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राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बहुत उम्मीदें : प्रोफेसर दिनेश कुमार
Tue, 02 Apr 2024 10:10 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 02 Apr 2024 10:10 PM IST
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रेवाड़ी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को संबोधित करते मुख्य वक्ता डॉ. सुमन मेहंदिया
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश कुमार मुख्य अतिथि रहे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले के प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ही डॉ. सुमन मेहंदिया ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जयप्रकाश यादव ने की। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कॉलेजों के लगभग 100 प्राचार्य और एनईपी कोऑर्डिनेटर ने भाग लिया। कार्यशाला के समन्वयक प्रोफेसर तेज सिंह ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संबंध में अब तक विश्वविद्यालय की तैयारियों से अवगत करवाया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जयप्रकाश यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व, विभिन्न प्रकार के कोर्सों, ऑनलाइन कोर्स और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इसे लागू करने के लगभग अंतिम पड़ाव पर है। इस सत्र में हम इसे अंडरग्रेजुएट कोर्स में लागू कर देंगे।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश भर में बहुत उम्मीदें हैं। इसमें अपनी मातृभाषा में पढ़ाई, कौशल विकास और छात्रों में छिपी प्रतिभा को निखारने पर प्रमुख जोर दिया गया है। मुख्य वक्ता डॉ. सुमन मेहंदिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संबंध में अलग-अलग स्कीमें ए, बी, सी एवं डी के बारे में बताया। इसके अतिरिक्त एंट्री और एग्जिट ऑप्शन, क्रेडिट की गणना आदि विभिन्न विषयों के बारे में बताया।
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दोपहर बाद के सत्र में प्रोफेसर अनिल कुमार वशिष्ठ ने एनईपी को लागू करने के मार्ग में आ रही विभिन्न कठिनाइयां एवं उनके समाधान के बारे में विस्तार से बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने व्यवहार में इसे लागू करने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यशाला की निदेशक प्रोफेसर मंजू परूथी ने दोनों वक्ताओं का स्वागत किया एवं परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर सत्येंद्र बल गुप्ता ने सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्यों और शिक्षकों सहित विश्वविद्यालयों के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष एवं शिक्षक मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जयप्रकाश यादव ने की। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कॉलेजों के लगभग 100 प्राचार्य और एनईपी कोऑर्डिनेटर ने भाग लिया। कार्यशाला के समन्वयक प्रोफेसर तेज सिंह ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संबंध में अब तक विश्वविद्यालय की तैयारियों से अवगत करवाया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जयप्रकाश यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व, विभिन्न प्रकार के कोर्सों, ऑनलाइन कोर्स और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इसे लागू करने के लगभग अंतिम पड़ाव पर है। इस सत्र में हम इसे अंडरग्रेजुएट कोर्स में लागू कर देंगे।
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मुख्य अतिथि प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश भर में बहुत उम्मीदें हैं। इसमें अपनी मातृभाषा में पढ़ाई, कौशल विकास और छात्रों में छिपी प्रतिभा को निखारने पर प्रमुख जोर दिया गया है। मुख्य वक्ता डॉ. सुमन मेहंदिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संबंध में अलग-अलग स्कीमें ए, बी, सी एवं डी के बारे में बताया। इसके अतिरिक्त एंट्री और एग्जिट ऑप्शन, क्रेडिट की गणना आदि विभिन्न विषयों के बारे में बताया।
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दोपहर बाद के सत्र में प्रोफेसर अनिल कुमार वशिष्ठ ने एनईपी को लागू करने के मार्ग में आ रही विभिन्न कठिनाइयां एवं उनके समाधान के बारे में विस्तार से बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने व्यवहार में इसे लागू करने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यशाला की निदेशक प्रोफेसर मंजू परूथी ने दोनों वक्ताओं का स्वागत किया एवं परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर सत्येंद्र बल गुप्ता ने सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्यों और शिक्षकों सहित विश्वविद्यालयों के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष एवं शिक्षक मौजूद रहे।