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जिसने अपने आप को जान लिया उसने प्रभु को पहचान लिया : राजेंद्र गेरा
Mon, 05 Feb 2024 01:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 05 Feb 2024 01:04 AM IST
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रेवाड़ी। हमारा परिवार संस्था के तत्वाधान में जीवन में सकारात्मकता लाने वाला कार्यक्रम खूबसूरत दुनिया के लिए प्रभु आपका धन्यवाद का आयोजन पंजाबी धर्मशाला पर किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि धर्मवीर चौकन जिला प्रधान जजपा बीसी सेल, समाजसेवी प्रोफेसर सीएल सोनी, खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार जलवा व संस्था के संयोजक दिनेश कपूर ने कहा कि जब तक हमारी दृष्टि बाहर की ओर लगी रहती है, सांसारिक पदार्थों में हमारी आसक्ति बढ़ जाती है, लेकिन दुनियावी पदार्थों में संतुष्टि कहां मिली है। जब हम ध्यान साधना करते हुए अपने अंदर झांकने का प्रयास करते हैं तो पता लगता है कि परमपिता परमात्मा प्रकाश रूप में हमारे हृदय में सदा निवास करते हैं। अपने अंदर श्रेष्ठता अनुभव होने लगता है। सांसारिक नश्वर पदार्थों से मन अपने आप दूर होने लगता है। जीवन में सच्ची खुशियां आने लगते हैं। पवित्रा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिरुद्ध यादव, शिक्षाविद डॉक्टर बलवीर अग्रवाल व समाज सेवी राजेंद्र गेरा ने कहा कि मानव जीवन परमपिता की ओर से हमें अनमोल उपहार के रूप में मिला है। जिसने अपने आप को जान लिया उसने प्रभु को पहचान लिया। परमपिता ने जो अनमोल श्वासों का खजाना हमें प्रदान किया है उसके एक-एक श्वास को हमने प्रभु सिमरन व सेवा में लगाना है। यदि मानव जीवन पाकर भी परोपकार न किया तो बाद में पछताना पड़ता है।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि धर्मवीर चौकन जिला प्रधान जजपा बीसी सेल, समाजसेवी प्रोफेसर सीएल सोनी, खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार जलवा व संस्था के संयोजक दिनेश कपूर ने कहा कि जब तक हमारी दृष्टि बाहर की ओर लगी रहती है, सांसारिक पदार्थों में हमारी आसक्ति बढ़ जाती है, लेकिन दुनियावी पदार्थों में संतुष्टि कहां मिली है। जब हम ध्यान साधना करते हुए अपने अंदर झांकने का प्रयास करते हैं तो पता लगता है कि परमपिता परमात्मा प्रकाश रूप में हमारे हृदय में सदा निवास करते हैं। अपने अंदर श्रेष्ठता अनुभव होने लगता है। सांसारिक नश्वर पदार्थों से मन अपने आप दूर होने लगता है। जीवन में सच्ची खुशियां आने लगते हैं। पवित्रा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिरुद्ध यादव, शिक्षाविद डॉक्टर बलवीर अग्रवाल व समाज सेवी राजेंद्र गेरा ने कहा कि मानव जीवन परमपिता की ओर से हमें अनमोल उपहार के रूप में मिला है। जिसने अपने आप को जान लिया उसने प्रभु को पहचान लिया। परमपिता ने जो अनमोल श्वासों का खजाना हमें प्रदान किया है उसके एक-एक श्वास को हमने प्रभु सिमरन व सेवा में लगाना है। यदि मानव जीवन पाकर भी परोपकार न किया तो बाद में पछताना पड़ता है।
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