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चिल्लाते रहे मरीज, नहीं हुई सुनवाई
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Wed, 07 Sep 2016 12:35 AM IST
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डॉक्टरों ने दो घंटे सेवाएं बंद रखीं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब के समान वेतनमान और अन्य सुविधाओं में वृद्धि के लिए चिकित्सकों के आह्वान पर मंगलवार को सरकारी डॉक्टरों ने सुबह आठ से दस बजे तक अपनी सेवाएं बंद रखीं। डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज और तीमारदार परेशान रहे। जिले के अन्य अस्पतालों के साथ शहर के नागरिक अस्पताल में भी बड़ी संख्या में मरीज दर्द से कराहते रहे, लेकिन उनकी किसी ने सुध नहीं ली।
सीएमओ का दावा है कि डॉक्टरों की अकस्मात हड़ताल के बावजूद नागरिक अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई थी।शहर के नागरिक अस्पताल में हर दिन की तरह मंगलवार को भी सुबह से ही मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। पर्ची काउंटर पर मरीज और उनके परिजन काफी देर तक इंतजार करते रहे।
तभी किसी ने बताया कि चिकित्सकों ने हड़ताल कर दी है। दूर दराज से आए मरीज परेशानी होकर वहीं बैठ गए। इनमें से कई लोग तो गंभीर हालत में थे। कई लोग दर्द से कराह रहे थे। प्रतिदिन 1200 की ओपीडी वाले नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अफरा तफरी मच गई। हर जगह अव्यवस्था का आलम था। करीब दस बजे डॉक्टरों के हड़ताल से लौटने के बाद मरीजों की जान में जान आई। दो घंटे की हड़ताल और एक घंटे की मशक्कत ने मरीजों और उनके तीमारदारों को तोड़ दिया। हर कोई चिकित्सकों को कोस रहे थे।
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नौनिहालों पर भारी पड़ी हड़ताल
नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के चलते भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सर्वाधिक परेशानी बच्चों की ओपीडी केंद्र के बाहर बिलख रहे नौनिहालों को उठाना पड़ा। ओपीडी के बाहर दो घंटे की हड़ताल का पंपलेट भी चस्पाया गया था लेकिन राजस्थान से लेकर दूर-दराज के गांवों से अपने नौनिहालों के उपचार के लिए आए परिजनों के पास बच्चों को बिलखता देखने के अलावा कोई चारा नहीं था।
इन मांगों को लेकर हड़ताल पर उतरे डॉक्टर
प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एक साथ दो घंटे की हड़ताल पर गए डॉक्टर पंजाब के समान वेतनमान में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में एक-एक डॉक्टर 300-300 मरीजों की जांच प्रतिदिन कर रहा है। ऐसे में मरीजों को दिए जाने वाले उपचार में न्याय नहीं हो पाता है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ा दी जाए तो मरीजों को अधिक बेहतर उपचार मिल पाएगा। इसी के साथ डॉक्टरों का यह भी कहना है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों पर काम का बहुत ज्यादा दवाब होता है। बावजूद उनके वेतनमान में वृद्धि नहीं की जा रही है।
मरीज बोले नहीं हो रही कोई सुनवाई
सोमवार को नंबर नहीं आया था। मंगलवार को सुबह सात बजे ही लाइन में आकर लग गया था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दस बजे तक किसी ने कोई सुध नहीं ली। डॉक्टरों को हड़ताल पर जाना था तो पहले कोई सूचना देनी चाहिए थी।
- केएम शुक्ला, मरीज, शांतिनगर
---
पूरी रात पेट दर्द से परेशान रहा। सुबह सात बजे ही अस्पताल पहुंच गया था, यहां आकर पता चला कि डॉक्टर दो घंटे की हड़ताल पर हैं। अस्पताल में दर्द की दवाई के लिए चक्कर काटता रहा, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
-दयानंद, मरीज, बासदुधा
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चालीस किलोमीटर दूर राजस्थान के शाहजांपुर से रेवाड़ी नागरिक अस्पताल आया था। जब पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं तो सरकारी व्यवस्था पर रोना आया। डॉक्टरों को हड़ताल करनी थी तो पहले से लोगों को सूचित करना चाहिए था। कई दिन से बुखार है अभी भी पूरा शरीर जल रहा है, लेकिन यहां पर इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
--राजमल, मरीज, शाहजहांपुर
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अपने पोते को लेकर नागरिक अस्पताल आया था। तबीयत खराब होनेे के कारण सुबह सात बजे ही नागरिक अस्पताल आ गया था। हड़ताल के कारण दो साल के बच्चे का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। बड़ों के लिए हड़ताल कर लेते, लेकिन बच्चों की जांच तो डॉक्टरों को करनी चाहिए थी।
--रामचंद्र, राजस्थान
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-वर्जन-
डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर दो घंटे की हड़ताल पर गए थे। इस दौरान अस्पताल में आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए गए थे।
- डॉ. पुष्पा बिश्रोई, सीएमओ, रेवाड़ी
हड़ताल डाक्टरों की अन्य कहां गए : सीएमओ
हड़ताल के बाद अस्पताल में हुई अव्यवस्था के बीच निरीक्षण को पहुंची सीएमओ ने डॉक्टरों के साथ अन्य के भी ड्यूटी पर नहीं होने पर वहां मौजूद चिकित्सा कर्मियों को जमकर फटकार लगाई। सुबह करीब साढ़े नौ बजे सीएमओ डॉ. पुष्पा बिश्नोई नागरिक अस्पताल पहुंची। वहां प्रशासनिक ब्लॉक में केवल एक कर्मचारी था। सीएमओ के दौरे की सूचना पर एसएमओ सुदर्शन पंवार भी मौके पर पहुंचे। धीरे-धीरे अन्य चिकित्सा कर्मी भी पहुंचने लगे। सीएमओ ने एसएमओ से अन्य कर्मचारियों के बारे में जानकारी मांगी। अस्पताल में ना तो बायोमीट्रिक मशीन ठीक चल रही थी और ना ही वहां स्टाफ मौजूद था। अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर सीएमओ ने वहां मौजूद लोगों को जमकर फटकारा। उन्होंने कहा कि हड़ताल तो डॉक्टरों की है, अन्य स्टाफ तो मौजूद रहना चाहिए। सभी लोग कहां चले गए। ऐसे में मरीजों को कौन संभालेगा।
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सीएमओ का दावा है कि डॉक्टरों की अकस्मात हड़ताल के बावजूद नागरिक अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई थी।शहर के नागरिक अस्पताल में हर दिन की तरह मंगलवार को भी सुबह से ही मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। पर्ची काउंटर पर मरीज और उनके परिजन काफी देर तक इंतजार करते रहे।
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तभी किसी ने बताया कि चिकित्सकों ने हड़ताल कर दी है। दूर दराज से आए मरीज परेशानी होकर वहीं बैठ गए। इनमें से कई लोग तो गंभीर हालत में थे। कई लोग दर्द से कराह रहे थे। प्रतिदिन 1200 की ओपीडी वाले नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अफरा तफरी मच गई। हर जगह अव्यवस्था का आलम था। करीब दस बजे डॉक्टरों के हड़ताल से लौटने के बाद मरीजों की जान में जान आई। दो घंटे की हड़ताल और एक घंटे की मशक्कत ने मरीजों और उनके तीमारदारों को तोड़ दिया। हर कोई चिकित्सकों को कोस रहे थे।
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नौनिहालों पर भारी पड़ी हड़ताल
नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के चलते भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सर्वाधिक परेशानी बच्चों की ओपीडी केंद्र के बाहर बिलख रहे नौनिहालों को उठाना पड़ा। ओपीडी के बाहर दो घंटे की हड़ताल का पंपलेट भी चस्पाया गया था लेकिन राजस्थान से लेकर दूर-दराज के गांवों से अपने नौनिहालों के उपचार के लिए आए परिजनों के पास बच्चों को बिलखता देखने के अलावा कोई चारा नहीं था।
इन मांगों को लेकर हड़ताल पर उतरे डॉक्टर
प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एक साथ दो घंटे की हड़ताल पर गए डॉक्टर पंजाब के समान वेतनमान में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में एक-एक डॉक्टर 300-300 मरीजों की जांच प्रतिदिन कर रहा है। ऐसे में मरीजों को दिए जाने वाले उपचार में न्याय नहीं हो पाता है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ा दी जाए तो मरीजों को अधिक बेहतर उपचार मिल पाएगा। इसी के साथ डॉक्टरों का यह भी कहना है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों पर काम का बहुत ज्यादा दवाब होता है। बावजूद उनके वेतनमान में वृद्धि नहीं की जा रही है।
मरीज बोले नहीं हो रही कोई सुनवाई
सोमवार को नंबर नहीं आया था। मंगलवार को सुबह सात बजे ही लाइन में आकर लग गया था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दस बजे तक किसी ने कोई सुध नहीं ली। डॉक्टरों को हड़ताल पर जाना था तो पहले कोई सूचना देनी चाहिए थी।
- केएम शुक्ला, मरीज, शांतिनगर
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पूरी रात पेट दर्द से परेशान रहा। सुबह सात बजे ही अस्पताल पहुंच गया था, यहां आकर पता चला कि डॉक्टर दो घंटे की हड़ताल पर हैं। अस्पताल में दर्द की दवाई के लिए चक्कर काटता रहा, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
-दयानंद, मरीज, बासदुधा
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चालीस किलोमीटर दूर राजस्थान के शाहजांपुर से रेवाड़ी नागरिक अस्पताल आया था। जब पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं तो सरकारी व्यवस्था पर रोना आया। डॉक्टरों को हड़ताल करनी थी तो पहले से लोगों को सूचित करना चाहिए था। कई दिन से बुखार है अभी भी पूरा शरीर जल रहा है, लेकिन यहां पर इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
--राजमल, मरीज, शाहजहांपुर
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अपने पोते को लेकर नागरिक अस्पताल आया था। तबीयत खराब होनेे के कारण सुबह सात बजे ही नागरिक अस्पताल आ गया था। हड़ताल के कारण दो साल के बच्चे का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। बड़ों के लिए हड़ताल कर लेते, लेकिन बच्चों की जांच तो डॉक्टरों को करनी चाहिए थी।
--रामचंद्र, राजस्थान
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-वर्जन-
डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर दो घंटे की हड़ताल पर गए थे। इस दौरान अस्पताल में आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए गए थे।
- डॉ. पुष्पा बिश्रोई, सीएमओ, रेवाड़ी
हड़ताल डाक्टरों की अन्य कहां गए : सीएमओ
हड़ताल के बाद अस्पताल में हुई अव्यवस्था के बीच निरीक्षण को पहुंची सीएमओ ने डॉक्टरों के साथ अन्य के भी ड्यूटी पर नहीं होने पर वहां मौजूद चिकित्सा कर्मियों को जमकर फटकार लगाई। सुबह करीब साढ़े नौ बजे सीएमओ डॉ. पुष्पा बिश्नोई नागरिक अस्पताल पहुंची। वहां प्रशासनिक ब्लॉक में केवल एक कर्मचारी था। सीएमओ के दौरे की सूचना पर एसएमओ सुदर्शन पंवार भी मौके पर पहुंचे। धीरे-धीरे अन्य चिकित्सा कर्मी भी पहुंचने लगे। सीएमओ ने एसएमओ से अन्य कर्मचारियों के बारे में जानकारी मांगी। अस्पताल में ना तो बायोमीट्रिक मशीन ठीक चल रही थी और ना ही वहां स्टाफ मौजूद था। अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर सीएमओ ने वहां मौजूद लोगों को जमकर फटकारा। उन्होंने कहा कि हड़ताल तो डॉक्टरों की है, अन्य स्टाफ तो मौजूद रहना चाहिए। सभी लोग कहां चले गए। ऐसे में मरीजों को कौन संभालेगा।