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Rewari News: सेक्टर-18 में जमीन हेरफेर मामले में जेई पर गिर सकती है गाज
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रेवाड़ी। शहर के सेक्टर-18 में 3 मरला प्लॉट की नपाई के दौरान 2 मीटर कम जगह मिलने के मामले में एचएसवीपी के तत्कालीन संपदा अधिकारी पर कार्रवाई होने के बाद इस मामले में अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। दरअसल, जब तत्कालीन डीसी अशोक कुमार गर्ग की ओर से एडीसी से जांच कराई गई थी तो जांच में जेई की भी संदिग्ध भूमिका सामने आई थी। दूसरी ओर प्लॉट मालिक को उसका पूरा 3 मरला का प्लॉट अभी भी नहीं मिल पाया है। प्लॉट मालिक ने पूरी जमीन मांगी तो अधिकारियों ने रोड पर ही मकान बनाने का ऑफर दे दिया। शिक्षिका ने जब इन बातों को जेई से लिखित में मांगा तो किसी प्रकार का जवाब फिर नहीं दिया गया। इसके बाद थक हार कर सीएम विंडो पर शिकायत लगाई गई। आरोप है की शिकायत पहुंचने के बाद भी अतिक्रमण नहीं होने का दावा करके अधिकारियों ने शिकायत बंद करा दी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास शुक्रवार को यह मामला आया तो उन्होंने बड़ी कार्रवाई करते हुए एचएसवीपी के तत्कालीन संपदा अधिकारी विजय को सस्पेंड कर दिया गया।
ऐसे हुआ था मामला उजागर
शिक्षिका सविता ने बताया कि उसने 2014 में सेक्टर-18 में 3 मरला (90.75 वर्गगज) का प्लॉट खरीदा था। वर्ष 2021 में मकान बनाने के लिए एचएसवीपी की तरफ से प्लॉट की डिमार्केशन कराई गई। कर्मचारियों ने नपाई की तो पता चला कि प्लॉट पूरा 3 मरला का नहीं है। इसमें 2 मीटर लंबाई कम है। यदि पूरा किया जाए तो यह रोड पर आ जाएगा। कर्मचारियों ने साथ वाले मकान की भी डिमार्केशन की थी, जिसमें पता चला कि यह मकान भी 2 मीटर आगे सड़क पर बना हुआ है। सविता ने इसको लेकर आरटीआई लगाई थी, जिसमें बताया गया कि साथ वाले प्लॉट पर बना मकान नियमानुसार नहीं होने के बावजूद उसकी कंप्लीशन तक दी हुई है। हालांकि, उक्त प्लॉट के मामले में भी प्लॉट मालिक की बजाय विभाग की ही गलती है।
नगर और ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पेश करेंगे रिपोर्ट
इस शिकायत को आगामी कार्रवाई के लिए विजय कुमार को ही भेजा गया। नियमानुसार प्रथम श्रेणी के अधिकारी के विरुद्ध जांच उससे एक पद ऊपर के अधिकारी द्वारा बनती है, लेकिन यहां पर इस नियम का पालन नहीं किया गया। ऐसे में सरकार ने विजय कुमार और गौरव यादव को ही उनके खिलाफ आई शिकायत पर विभागीय कार्रवाई करने और उसकी एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद संपदा अधिकारी ने कोई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। इस मामले में सीएम मनोहर लाल ने संज्ञान लिया और विजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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ऐसे हुआ था मामला उजागर
शिक्षिका सविता ने बताया कि उसने 2014 में सेक्टर-18 में 3 मरला (90.75 वर्गगज) का प्लॉट खरीदा था। वर्ष 2021 में मकान बनाने के लिए एचएसवीपी की तरफ से प्लॉट की डिमार्केशन कराई गई। कर्मचारियों ने नपाई की तो पता चला कि प्लॉट पूरा 3 मरला का नहीं है। इसमें 2 मीटर लंबाई कम है। यदि पूरा किया जाए तो यह रोड पर आ जाएगा। कर्मचारियों ने साथ वाले मकान की भी डिमार्केशन की थी, जिसमें पता चला कि यह मकान भी 2 मीटर आगे सड़क पर बना हुआ है। सविता ने इसको लेकर आरटीआई लगाई थी, जिसमें बताया गया कि साथ वाले प्लॉट पर बना मकान नियमानुसार नहीं होने के बावजूद उसकी कंप्लीशन तक दी हुई है। हालांकि, उक्त प्लॉट के मामले में भी प्लॉट मालिक की बजाय विभाग की ही गलती है।
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इस शिकायत को आगामी कार्रवाई के लिए विजय कुमार को ही भेजा गया। नियमानुसार प्रथम श्रेणी के अधिकारी के विरुद्ध जांच उससे एक पद ऊपर के अधिकारी द्वारा बनती है, लेकिन यहां पर इस नियम का पालन नहीं किया गया। ऐसे में सरकार ने विजय कुमार और गौरव यादव को ही उनके खिलाफ आई शिकायत पर विभागीय कार्रवाई करने और उसकी एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद संपदा अधिकारी ने कोई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। इस मामले में सीएम मनोहर लाल ने संज्ञान लिया और विजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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