैं।
‘घूंघट’ गाने को मिले लाखों व्यूज, लेकिन मिले सिर्फ 2 हजार
करीब 10 साल पहले रोहतक जेल में प्रदीप से मिले संजू ने वहीं संगीत सीखा। जेल से बाहर आने के बाद 2021 में उनका ‘घूंघट’ गाना रिलीज हुआ। सोशल मीडिया पर इसे लाखों लोगों ने पसंद किया। संजू के मुताबिक, इस गाने के लिए उन्हें सिर्फ 2 हजार रुपए मिले, जबकि उनके साथ काम करने वाले लोगों ने इससे लाखों रुपए कमाए। फिर भी संगीत से उनका जुड़ाव नहीं टूटा। अब वह दोबारा अपने हुनर को मंच देना चाहते हैं।
ट्रक चलाते हैं मंजूर, खाली समय में करते हैं संगीत का अभ्यास
नूंह के दीहाना गांव निवासी मंजूर खान शराब तस्करी के मामले में जेल में रहे। वर्ष 2023 में प्रदीप से मुलाकात के बाद उनकी संगीत में रुचि बढ़ी। आजीविका के लिए वह ट्रक चलाते हैं। काम के बाद मिलने वाले समय में संगीत का अभ्यास करते हैं। उनके लिए संगीत अब केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने की उम्मीद है।
जेल के अनुभव को गीतों के संदेश में बदलना चाहते हैं
नूंह के उजिना निवासी नरेश हत्या के मामले में जेल में रहे। वर्ष 2022 में प्रदीप से मुलाकात के बाद उन्होंने हरियाणवी गीत सीखने शुरू किए। अब वह ‘उड़ान’ के साथ संगीत के जरिए लोगों को गलत रास्ते से दूर रहने और बेहतर जीवन चुनने का संदेश देना चाहते हैं।
धार्मिक संदेशों के जरिए सकारात्मक राह दिखाने की कोशिश
नूंह के कलवाड़ी गांव निवासी नरेश कुमार पत्नी की हत्या के मामले में जेल में रहे। अब वह धार्मिक वचनों और संदेशों के माध्यम से लोगों को सकारात्मक जीवन जीने और गलत रास्तों से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ‘उड़ान’ से जुड़कर वह अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
10 साल पुरानी मुलाकात फिर बनी नई शुरुआत की वजह
गोहाना निवासी साहिल की करीब 10 साल पहले रोहतक जेल में प्रदीप से मुलाकात हुई थी। वहीं रोहतक निवासी सनी की उनसे करीब 8 साल पहले मुलाकात हुई थी। करीब छह महीने पहले सनी ने दोबारा प्रदीप से संपर्क कर संगीत सीखने और बैंड से जुड़ने की इच्छा जताई। अब दोनों ‘उड़ान’ के साथ अपने हुनर को निखारने की कोशिश कर रहे हैं।
नजरिया : सजा खत्म होने के बाद मौका भी जरूरी
‘उड़ान’ की कहानी सिर्फ संगीत की कहानी नहीं है। यह उस सोच को सामने लाती है कि जेल की सजा पूरी होने के बाद व्यक्ति को समाज में दोबारा खड़े होने का अवसर भी मिलना चाहिए। संगीत के मंच के जरिए इन लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने, आत्मविश्वास हासिल करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता देने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह है कि इनकी यह ‘उड़ान’ कितनी दूर तक जाती है।