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Rewari News: नए साल में जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसें भर सकती हैं फर्राटा
Wed, 24 Dec 2025 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 24 Dec 2025 12:30 AM IST
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रेवाड़ी बस स्टैंड पर खड़ी इलेक्ट्रिक बसें। संवाद
रेवाड़ी। जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने से बसों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।
दरअसल इन इलेक्ट्रिक बसों को दीपावली के आसपास शुरू किया जाना था लेकिन तकनीकी कारणों और रूट प्लानिंग को लेकर निर्णय लंबित रहने के कारण इन्हें सड़क पर उतारने में देरी हुई। अब विभाग ने नए साल के अवसर पर गिफ्ट के रूप में शुरू करने की योजना बनाई है। फिलहाल जिले में मौजूद 5 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं जहां यात्रियों की अच्छी संख्या मिलने के कारण यह योजना सफल साबित हुई है।
नई बसों के आने के बाद परिवहन विभाग इनका संचालन बावल के अलावा अन्य महत्वपूर्ण रूटों पर करने की तैयारी में है। इनमें मीरपुर यूनिवर्सिटी को केंद्र में रखकर विशेष रूट तैयार किए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को अब निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें सीधे इलेक्ट्रिक बस के माध्यम से किफायती, सुरक्षित और आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी।
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इसके अलावा रूट प्लान में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख चौराहे, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े गांवों को भी शामिल किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस सुविधा का लाभ मिल सके। रोडवेज के जीएम निरंजन शर्मा ने बताया कि फिलहाल रूट का अध्ययन किया जा रहा है। सभी रूट प्रशासन की मंजूरी के बाद ही फाइनल किए जाएंगे। अभी संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
सभी रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों को समान सफलता नहीं मिली है। रोडवेज के अनुसार, जनवरी में धारूहेड़ा रूट पर भी बावल के साथ इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई थी। यह सेवा कुछ समय तक चली, लेकिन बाद में यात्री संख्या कम होने के कारण इसे बंद करना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि धारूहेड़ा रेवाड़ी को दिल्ली और गुरुग्राम से एनएच-48 के जरिए जोड़ता है, जहां पहले से ही निजी वाहनों की भरमार है। इसी वजह से वहां बसों को अपेक्षित यात्री नहीं मिल पाए।
इसके विपरीत बावल रूट पर रोजाना बसें यात्रियों से भरी हुई चलती हैं। अब नई बसों के जुड़ने से जिले में सार्वजनिक परिवहन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और लोग निजी वाहनों के बजाय पर्यावरण अनुकूल परिवहन की ओर आकर्षित होंगे।
इंसेट
बसों में मिलेगी ये सुविधा
नई इलेक्ट्रिक बसें आधुनिक तकनीक से लैस होंगी और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं। भीषण गर्मी में इनका शक्तिशाली एयर कंडीशनिंग सिस्टम यात्रियों को लू और तेज धूप से राहत देगा जबकि सर्दियों में बंद कांच वाली यह बसें शीतलहर से सुरक्षा प्रदान करेंगी। इन बसों में शोर और कंपन कम होता है।
इंसेट
सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए:
सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए हैं जिससे महिला यात्रियों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और स्टॉप अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए यात्रियों को अगले स्टॉप की जानकारी मिलती रहेगी। पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होने के कारण ये बसें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएंगी।
वर्जन:
नए साल में जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने की संभावना है। जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने से बसों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।-
निरंजन शर्मा, जीएम रोडवेज रेवाड़ी।
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दरअसल इन इलेक्ट्रिक बसों को दीपावली के आसपास शुरू किया जाना था लेकिन तकनीकी कारणों और रूट प्लानिंग को लेकर निर्णय लंबित रहने के कारण इन्हें सड़क पर उतारने में देरी हुई। अब विभाग ने नए साल के अवसर पर गिफ्ट के रूप में शुरू करने की योजना बनाई है। फिलहाल जिले में मौजूद 5 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं जहां यात्रियों की अच्छी संख्या मिलने के कारण यह योजना सफल साबित हुई है।
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नई बसों के आने के बाद परिवहन विभाग इनका संचालन बावल के अलावा अन्य महत्वपूर्ण रूटों पर करने की तैयारी में है। इनमें मीरपुर यूनिवर्सिटी को केंद्र में रखकर विशेष रूट तैयार किए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को अब निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें सीधे इलेक्ट्रिक बस के माध्यम से किफायती, सुरक्षित और आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी।
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इसके अलावा रूट प्लान में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख चौराहे, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े गांवों को भी शामिल किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस सुविधा का लाभ मिल सके। रोडवेज के जीएम निरंजन शर्मा ने बताया कि फिलहाल रूट का अध्ययन किया जा रहा है। सभी रूट प्रशासन की मंजूरी के बाद ही फाइनल किए जाएंगे। अभी संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
सभी रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों को समान सफलता नहीं मिली है। रोडवेज के अनुसार, जनवरी में धारूहेड़ा रूट पर भी बावल के साथ इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई थी। यह सेवा कुछ समय तक चली, लेकिन बाद में यात्री संख्या कम होने के कारण इसे बंद करना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि धारूहेड़ा रेवाड़ी को दिल्ली और गुरुग्राम से एनएच-48 के जरिए जोड़ता है, जहां पहले से ही निजी वाहनों की भरमार है। इसी वजह से वहां बसों को अपेक्षित यात्री नहीं मिल पाए।
इसके विपरीत बावल रूट पर रोजाना बसें यात्रियों से भरी हुई चलती हैं। अब नई बसों के जुड़ने से जिले में सार्वजनिक परिवहन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और लोग निजी वाहनों के बजाय पर्यावरण अनुकूल परिवहन की ओर आकर्षित होंगे।
इंसेट
बसों में मिलेगी ये सुविधा
नई इलेक्ट्रिक बसें आधुनिक तकनीक से लैस होंगी और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं। भीषण गर्मी में इनका शक्तिशाली एयर कंडीशनिंग सिस्टम यात्रियों को लू और तेज धूप से राहत देगा जबकि सर्दियों में बंद कांच वाली यह बसें शीतलहर से सुरक्षा प्रदान करेंगी। इन बसों में शोर और कंपन कम होता है।
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सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए:
सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए हैं जिससे महिला यात्रियों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और स्टॉप अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए यात्रियों को अगले स्टॉप की जानकारी मिलती रहेगी। पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होने के कारण ये बसें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएंगी।
वर्जन:
नए साल में जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने की संभावना है। जिले में 5 नई इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने से बसों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।-
निरंजन शर्मा, जीएम रोडवेज रेवाड़ी।