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Rewari News: चारे का विवाद थमा, नप करेगी ठेकेदार को पेमेंट
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रेवाड़ी। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा की श्री नंदू गोशाला में ठेकेदार के भुगतान विवाद से चार दिन से गोवंश के लिए चारा खत्म हो गया था। इसको लेकर चल रहा विवाद शुक्रवार को थम गया। डीएमसी के हस्तक्षेप के बाद अब रेवाड़ी नगर परिषद ठेकेदार की पेमेंट करेगी। इसके बाद गोशाला में चारा पहुंचना शुरू हो गया।
दोपहर को डीएमसी कार्यालय में डीएमसी सुमिता ढाका की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। डीएमसी ने नगर परिषद के अधिकारियों को ठेकेदार के बकाया 8 लाख रुपये की पेमेंट जारी करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि सूचना के बाद भी धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन कंवर सिंह बैठक में नहीं पहुंचे।
गोशाला में पिछले चार दिन से चारा खत्म होने के कारण 500 से अधिक गोवंश भूख से बिलबिलाने लगे थे। गोशाला प्रधान ने भी साफ कर दिया था कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक चारे का इंतजाम नहीं हुआ तो सारे पशुओं को गौशाला से बाहर सड़कों पर छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद धारूहेड़ा नगर पालिका वरेवाड़ी नगर परिषद के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। गोशाला में चारे के लिए हर माह 8 लाख रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से 84 लाख रुपये साल का बजट चाहिए। जबकि डीएमसी के पास 50 लाख रुपये देने का अधिकार था। डीएमसी ने बताया कि वे अब इसको लेकर निकाय विभाग के अर्बन लोकल बॉडी डायरेक्टर को पत्र लिखेगी।
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बता दें कि धारूहेड़ा के गरीब नगर में करीब 7 एकड़ में बनी गोशाला में पिछले 4 दिनों से चारा खत्म है। इसकी वजह यह है कि नगर पालिका धारूहेड़ा ने चारा मुहैया कराने वाले ठेकेदार की सितंबर माह की 8 लाख रुपये की पेमेंट रोक दी है। साथ ही अक्तूबर व नवंबर माह की पेमेंट की भी स्वीकृति नहीं दी है। गुरुवार को गोशाला प्रधान रोहित यादव के अलावा बड़ी संख्या में गौ रक्षक इस मामले को लेकर डीसी अशोक कुमार गर्ग से भी मिलने पहुंचे थे।
वहीं इस मामले को लेकर नगर पालिका धारूहेड़ा के चेयरमैन कंवर सिंह ने कहा कि धारूहेड़ा के विकास कार्य के पैसे चारे पर खर्च किए जा रहे हैं। जबकि गौशाला में पशु रेवाड़ी व बावल शहर की सड़कों से पकड़ कर छोड़े जा रहे है। ऐसे में भुगतान भी नगर परिषद या बावल नगर पालिका को करना चाहिए। जबकि नगर परिषद का सालाना 50 लाख का बजट पूरा होने के बाद नगर पालिका धारूहेड़ा की तरफ से पेमेंट कराई जा रही है।
रोजाना लगता है 70-80 क्विंटल चारा
इस गोशाला में रखे गए 500 से ज्यादा पशुओं को रोजाना 70-80 क्विंटल चारा खिलाया जाता है। कभी कभार कुछ दानी भी गौशाला में चारा भेंट कर जाते है, लेकिन इतने सारे पशुओं को रोजाना चारा खिलाने में निकाय विभाग का सहयोग बहुत जरूरी है। गौशाला प्रधान ने कहा कि कुछ माह पहले जब इसी तरह की समस्या खड़ी हुई तब भी कुछ दानी लोगों ने मदद की थी। उन्हें पशुओं के चारे के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे है।
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दोपहर को डीएमसी कार्यालय में डीएमसी सुमिता ढाका की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। डीएमसी ने नगर परिषद के अधिकारियों को ठेकेदार के बकाया 8 लाख रुपये की पेमेंट जारी करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि सूचना के बाद भी धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन कंवर सिंह बैठक में नहीं पहुंचे।
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गोशाला में पिछले चार दिन से चारा खत्म होने के कारण 500 से अधिक गोवंश भूख से बिलबिलाने लगे थे। गोशाला प्रधान ने भी साफ कर दिया था कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक चारे का इंतजाम नहीं हुआ तो सारे पशुओं को गौशाला से बाहर सड़कों पर छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद धारूहेड़ा नगर पालिका वरेवाड़ी नगर परिषद के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। गोशाला में चारे के लिए हर माह 8 लाख रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से 84 लाख रुपये साल का बजट चाहिए। जबकि डीएमसी के पास 50 लाख रुपये देने का अधिकार था। डीएमसी ने बताया कि वे अब इसको लेकर निकाय विभाग के अर्बन लोकल बॉडी डायरेक्टर को पत्र लिखेगी।
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बता दें कि धारूहेड़ा के गरीब नगर में करीब 7 एकड़ में बनी गोशाला में पिछले 4 दिनों से चारा खत्म है। इसकी वजह यह है कि नगर पालिका धारूहेड़ा ने चारा मुहैया कराने वाले ठेकेदार की सितंबर माह की 8 लाख रुपये की पेमेंट रोक दी है। साथ ही अक्तूबर व नवंबर माह की पेमेंट की भी स्वीकृति नहीं दी है। गुरुवार को गोशाला प्रधान रोहित यादव के अलावा बड़ी संख्या में गौ रक्षक इस मामले को लेकर डीसी अशोक कुमार गर्ग से भी मिलने पहुंचे थे।
वहीं इस मामले को लेकर नगर पालिका धारूहेड़ा के चेयरमैन कंवर सिंह ने कहा कि धारूहेड़ा के विकास कार्य के पैसे चारे पर खर्च किए जा रहे हैं। जबकि गौशाला में पशु रेवाड़ी व बावल शहर की सड़कों से पकड़ कर छोड़े जा रहे है। ऐसे में भुगतान भी नगर परिषद या बावल नगर पालिका को करना चाहिए। जबकि नगर परिषद का सालाना 50 लाख का बजट पूरा होने के बाद नगर पालिका धारूहेड़ा की तरफ से पेमेंट कराई जा रही है।
रोजाना लगता है 70-80 क्विंटल चारा
इस गोशाला में रखे गए 500 से ज्यादा पशुओं को रोजाना 70-80 क्विंटल चारा खिलाया जाता है। कभी कभार कुछ दानी भी गौशाला में चारा भेंट कर जाते है, लेकिन इतने सारे पशुओं को रोजाना चारा खिलाने में निकाय विभाग का सहयोग बहुत जरूरी है। गौशाला प्रधान ने कहा कि कुछ माह पहले जब इसी तरह की समस्या खड़ी हुई तब भी कुछ दानी लोगों ने मदद की थी। उन्हें पशुओं के चारे के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे है।