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कोरोना की मार से उबरने का प्रयास कर रहे उद्योगों पर अब आंदोलन की मार
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आईएमटी बावल।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कोरोना की मार से उबरने का प्रयास कर रहे उद्योगों पर अब किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है। देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण दिल्ली-जयपुर हाईवे पर 40 किमी की दूरी में पूूरी तरह बंद होने से देश के उद्यमी ही नहीं अमेरिकी, कोरियाई व जापानी उद्यमियों के बीच भी छवि खराब हो रही है। ऐसे में भविष्य में रेवाड़ी के बावल या धारूहेड़ा में ही नहीं देश में विदेशी कंपनियों की ओर से किए जाने वाले निवेश पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को किसानों के साथ वार्ता कर जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि देश के विकास को गति मिल सके।
बता दें कि रेवाड़ी, धारूहेड़ा व बावल में करीब एक हजार कंपनियां हैं। अकेले बावल में 40 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं, इनमें 12 से ज्यादा देशों की कंपनी काम कर रही हैं। वहीं छोटी फैक्ट्री भी हीरो मोटरकोर्प, होंडा जैसे बड़े प्लांट के लिए पुर्जे बनाती हैं, लेकिन यहां पर भी कच्चे माल की कमी के चलते इन बड़ी कंपनियों में उत्पादन पर असर पड़ रहा है। इससे देश व प्रदेश में राजकोषीय घाटा भी बढ़ सकता है। वहीं देश -विदेश में रेवाड़ी की चमक बढ़ाने वाली मेटल इंडस्ट्री पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस इंडस्ट्री में अधिकतर माल मुंबई सहित देश के अनेक राज्यों व विदेशों से आता है। ऐसे में जहां कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, वहीं तैयार माल भी नहीं बाहर जा पा रहा है। एक सप्ताह ऐसा ही रहा तो हजारों लोगों के रोजगार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
43348.82 लाख रुपये के माल का एक्सपोर्ट
वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार रेवाड़ी की महज 11 कंपनियों से एक साल में दूसरे देशों में करीब 43,348 लाख रुपये के माल का एक्सपोर्ट होता है। जो कि पांच साल में बढ़कर दोगुना तक पहुंच चुका है। मेटल उद्योग जहां रेवाड़ी में ज्यादा है, वहीं बावल व धारूहेड़ा में ऑटोमोबाइल कंपनियों का हब है। लेकिन अब गुरुग्राम-रेवाड़ी सीमा के कापड़ीवास बॉर्डर से लेकर हरियाणा-राजस्थान सीमा तक करीब 40 किमी. की दूूरी में हाईवे को पुलिस ने पूरी तरह बंद किया हुआ है। इस 40 किमी. के बीच में हीरो मोटरकोर्प भी आती है। इतना ही नहीं राजस्थान के भिवाड़ी व टपूकड़ा औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी यही हाईवे सबसे कारगर है, ऐसे में जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो गुरुग्राम से लेकर नीमराना तक के उद्योगों को बेहद ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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कच्चा माल मुंबई व दिल्ली से लेकर दूसरे देशों से भी आता है। पहले से ही उद्योग कोरोना की मार झेल रहे थे, उससे ठीक से उबर भी नहीं पाए हैं अब हाईवे बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है और तैयार माल भी नहीं पहुंच पा रहा है। सरकार को उद्योगों को बचाने के लिए जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना चाहिए। नहीं तो कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे।
-राधेश्याम गुप्ता, गुप्ता मेटल इंडस्ट्रीज, रेवाड़ी
जापानी बावल आने की बात कहते हैं तो उनको स्थिति के बारे में बताया जाता है। बिगड़ते हालात से व चिंतित हैं। मानेसर व टपूकड़ा माल नहीं जा पा रहा है। कच्चा माल भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। गुरुग्राम से आने वाले लोग महज चार-चार घंटे ही काम कर पा रहे हैं। किसान आंदोलन के चलते देश की छवि पर भी असर पड़ रहा है। जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में होने वाले निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है। उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हैं।
-विनोद जोशी, जीएम, संकाई इंडिया, बावल
पहली बार कच्चे माल की कीमत बेहद ज्यादा बढ़ गई है, कच्चा माल समय पर नहीं मिल रहा है। इसके अलावा तैयार माल भी नहीं जा पा रहा है। हीरो मोटरकोर्प के लिए पुर्जे तैयार किए जाते हैं। लेकिन माल की कमी के चलते उत्पादन पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है। सरकार को किसानों की मांगों का जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना चाहिए। पहले से ही उद्योग कारोना की मार झेल रहे थे, अब और ज्यादा परेशानी बढ़ गई है। समाधान जल्द नहीं हुआ तो रोजगार संकट भी बढ़ सकता है।
बीरेंद्र चौधरी, जीएम, शिव इंडस्ट्रीज, धारूहेड़ा
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बता दें कि रेवाड़ी, धारूहेड़ा व बावल में करीब एक हजार कंपनियां हैं। अकेले बावल में 40 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं, इनमें 12 से ज्यादा देशों की कंपनी काम कर रही हैं। वहीं छोटी फैक्ट्री भी हीरो मोटरकोर्प, होंडा जैसे बड़े प्लांट के लिए पुर्जे बनाती हैं, लेकिन यहां पर भी कच्चे माल की कमी के चलते इन बड़ी कंपनियों में उत्पादन पर असर पड़ रहा है। इससे देश व प्रदेश में राजकोषीय घाटा भी बढ़ सकता है। वहीं देश -विदेश में रेवाड़ी की चमक बढ़ाने वाली मेटल इंडस्ट्री पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस इंडस्ट्री में अधिकतर माल मुंबई सहित देश के अनेक राज्यों व विदेशों से आता है। ऐसे में जहां कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, वहीं तैयार माल भी नहीं बाहर जा पा रहा है। एक सप्ताह ऐसा ही रहा तो हजारों लोगों के रोजगार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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43348.82 लाख रुपये के माल का एक्सपोर्ट
वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार रेवाड़ी की महज 11 कंपनियों से एक साल में दूसरे देशों में करीब 43,348 लाख रुपये के माल का एक्सपोर्ट होता है। जो कि पांच साल में बढ़कर दोगुना तक पहुंच चुका है। मेटल उद्योग जहां रेवाड़ी में ज्यादा है, वहीं बावल व धारूहेड़ा में ऑटोमोबाइल कंपनियों का हब है। लेकिन अब गुरुग्राम-रेवाड़ी सीमा के कापड़ीवास बॉर्डर से लेकर हरियाणा-राजस्थान सीमा तक करीब 40 किमी. की दूूरी में हाईवे को पुलिस ने पूरी तरह बंद किया हुआ है। इस 40 किमी. के बीच में हीरो मोटरकोर्प भी आती है। इतना ही नहीं राजस्थान के भिवाड़ी व टपूकड़ा औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी यही हाईवे सबसे कारगर है, ऐसे में जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो गुरुग्राम से लेकर नीमराना तक के उद्योगों को बेहद ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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कच्चा माल मुंबई व दिल्ली से लेकर दूसरे देशों से भी आता है। पहले से ही उद्योग कोरोना की मार झेल रहे थे, उससे ठीक से उबर भी नहीं पाए हैं अब हाईवे बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है और तैयार माल भी नहीं पहुंच पा रहा है। सरकार को उद्योगों को बचाने के लिए जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना चाहिए। नहीं तो कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे।
-राधेश्याम गुप्ता, गुप्ता मेटल इंडस्ट्रीज, रेवाड़ी
जापानी बावल आने की बात कहते हैं तो उनको स्थिति के बारे में बताया जाता है। बिगड़ते हालात से व चिंतित हैं। मानेसर व टपूकड़ा माल नहीं जा पा रहा है। कच्चा माल भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। गुरुग्राम से आने वाले लोग महज चार-चार घंटे ही काम कर पा रहे हैं। किसान आंदोलन के चलते देश की छवि पर भी असर पड़ रहा है। जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में होने वाले निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है। उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हैं।
-विनोद जोशी, जीएम, संकाई इंडिया, बावल
पहली बार कच्चे माल की कीमत बेहद ज्यादा बढ़ गई है, कच्चा माल समय पर नहीं मिल रहा है। इसके अलावा तैयार माल भी नहीं जा पा रहा है। हीरो मोटरकोर्प के लिए पुर्जे तैयार किए जाते हैं। लेकिन माल की कमी के चलते उत्पादन पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है। सरकार को किसानों की मांगों का जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना चाहिए। पहले से ही उद्योग कारोना की मार झेल रहे थे, अब और ज्यादा परेशानी बढ़ गई है। समाधान जल्द नहीं हुआ तो रोजगार संकट भी बढ़ सकता है।
बीरेंद्र चौधरी, जीएम, शिव इंडस्ट्रीज, धारूहेड़ा