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Rewari News: पेट्रोल पंप के लिए किया था आवेदन, साइबर ठगों ने लगाया 3.47 लाख का चूना
Sun, 17 Sep 2023 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 17 Sep 2023 12:12 AM IST
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रेवाड़ी। पेट्रोल पंप के लिए आवेदन कर चुके शक्तिनगर निवासी एक व्यक्ति को साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसाकर 3.47 लाख रुपये का चूना लगा दिया। साउथ रेंज साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी।
पुलिस को दी शिकायत में सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने पेट्रोल पंप लेने के लिए आवेदन किया है। उनके पास पेट्रोल पंप के आवेदन के बारे में पूछताछ करने के लिए एक फोन कॉल आई। कॉलर ने उनसे पेट्रोल पंप के लिए आवेदन करने की जानकारी ली। इसके बाद कॉलर ने उनसे आधार कार्ड के अंतिम दो नंबर बताने को कहा। उन्होंने फोन करने वाले को दो अंक के नंबर बता दिए। अगले दिन उनके पास फिर से फोन आया। उन्हें मेल की जांच करने के लिए कहा गया। मेल पर आधार कार्ड, पैन कार्ड व दसवीं की मार्कशीट भेजने को कहा गया था। उन्होंने सभी दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद उन्हें एक बैंक खाते में पहले 52800 रुपये भेजने को कहा गया। कंपनी का प्रतिनिधि समझकर उन्होंने यह राशि जमा करा दी। बाद में लाइसेंस फीस के नाम पर उससे 2.95 लाख रुपये और जमा कराने को कहा। उन्होंने आरटीजीएस के जरिए बताए गए अकाउंट नंबर में मांगी गई राशि जमा करा दी। काफी दिनों तक रिस्पांस नहीं मिलने पर जब वह कंपनी के कार्यालय में पूछताछ करने के लिए गया तो उन्हें बताया गया कि वह ठगी का शिकार हुए है। पुलिस ने उनकी शिकायत पर केस दर्ज करने के बाद उन खातों को सीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिनमें उनकी रकम ट्रांसफर की गई है।
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पुलिस को दी शिकायत में सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने पेट्रोल पंप लेने के लिए आवेदन किया है। उनके पास पेट्रोल पंप के आवेदन के बारे में पूछताछ करने के लिए एक फोन कॉल आई। कॉलर ने उनसे पेट्रोल पंप के लिए आवेदन करने की जानकारी ली। इसके बाद कॉलर ने उनसे आधार कार्ड के अंतिम दो नंबर बताने को कहा। उन्होंने फोन करने वाले को दो अंक के नंबर बता दिए। अगले दिन उनके पास फिर से फोन आया। उन्हें मेल की जांच करने के लिए कहा गया। मेल पर आधार कार्ड, पैन कार्ड व दसवीं की मार्कशीट भेजने को कहा गया था। उन्होंने सभी दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद उन्हें एक बैंक खाते में पहले 52800 रुपये भेजने को कहा गया। कंपनी का प्रतिनिधि समझकर उन्होंने यह राशि जमा करा दी। बाद में लाइसेंस फीस के नाम पर उससे 2.95 लाख रुपये और जमा कराने को कहा। उन्होंने आरटीजीएस के जरिए बताए गए अकाउंट नंबर में मांगी गई राशि जमा करा दी। काफी दिनों तक रिस्पांस नहीं मिलने पर जब वह कंपनी के कार्यालय में पूछताछ करने के लिए गया तो उन्हें बताया गया कि वह ठगी का शिकार हुए है। पुलिस ने उनकी शिकायत पर केस दर्ज करने के बाद उन खातों को सीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिनमें उनकी रकम ट्रांसफर की गई है।
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