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फैक्टरी मालिकों के हित साधक और मजदूर विरोधी हैं सरकार के निर्णय : एआईयूटीयूसी
Thu, 06 Nov 2025 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 06 Nov 2025 12:03 AM IST
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रेवाड़ी। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईयूटीयूसी) हरियाणा प्रदेश कमेटी ने 3 नवंबर को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को फैक्टरी मालिकों के हित साधक और मजदूर विरोधी बताते हुए निंदा की है। यूनियन ने सरकार से इन फैसलों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
प्रदेश सचिव हरिप्रकाश ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सरकार ग्रामीण विकास और मजदूर हितों की बात तो करती है लेकिन हालिया फैसले मजदूरों पर शिकंजा कसने वाले हैं। उन्होंने कहा कि काम के घंटे 9 से बढ़ाकर 10 करना तकनीकी प्रगति के दौर में अनुचित कदम है। जहां मशीनें और टेक्नोलॉजी काम आसान बना रही हैं, वहां श्रम घंटे घटाने चाहिए न कि बढ़ाने चाहिए।
एआईयूटीयूसी ने यह भी आपत्ति जताई कि अब श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले मालिकों को जेल की सजा नहीं होगी जिससे श्रमिक शोषण के मामले और बढ़ेंगे। साथ ही तिमाही ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे करने का फैसला मजदूरों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
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यूनियन ने कहा कि सरकार ने 20 से कम मजदूरों वाली फैक्टरियों को श्रम कानूनों से छूट देकर श्रमिकों पर सीधा प्रहार किया है क्योंकि प्रदेश की अधिकांश छोटी इकाइयां इसी दायरे में आती हैं।
जिला सचिव शेरसिंह मीरपुर ने चेतावनी दी है कि अगर इन फैसलों को वापस नहीं लिया तो एआईयूटीयूसी जनजागरण अभियान चलाकर मजदूरों को जागरूक करेगी और इन मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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प्रदेश सचिव हरिप्रकाश ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सरकार ग्रामीण विकास और मजदूर हितों की बात तो करती है लेकिन हालिया फैसले मजदूरों पर शिकंजा कसने वाले हैं। उन्होंने कहा कि काम के घंटे 9 से बढ़ाकर 10 करना तकनीकी प्रगति के दौर में अनुचित कदम है। जहां मशीनें और टेक्नोलॉजी काम आसान बना रही हैं, वहां श्रम घंटे घटाने चाहिए न कि बढ़ाने चाहिए।
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एआईयूटीयूसी ने यह भी आपत्ति जताई कि अब श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले मालिकों को जेल की सजा नहीं होगी जिससे श्रमिक शोषण के मामले और बढ़ेंगे। साथ ही तिमाही ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे करने का फैसला मजदूरों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
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यूनियन ने कहा कि सरकार ने 20 से कम मजदूरों वाली फैक्टरियों को श्रम कानूनों से छूट देकर श्रमिकों पर सीधा प्रहार किया है क्योंकि प्रदेश की अधिकांश छोटी इकाइयां इसी दायरे में आती हैं।
जिला सचिव शेरसिंह मीरपुर ने चेतावनी दी है कि अगर इन फैसलों को वापस नहीं लिया तो एआईयूटीयूसी जनजागरण अभियान चलाकर मजदूरों को जागरूक करेगी और इन मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।