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साहबी बैराज में छोड़े जा रहे दूषित पानी से 25 गांवों के ग्रामीणों का घरों में रहना मुश्किल : चिरंजीव राव
Mon, 27 Feb 2023 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 27 Feb 2023 12:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। विधायक चिरंजीव राव ने कहा कि रेवाड़ी, बावल व धारूहेड़ा कस्बों में दूषित पानी साहबी बैराज स्थित झील व इसके आसपास छोड़ा जा रहा है। दूषित पानी से साहबी क्षेत्र के खलियावास, खरखड़ा, निगानियावास, निखरी के अलावा आसपास के करीब 25 गावों के ग्रामीणों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। भूमिगत जलस्तर की गुणवत्ता भी खराब हो गई और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। इसके चलते उन्होंने विधानसभा में शून्य काल के दौरान भी सरकार के सामने समस्या के समाधान के लिए बोला था, लेकिन सरकार का इसके प्रति उदासीन रवैया रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी प्रधान सचिव और डीडीपीओ से जवाब मांग चुके हैं। वहीं काफी समय से साहबी में हो रहे पानी प्रदूषण को लेकर ग्रामिणों द्वारा भी आवाज उठाई जा रही है। कुछ समय पहले करीब 25 गांवों के प्रतिनिधियों ने भी महापंचायत की थी।
उन्होंने कहा कि इस बार बजट सत्र में भी मुख्यमंत्री ने स्वयं घोषणा की थी कि मसानी बैराज को पर्यटन स्थल बनाया जाएगा, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भाजपा के मंत्री, विधायकों और सांसदों को मसले पर बोलना चाहिए, लेकिन वे भी इस पर चुपी साधे हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि जनता की समस्याओं से से भाजपा नेताओं को कोई सरोकार नहीं है।
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रेवाड़ी। विधायक चिरंजीव राव ने कहा कि रेवाड़ी, बावल व धारूहेड़ा कस्बों में दूषित पानी साहबी बैराज स्थित झील व इसके आसपास छोड़ा जा रहा है। दूषित पानी से साहबी क्षेत्र के खलियावास, खरखड़ा, निगानियावास, निखरी के अलावा आसपास के करीब 25 गावों के ग्रामीणों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। भूमिगत जलस्तर की गुणवत्ता भी खराब हो गई और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। इसके चलते उन्होंने विधानसभा में शून्य काल के दौरान भी सरकार के सामने समस्या के समाधान के लिए बोला था, लेकिन सरकार का इसके प्रति उदासीन रवैया रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी प्रधान सचिव और डीडीपीओ से जवाब मांग चुके हैं। वहीं काफी समय से साहबी में हो रहे पानी प्रदूषण को लेकर ग्रामिणों द्वारा भी आवाज उठाई जा रही है। कुछ समय पहले करीब 25 गांवों के प्रतिनिधियों ने भी महापंचायत की थी।
उन्होंने कहा कि इस बार बजट सत्र में भी मुख्यमंत्री ने स्वयं घोषणा की थी कि मसानी बैराज को पर्यटन स्थल बनाया जाएगा, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भाजपा के मंत्री, विधायकों और सांसदों को मसले पर बोलना चाहिए, लेकिन वे भी इस पर चुपी साधे हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि जनता की समस्याओं से से भाजपा नेताओं को कोई सरोकार नहीं है।
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