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ट्रामा सेंटर में दस साल बाद भी नहीं बना आईसीयू

Wed, 12 Feb 2020 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2020 12:03 AM IST
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ICU not made in trauma center  after 10 years
सर शादी लाल ट्रामा सैंटर रेवाड़ी। - फोटो : Rewari
सरकार व स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों के बावजूद इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं तक वेंटिलेटर पर चल रही हैं। करीब 10 साल पहले हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को तुरंत उपचार के देने लिए बनाए गए ट्रॉमा सेंटर में न तो आज तक डॉक्टर की नियुक्ति हो पाई और न ही यहां पर घायलों के लिए सबसे जरूरी इंटेंसिव केयर यूनिट(आईसीयू) उपल्ब्ध है। एसे में यहां आने वाले हर रोज औसतन 12 घायलों में से 8 को रोहतक पीजीआई रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं होता है। हालात ऐसे हैं कि ट्रामा सेंटर के नाम पर महज एक लेब टेक्निशियन(एलटी) व स्टाफ नर्स ही कार्यरत हैं।
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जिला से तीन नेशनल हाईवे- 48, 11 व 71 होकर गुजरते हैं। पटौदी रोड को भी हाईवे में तब्दील करने पर कार्य चल रहा है। हाईवे पर बीते साल 180 से अधिक लोगों की मौत हुई। हाइवे पर घायल होने वालों का उपचार के लिए ट्रामा सेंटर पहुंचाया जाता है लेकिन यहां से महज महज प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रुप से घायलों को रोहतक रेफर कर दिया जाता है। समय पर उपचार नहीं मिलने के अभाव में कुछ लोगों की मौत तक हो जाती है।
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-ट्रामा सेंटर में आईसीयू सबसे जरूरी
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण ही जल्द से जल्द घायलों को बेहतर उपचार देने के लिए किया जाता है। घायलों में सबसे ज्यादा रक्तश्राव होने से जान का खतरा होता है। ऐसे में ट्रामा सेंटर में आए घायलों आक्सीजन व अन्य सुविधाओं के लिए आईसीयू में रखा जाता है। एसे में किसी भी ट्रामा सेंटर में आईसीयू सबसे जरूरी सेवाओं में से एक हैं। इसके अलावा एक सर्जन, एनेस्थेटिक, आर्थोपेडिक सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ सहित अन्य चिकित्सकों की नियुक्त होती है। इसके अलावा स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों का स्टाफ होता है। संसाधनों में आधुनिक उपकरण, कलर एक्सरे, डिजिटल अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, वेंटीलेटर व आईसीयू की भी व्यवस्था होती है। लेेेकिन इसमें से एक्स-रे को छोड़ दिया जाए तो यहां पर कोई भी सुविधाएं मौजूद नहीं है।
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-नागरिक अस्पताल में भी जरूरत के हिसाब से आधी स्टाफ नर्स
मई माह में शहर के नागरिक अस्पताल में बेड की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की जा चुकी है लेकिन यहां पर 100 बेड के हिसाब से भी प्रयाप्त सहायक स्टाफ नहीं है जबकि स्टाफ नर्स स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की हड्डी होती है। नागरिक में स्टाफ नर्स की 90 पोस्ट प्रस्तावित हैं लेकिन कार्यरत महज 26 हैं। डॉक्टर की बात करें तो यहां पर 55 मेडिकल ऑफिसर(एमओ) की जरूरत है। कार्यरत महज 30 ही हैं। अब अस्पताल 200 बेड का हो चुका है ऐसे में स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 हो जाएगी। लेकिन ऐसा कब होगा ये बड़ा सवाल है। ऐसा ही हाल नर्सिंग सिस्टर का है। यहां पर इनके लिए 10 पोस्ट प्रस्तावित है लेकिन कार्यरत महज दो हैं। ऐसे में 8 पोस्ट खाली होने का खामियाजा यहां पर भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

-आईसीयू बेहद जरूरी, इसके लिए चौबीसों घंटे चार डॉक्टर की जरूरत: एसएमओ
एसएमओ डॉ. सर्वजीत थापर ने बताया कि ट्रामा सेंटर में आईसीयू जरूरी होता है लेकिन डॉक्टर नहीं होने से इसका संचालन नहीं कर सकेंगे। घायलों को जरूरत पड़ने पर उन्हें पीजीआई रेफर किया जाता है।
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