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Rewari News: प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को दी गई जानकारी
Mon, 09 Feb 2026 11:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 09 Feb 2026 11:41 PM IST
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फसल की जांच करते विशेषज्ञ। स्रोत : संस्था
धारूहेड़ा। हरियाणा मैनेजमेंट एंड एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (हमेटी) जींद की ओर से तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ धारूहेड़ा में किया गया। कार्यक्रम में हमेटी, जींद के निदेशक डॉ. कर्मचंद मुख्य अतिथि रहे। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को जनकारी दी गई।
शिविर में हरियाणा के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण शिविर का संयोजन डॉ. जोगेंद्र सिंह यादव द्वारा किया गया।
डॉ. कर्मचंद ने बताया कि हमेटी द्वारा प्रदेशभर में इस प्रकार के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
उन्होंने कहा कि महिला किसानों को भी किचन गार्डन लगाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे घर तक ताजी व पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो सकें और परिवार स्वस्थ रह सके। प्रशिक्षण के दौरान खेती में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की जा रही है।
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कीट विशेषज्ञ डॉ. बलबीर सिंह ने प्राकृतिक खेती में कीट नियंत्रण के उपायों पर प्रकाश डालते हुए नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क, येलो स्टिकर, फेरोमोन ट्रैप आदि के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने कीटों के जीवन चक्र, मित्र कीटों और शत्रु कीटों की पहचान के महत्व को भी समझाया। वहीं, मृदा विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर दयाल ने मृदा स्वास्थ्य को प्राकृतिक खेती की रीढ़ बताते हुए हरी खाद के प्रयोग और मिट्टी व पानी की जांच की सही विधि पर जोर दिया।
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शिविर में हरियाणा के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण शिविर का संयोजन डॉ. जोगेंद्र सिंह यादव द्वारा किया गया।
डॉ. कर्मचंद ने बताया कि हमेटी द्वारा प्रदेशभर में इस प्रकार के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
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उन्होंने कहा कि महिला किसानों को भी किचन गार्डन लगाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे घर तक ताजी व पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो सकें और परिवार स्वस्थ रह सके। प्रशिक्षण के दौरान खेती में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की जा रही है।
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कीट विशेषज्ञ डॉ. बलबीर सिंह ने प्राकृतिक खेती में कीट नियंत्रण के उपायों पर प्रकाश डालते हुए नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क, येलो स्टिकर, फेरोमोन ट्रैप आदि के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने कीटों के जीवन चक्र, मित्र कीटों और शत्रु कीटों की पहचान के महत्व को भी समझाया। वहीं, मृदा विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर दयाल ने मृदा स्वास्थ्य को प्राकृतिक खेती की रीढ़ बताते हुए हरी खाद के प्रयोग और मिट्टी व पानी की जांच की सही विधि पर जोर दिया।