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आरटीए आफिस में खेल ः दो सप्ताह बाद बिना जांच के अनफिट स्कूली बस से लेकर ट्रक तक किए पास
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वाहनों की विडियोग्राफी करते अधिकारी।
- फोटो : Rewari
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दो सप्ताह बाद क्षेत्रीय परिवहन अथॉरिटी की ओर से सेक्टर 18 में भारी वाहनों की पासिंग की गई। इस दौरान बिना फर्स्टएड बॉक्स, स्पीड ब्रेकर व अन्य खामियों को नजर अंदाज कर वाहनों की पासिंग की गई। अमर उजाला की ओर से वीरवार को अधिकारी द्वारा बरती जाने वाली अनियमितताओं की पड़ताल की गई।
उल्लेखनीय है कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर( एमवीआई) का पद रिक्त होने से परेशान वाहन संचालकों की परेशानी को प्रमुखता से उठाते हुए अमर उजाला की ओर से 8 जनवरी को समाचार प्रकाशित किया गया था। वीरवार को होने वाली वाहनों की पासिंग के लिए रोडवेज की ओर से एक इंस्पेक्टर की नियुक्ति की गई। इस दौरान वाहनों की काफी भीड़ रही, लेकिन वाहनों की पासिंग में काफी अनियमितताएं देखी गईं। हालांकि पासिंग के दौरान वाहनों की वीडियोग्राफी की जा रही थी, लेकिन यह महज दिखावा था। फोटोग्राफर द्वारा गाडियों की नंबर प्लेट व चेचिस नंबरों की फोटाग्राफी की जा रही थी, जबकि पासिंग के दौरान वाहनों की पूरी फिटनेश की जांच की जाती है। लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा कई स्कूल बसों को नजर अंदाज किया गया, जिनमें न तो फर्स्टएड बॉक्स थे और न ही स्पीड ब्रेकर। इसके अलावा कुछ बसों के सामने अधिकारी के सामने ही अस्थाई रूप से पीले नंबरों की प्लेट लगाकर फोटोग्राफी की गई।
लेट फीस वाले वाहनों चालकों को भेजा वापस
निर्धारित समय के बाद पासिंग के लिए आनेे वाले कुछ वाहन स्वामियों से लेट फीस की रसीद मांगी गई, लेकिन नहीं दिखाने पर अधिकारी ने उन्हें लौटा गया। लेट फीस जमा कराने के बाद उन्हें पांसिग के योग्य माना गया।
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कथित दलालों का रहता है जमावड़ा
वाहनों के पासिंग स्थल पर कथित दलालों का भी जमावड़ा रहता है। अधिकांश वाहनों की फाइल कथित दलालों के माध्यम से तैयार कर भेजी जाती है। वाहन चालकों से बात की गई तो बताया गया कि पासिंग की जिम्मेदारी कथित दलालों की रहती है। वे तो केवल गाड़ी अधिकारी के सामने फोटोग्राफी कराने के लिए आते हैं।
पूरी जांच के बाद दिया जाता फिटनेश सर्टीफिकेट : एमवीआई
एमवीआई रेवाड़ी रामनिवास ने कहा कि वाहनों की पासिंग के दौरान फिटनेश की जांच की जाती है। वाहनों की फोटोग्राफी भी कराई जाती है, लेकिन पूरी गाड़ी की फिटनेश की जांच संभव नहीं है। जांच करते समय पूरी सावधानी बरती जा रही है।
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उल्लेखनीय है कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर( एमवीआई) का पद रिक्त होने से परेशान वाहन संचालकों की परेशानी को प्रमुखता से उठाते हुए अमर उजाला की ओर से 8 जनवरी को समाचार प्रकाशित किया गया था। वीरवार को होने वाली वाहनों की पासिंग के लिए रोडवेज की ओर से एक इंस्पेक्टर की नियुक्ति की गई। इस दौरान वाहनों की काफी भीड़ रही, लेकिन वाहनों की पासिंग में काफी अनियमितताएं देखी गईं। हालांकि पासिंग के दौरान वाहनों की वीडियोग्राफी की जा रही थी, लेकिन यह महज दिखावा था। फोटोग्राफर द्वारा गाडियों की नंबर प्लेट व चेचिस नंबरों की फोटाग्राफी की जा रही थी, जबकि पासिंग के दौरान वाहनों की पूरी फिटनेश की जांच की जाती है। लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा कई स्कूल बसों को नजर अंदाज किया गया, जिनमें न तो फर्स्टएड बॉक्स थे और न ही स्पीड ब्रेकर। इसके अलावा कुछ बसों के सामने अधिकारी के सामने ही अस्थाई रूप से पीले नंबरों की प्लेट लगाकर फोटोग्राफी की गई।
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लेट फीस वाले वाहनों चालकों को भेजा वापस
निर्धारित समय के बाद पासिंग के लिए आनेे वाले कुछ वाहन स्वामियों से लेट फीस की रसीद मांगी गई, लेकिन नहीं दिखाने पर अधिकारी ने उन्हें लौटा गया। लेट फीस जमा कराने के बाद उन्हें पांसिग के योग्य माना गया।
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कथित दलालों का रहता है जमावड़ा
वाहनों के पासिंग स्थल पर कथित दलालों का भी जमावड़ा रहता है। अधिकांश वाहनों की फाइल कथित दलालों के माध्यम से तैयार कर भेजी जाती है। वाहन चालकों से बात की गई तो बताया गया कि पासिंग की जिम्मेदारी कथित दलालों की रहती है। वे तो केवल गाड़ी अधिकारी के सामने फोटोग्राफी कराने के लिए आते हैं।
पूरी जांच के बाद दिया जाता फिटनेश सर्टीफिकेट : एमवीआई
एमवीआई रेवाड़ी रामनिवास ने कहा कि वाहनों की पासिंग के दौरान फिटनेश की जांच की जाती है। वाहनों की फोटोग्राफी भी कराई जाती है, लेकिन पूरी गाड़ी की फिटनेश की जांच संभव नहीं है। जांच करते समय पूरी सावधानी बरती जा रही है।