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सुकन्या की आड़ में कोख में बच्चों को मारने का खेल, पहले अवैध रूप से गर्भपात, हालत बिगड़ी तो चढ़ाया दूसरे ग्रुप का खून, डॉक्टर गिरफ्तार
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शहर के सेक्टर-3 स्थित एक अस्पताल में कार्रवाई करते पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार व ड्रग इस्?
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। शहर के पॉश इलाके सेक्टर-3 स्थित एक निजी अस्पताल में अवैध रूप से गर्भपात गिराने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एमटीपी (अवैध रूप से गर्भपात गिराने वाली दवा देना) रेड की गई है। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर मॉडल टाउन थाना पुलिस ने अवैध रूप से गर्भपात कराने, दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने व उपचार के दौरान गंभीर लापरवाही की धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए महिला चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया है। महिला चिकित्सक को कोर्ट में पेश करने से पहले कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।
पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अप्रैल में अवैध रूप से गर्भपात कराने व गलत ब्लड चढ़ाने की शिकायत मिली थी। इस दौरान भी जांच की गई, लेकिन बुधवार शाम को छापा मारा गया। डॉ. संजय ने बताया कि बीएएमएस डॉक्टर गर्भपात नहीं करा सकते हैं, लेकिन इस केस में पहले एमटीपी किट से बाद में क्लीनिकल गर्भपात कराया गया। हालत बिगड़ी तो गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। बता दें कि शहर का यह वही अस्पताल है जहां पर डिलिवरी के बाद सुकन्या योजना के नाम पर बेटियों के नाम खाते अपनी तरफ से खुलवाए जाते हैं।
29 अप्रैल को शिकायत, 4 माह बाद कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक युवक ने सीएमओ को शिकायत देकर कहा था कि उसने अपनी पत्नी को सेक्टर-3 स्थित गंगा सहाय अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर बीएएमएस चिकित्सक ने पहले गर्भपात कराने के लिए गोलियां दी, इसके बाद एक माह तक रक्तस्राव नहीं रुक सका। डॉक्टर के पास पहुंचे तो उसने कुछ टुकड़े कहने की बात कहते हुए क्लीनिकल गर्भपात किया। लेकिन ज्यादा खून बहने के चलते रक्त चढ़ाने की बात कही गई, यहां पर भी चिकित्सक ने ब्लड ग्रुप ए व बी में गड़बड़ी करते हुए दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया। इसके बाद महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। इसके बाद महिला को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया था। महिला का अभी तक भी पीजीआई में उपचार चल रहा है। इसके बाद ही 29 अप्रैल को महिला के पति ने सीएमओ को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई चार माह बाद हुई।
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बेटी के जन्म पर सुकन्या खाते की योजना चलाता है अस्पताल
सेक्टर-3 के जिस अस्पताल में अवैध रूप से गर्भपात कराने का मामला सामने आया है, यहां पर सालों से सुकन्या खाते खोलने का आडंबर भी चल रहा था। अस्पताल में बेटी के जन्म पर 1100 रुपये खाते में भी जमा कराए जाते थे। यहां पर शहर के विधायक व अन्य नेताओं को भी इस तरह के कार्यक्रम कराए जाते थे। हालांकि अब पुलिसिया जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा।
चार माह में 120 पेज की बन गई जांच रिपोर्ट
पीएनडीटी नोडल अधिकारी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि शिकायत के बाद सीएमओ की ओर से जांच कमेटी गठित कर दी गई थी। शिकायतकर्ता से लेकर आरोपी डॉक्टर के बयान भी दर्ज किए गए। जांच में पाया गया कि आरोपी डॉक्टर ने एमटीपी किट के अलावा क्लीनिकल गर्भपात भी किया। जबकि बीएएमएस डॉक्टर इसके लिए अधिकृत ही नहीं है। ऐसे में अवैध रूप से गर्भपात कराना गैर कानूनी है, इसके तहत बुधवार को छापा मारा गया था। बता दें कि चार माह चली जांच 120 पेज की बन गई, लेकिन कार्रवाई में देरी पर भी सवाल खड़े होते हैं। लेकिन नोडल अधिकारी का कहना है कि कोरोना व सभी पक्षों बयान दर्ज कराने के चलते देरी हुई है। मेरे पास 21 जुलाई को फाइल आई, 22 को कार्रवाई : अमनदीप चौहान
देरी में सवाल पर ड्रग इंस्पेक्टर अमनदीप चौहान ने कहा कि 21 जुलाई को फाइल आई थी, 120 पन्ने पढ़ने में समय भी लगता है। 22 जुलाई को कार्रवाई कर दी गई है। अवैध रूप से गर्भपात कराने, गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने व गंभीर लापरवाही की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी डॉक्टर को पुलिस ने शाम को ही गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे में मामलों में सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
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पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अप्रैल में अवैध रूप से गर्भपात कराने व गलत ब्लड चढ़ाने की शिकायत मिली थी। इस दौरान भी जांच की गई, लेकिन बुधवार शाम को छापा मारा गया। डॉ. संजय ने बताया कि बीएएमएस डॉक्टर गर्भपात नहीं करा सकते हैं, लेकिन इस केस में पहले एमटीपी किट से बाद में क्लीनिकल गर्भपात कराया गया। हालत बिगड़ी तो गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। बता दें कि शहर का यह वही अस्पताल है जहां पर डिलिवरी के बाद सुकन्या योजना के नाम पर बेटियों के नाम खाते अपनी तरफ से खुलवाए जाते हैं।
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29 अप्रैल को शिकायत, 4 माह बाद कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक युवक ने सीएमओ को शिकायत देकर कहा था कि उसने अपनी पत्नी को सेक्टर-3 स्थित गंगा सहाय अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर बीएएमएस चिकित्सक ने पहले गर्भपात कराने के लिए गोलियां दी, इसके बाद एक माह तक रक्तस्राव नहीं रुक सका। डॉक्टर के पास पहुंचे तो उसने कुछ टुकड़े कहने की बात कहते हुए क्लीनिकल गर्भपात किया। लेकिन ज्यादा खून बहने के चलते रक्त चढ़ाने की बात कही गई, यहां पर भी चिकित्सक ने ब्लड ग्रुप ए व बी में गड़बड़ी करते हुए दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया। इसके बाद महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। इसके बाद महिला को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया था। महिला का अभी तक भी पीजीआई में उपचार चल रहा है। इसके बाद ही 29 अप्रैल को महिला के पति ने सीएमओ को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई चार माह बाद हुई।
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बेटी के जन्म पर सुकन्या खाते की योजना चलाता है अस्पताल
सेक्टर-3 के जिस अस्पताल में अवैध रूप से गर्भपात कराने का मामला सामने आया है, यहां पर सालों से सुकन्या खाते खोलने का आडंबर भी चल रहा था। अस्पताल में बेटी के जन्म पर 1100 रुपये खाते में भी जमा कराए जाते थे। यहां पर शहर के विधायक व अन्य नेताओं को भी इस तरह के कार्यक्रम कराए जाते थे। हालांकि अब पुलिसिया जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा।
चार माह में 120 पेज की बन गई जांच रिपोर्ट
पीएनडीटी नोडल अधिकारी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि शिकायत के बाद सीएमओ की ओर से जांच कमेटी गठित कर दी गई थी। शिकायतकर्ता से लेकर आरोपी डॉक्टर के बयान भी दर्ज किए गए। जांच में पाया गया कि आरोपी डॉक्टर ने एमटीपी किट के अलावा क्लीनिकल गर्भपात भी किया। जबकि बीएएमएस डॉक्टर इसके लिए अधिकृत ही नहीं है। ऐसे में अवैध रूप से गर्भपात कराना गैर कानूनी है, इसके तहत बुधवार को छापा मारा गया था। बता दें कि चार माह चली जांच 120 पेज की बन गई, लेकिन कार्रवाई में देरी पर भी सवाल खड़े होते हैं। लेकिन नोडल अधिकारी का कहना है कि कोरोना व सभी पक्षों बयान दर्ज कराने के चलते देरी हुई है। मेरे पास 21 जुलाई को फाइल आई, 22 को कार्रवाई : अमनदीप चौहान
देरी में सवाल पर ड्रग इंस्पेक्टर अमनदीप चौहान ने कहा कि 21 जुलाई को फाइल आई थी, 120 पन्ने पढ़ने में समय भी लगता है। 22 जुलाई को कार्रवाई कर दी गई है। अवैध रूप से गर्भपात कराने, गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने व गंभीर लापरवाही की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी डॉक्टर को पुलिस ने शाम को ही गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे में मामलों में सात साल तक की सजा का प्रावधान है।