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इरादे पक्के हों तो हर मुश्किल राह है आसान
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सोनिया यादव।
- फोटो : Rewari
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अगर कुछ करने के लिए ठान लिया जाए तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। ऐसा ही कुछ जिले की महिलाओं व युवाओं ने कर दिखाया है। अपनी कोशिशों से वे आने वाली पीढ़ियों को नया रास्ता दिखा रहे हैं। कुछ युवाओं ने अपनी कमजोरी को ताकत बनाते हुए मुकाम को छूकर अपनी अलग पहचान बनाई है।
लड़कियों को सशक्त बना रहीं सोनिया
रेवाड़ी में जन्मी सोनिया यादव ने अपनी मेहनत से लक्ष्य को प्राप्त कर करते हुए 11 साल डिफेंस में काम किया। उन्होंने 2008 से 2018 के बीच डिफेंस में अपना योगदान दिया। डिफेंस को छोड़ने के बाद अब वह ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दे रही हैं। इस समय वह 25 लड़कियों को ऑनलाइन नि:शुल्क कोचिंग दे रही हैं। उन्होंने बताया कि जो परिवार लड़कियों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं उनकी बेटियों को पढ़ाई करवाना व आगे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाना मेरा लक्ष्य है। अगर इन लड़कियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी तो निश्चित ही वे मेरी तरह जिले का नाम रोशन कर पाएंगी। सोनिया टीवी कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में भी अभिनेता अमिताभ बच्चन से रूबरू हो चुकी हैं। इस समय वह अपनी बेटी के साथ अमृतसर में रह रही हैं।
टेकचंद के संघर्ष को नहीं भुलाया जा सकता
बावन निवासी टेकचंद इरादे के बहुत पक्के हैं। एक बार जो ठान लेते हैं तो उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। अपने पैरों को खोने के बाद भी टेकचंद ने खेल जगत में काफी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2004 में राजस्थान के भिवाड़ी स्थित एक कंपनी से लौटते समय वह दुर्घटना के शिकार हो गए थे। इसके बाद उनको सात साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा। जीवन के संघर्षों के आगे वह अपनी आगे की पढ़ाई को बिल्कुल भूल गए। वर्ष 2016 में टेकचंद ने पैरालंपिक को अपना सपना बनाया और दिन-रात मेहनत करने लगे। आखिरकार दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में 29 जून को आयोजित ट्रायल के एफ-54 वर्ग के जेवलिन थ्रो में क्वालीफाई करने पर टेकचंद को पैरालंपिक टोक्यो का टिकट मिला। हाल ही में आयोजित टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने गोला फेंक में अपना जौहर दिया, मगर किस्मत ने उनका इस बार साथ नहीं दिया। उनको भाले के जगह गोला फेंक में चुना गया।
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पर्यावरण मित्र के नाम से मशहूर हो गए राजकुमार
पर्यावरण की अलख जगा रहे राजकुमार पर्यावरण मित्र के नाम से जाने जाते हैं। राजकुमार 10 साल से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। पर्यावरण मित्र ने गांव, जिला में नहीं, बल्कि अन्य जिलों व राजस्थान में जाकर लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे है। खंड खोल के क्षेत्र के गांव चिमनावास के 39 वर्षीय राजकुमार पुत्र गंगाराम आज पूरे जिले में पर्यावरण मित्र के नाम से पहचाने जाते है। राजकुमार आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। राजकुमार लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एक निजी नौकरी कर रहे हैं। बकौल राजकुमार, वर्ष 2011 में जब कक्षा 12वीं में पढ़ता था तब गांव के सभी कुओं का पानी खारा था। जो पीने के लायक नहीं था। भूजल स्तर भी धीरे-धीरे नीचे जा रहा था। पानी और कड़वा हो गया। अब गांव के सामने खेती के पानी व पीने के पानी की समस्या खड़ी होती नजर आ रही थी। उन दिनों ग्लोबल वार्मिंग क्लाइमेट चेंज, सूखा आदि से निपटने के लिए न्यूजपेपर में एक संदेश था कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाए, ताकि वातावरण शुद्ध हो, हरियाली का स्तर बढ़े।
राजकुमार ने बताया कि अब उन्हें बहुत खुशी है, लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हैं। विवाह कार्यक्रम में जाकर नवविवाहित जोड़ों के हाथों से पौधरोपण करवा, जन्मदिन पर बच्चे के हाथों से पौधे लगवाना व पूर्वजों की याद में पौधे लगाने का कार्यक्रम शुरू किया। 10 साल की बात करे तो राजकुमार 4000 से अधिक पौधे वितरित कर चुके हैं।
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लड़कियों को सशक्त बना रहीं सोनिया
रेवाड़ी में जन्मी सोनिया यादव ने अपनी मेहनत से लक्ष्य को प्राप्त कर करते हुए 11 साल डिफेंस में काम किया। उन्होंने 2008 से 2018 के बीच डिफेंस में अपना योगदान दिया। डिफेंस को छोड़ने के बाद अब वह ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दे रही हैं। इस समय वह 25 लड़कियों को ऑनलाइन नि:शुल्क कोचिंग दे रही हैं। उन्होंने बताया कि जो परिवार लड़कियों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं उनकी बेटियों को पढ़ाई करवाना व आगे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाना मेरा लक्ष्य है। अगर इन लड़कियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी तो निश्चित ही वे मेरी तरह जिले का नाम रोशन कर पाएंगी। सोनिया टीवी कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में भी अभिनेता अमिताभ बच्चन से रूबरू हो चुकी हैं। इस समय वह अपनी बेटी के साथ अमृतसर में रह रही हैं।
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टेकचंद के संघर्ष को नहीं भुलाया जा सकता
बावन निवासी टेकचंद इरादे के बहुत पक्के हैं। एक बार जो ठान लेते हैं तो उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। अपने पैरों को खोने के बाद भी टेकचंद ने खेल जगत में काफी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2004 में राजस्थान के भिवाड़ी स्थित एक कंपनी से लौटते समय वह दुर्घटना के शिकार हो गए थे। इसके बाद उनको सात साल तक बिस्तर पर रहना पड़ा। जीवन के संघर्षों के आगे वह अपनी आगे की पढ़ाई को बिल्कुल भूल गए। वर्ष 2016 में टेकचंद ने पैरालंपिक को अपना सपना बनाया और दिन-रात मेहनत करने लगे। आखिरकार दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में 29 जून को आयोजित ट्रायल के एफ-54 वर्ग के जेवलिन थ्रो में क्वालीफाई करने पर टेकचंद को पैरालंपिक टोक्यो का टिकट मिला। हाल ही में आयोजित टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने गोला फेंक में अपना जौहर दिया, मगर किस्मत ने उनका इस बार साथ नहीं दिया। उनको भाले के जगह गोला फेंक में चुना गया।
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पर्यावरण मित्र के नाम से मशहूर हो गए राजकुमार
पर्यावरण की अलख जगा रहे राजकुमार पर्यावरण मित्र के नाम से जाने जाते हैं। राजकुमार 10 साल से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। पर्यावरण मित्र ने गांव, जिला में नहीं, बल्कि अन्य जिलों व राजस्थान में जाकर लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे है। खंड खोल के क्षेत्र के गांव चिमनावास के 39 वर्षीय राजकुमार पुत्र गंगाराम आज पूरे जिले में पर्यावरण मित्र के नाम से पहचाने जाते है। राजकुमार आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। राजकुमार लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एक निजी नौकरी कर रहे हैं। बकौल राजकुमार, वर्ष 2011 में जब कक्षा 12वीं में पढ़ता था तब गांव के सभी कुओं का पानी खारा था। जो पीने के लायक नहीं था। भूजल स्तर भी धीरे-धीरे नीचे जा रहा था। पानी और कड़वा हो गया। अब गांव के सामने खेती के पानी व पीने के पानी की समस्या खड़ी होती नजर आ रही थी। उन दिनों ग्लोबल वार्मिंग क्लाइमेट चेंज, सूखा आदि से निपटने के लिए न्यूजपेपर में एक संदेश था कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाए, ताकि वातावरण शुद्ध हो, हरियाली का स्तर बढ़े।
राजकुमार ने बताया कि अब उन्हें बहुत खुशी है, लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हैं। विवाह कार्यक्रम में जाकर नवविवाहित जोड़ों के हाथों से पौधरोपण करवा, जन्मदिन पर बच्चे के हाथों से पौधे लगवाना व पूर्वजों की याद में पौधे लगाने का कार्यक्रम शुरू किया। 10 साल की बात करे तो राजकुमार 4000 से अधिक पौधे वितरित कर चुके हैं।

पर्यावरण मित्र के नाम से जाने जाने वाले राजकुमार। फाइल फोटो- फोटो : Rewari

टोक्यो पैरालंपिक के दौरान टीम के साथ टेकचंद। फाइल फोटो- फोटो : Rewari