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गोशाला में 650 गोवंशों पर चारे का संकट

Sat, 27 Aug 2022 10:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2022 10:48 PM IST
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Fodder crisis on 650 cows in Gaushala
कस्बा धारूहेड़ा में बनी गोशाला में बेजुबान नंदी और गाय भूख से मरने की कगार पर हैं क्योंकि उन्हें खाने के लिए पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है। सरकारी स्तर पर 31 जुलाई को ही चारा मिलना बंद हो चुका था। गोशाला कमेटी अपने स्तर पर इंतजाम करने में जुटी हुई है। वहीं सरकारी स्तर पर सिर्फ पत्राचार के अलावा कोई समाधान नहीं निकला है। नौबत यह आ गई है कि शुक्रवार की रात तो चारा बिल्कुल खत्म हो गया।
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बता दें कि दो साल पहले धारूहेड़ा कस्बे के गरीब नगर में निकाय विभाग की सात एकड़ जमीन पर गोशाला बनाई गई थी। गोशाला का नाम नंदू गोशाला और उपचार सेंटर रखा गया। निकाय विभाग ने इस पर 30 लाख रुपये खर्च किए। गोशाला प्रबंधन के लिए बनी कमेटी ने गांव-गांव जाकर 50 लाख रुपये से ज्यादा एकत्रित करके इसे भव्य गोशाला का रूप दिया। गोशाला में इस समय 550 नंदी और 100 गाय रखी गई हैं। गोशाला में पशुओं के चारे के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर छोड़ा गया।
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दो साल तक सरकारी स्तर पर चारे का प्रबंध होता रहा लेकिन अब 31 जुलाई को टेंडर खत्म हो चुका है। टेंडर खत्म होने के बाद इसे दोबारा से शुरू कराने के लिए पिछले 27 दिनों से गोशाला प्रबंधन कमेटी नगर पालिका धारूहेड़ा और डीएमसी से अनुरोध करती रही लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई जबकि चारा खत्म होता चला गया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद गोशाला में प्रबंधन का कार्य देखने वाले पदाधिकारियों ने अपने स्तर पर चारे का प्रबंध किया। अब हालात यह हो गए हैं कि चारा बिल्कुल खत्म हो गया है।
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टेंडर खत्म होने से पहले ही चेताया
गोशाला के प्रधान रोहित ने बताया कि इसके संबंध में उन्होंने 12 जुलाई को ही दोबारा से टेंडर शुरू हो जाए इसलिए फाइल का प्रोसेस शुरू कर दिया था। साथ ही डीएमसी से स्वीकृति की फाइल का प्रोसेस भी उसी समय शुरू कर दिया था। उसके बावजूद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। टेंडर खत्म होने पर 2 अगस्त को डीएमसी से मुलाकात की। उन्होंने चारे का प्रबंध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद सप्लायर से खुद अपने स्तर पर चारा मंगवाया।
अधिकारियों ने इसका भुगतान करने की बात की। लेकिन धारूहेड़ा नगर पालिका ने भुगतान करने से साफ मना कर दिया। इसके बाद जब धारूहेड़ा के पार्षदों को पता चला तो 10 पार्षदों ने लिखित शिकायत देकर डीएमसी से गोशाला में चारे का प्रबंध कराने का अनुरोध किया। डीएमसी ने फिर से धारूहेड़ा नगर पालिका को चारे का प्रबंध करने के निर्देश दिए लेकिन हुआ कुछ नहीं।
24 अगस्त को डीएमसी ने फिर दिए थे निर्देश
श्रीनंदू गोशाला के संबंध में डीएमसी ने 24 अगस्त को धारूहेड़ा नगर पालिका के सचिव नाम भेजे गए पत्र में साफ बताया कि उनकी 50 लाख रुपये तक की लिमिट खत्म हो चुकी है। 5 लाख रुपये का भुगतान नगर परिषद रेवाड़ी के कार्यकारी अधिकारी और 2 लाख रुपये स्वयं नंदू गोशाला की तरफ से किया जा चुका है। पत्र में साफ निर्देश हैं कि धारूहेड़ा नगर पालिका अगस्त माह के चारे के संबंध में शेष राशि 4 लाख रुपये का भुगतान करते हुए 24 अगस्त तक उन्हें अवगत कराएं लेकिन धारूहेड़ा नगर पालिका ने कोई प्रबंध नहीं किया।
बेसहारा पकड़े पशु रखे गए
बता दें कि पिछले कई सालों से रेवाड़ी के अलावा धारूहेड़ा, बावल में बेसहारा पशुओं की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी। कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए। उसके बाद ऐसे पशुओं को पकड़ने की मांग ने जोर पकड़ा तो धारूहेड़ा में 7 एकड़ जमीन पर गौशाला बनाई गई जिसमें पिछले 2 साल के अंदर 550 नंदी और 100 बेसहारा गायों को पकड़कर रखा गया। शुरुआत में इनके रख-रखाव को लेकर बड़े दावे किए गए लेकिन अब इन्हें चारा ही नहीं मिल रहा है।
रेवाड़ी और बावल को करनी है व्यवस्था
मेरे चेयरमैन बनने से पहले जब गोशाला बनी तो उस समय जारी हुए लेटर में साफ लिखा गया था कि धारूहेड़ा ने अपनी 50 करोड़ रुपये की जमीन दे दी। गोशाला में व्यवस्था का जिम्मा रेवाड़ी नगर परिषद और बावल नगर पालिका को सौंपा गया था। मुझे डीएमसी की तरफ से लिखे गए किसी भी पत्र की कोई जानकारी नहीं है।

- कंवर सिंह यादव, चेयरमैन, धारूहेड़ा, नगरपालिका।
कोई भी काम पेंडिंग नहीं
नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से कोई भी काम पेंडिंग नहीं है। रही बात गोशाला के चारे की व्यवस्था की उसमें डीएमसी साहब ही इस बारे में आपको बता पाएंगे। डीएमसी भारत भूषण गोगिया अभी ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। महेंद्रगढ़ के डीसी जेके अबीर को रेवाड़ी का डीएमसी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। समिति के लोग उनके पास जाकर मिल सकते हैं।
- पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद, रेवाड़ी।
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