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Rewari News: शिक्षकों के लिए शिक्षा में नाटक कला विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला 27 से
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रेवाड़ी। जिले के शिक्षकों के लिए शिक्षा में नाटक कला विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। यह कार्यशाला सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र और स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। कार्यक्रम 27 अप्रैल से 1 मई तक डायट हुसैनपुर में संपन्न होगा।
सीसीआरटी अनिल यादव ने बताया कि कार्यशाला में जिले के सभी पांचों खंडों से लगभग 150 से 175 शिक्षक भाग लेंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और छात्र-केंद्रित बनाना है। इसके अंतर्गत नाटक कला के माध्यम से विषयों को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञ अध्यापकों को यह भी बताएंगे कि किस प्रकार नाटक और अभिनय के जरिए कक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रम में आधुनिक शिक्षण विधियों के साथ पारंपरिक ज्ञान के समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सांस्कृतिक संवेदनशीलता, विविधता के सम्मान और अनुभवात्मक अधिगम तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर भी सत्र आयोजित होंगे। आगे बताया कि यह कार्यशाला शिक्षकों को न केवल नवीन शिक्षण कौशल प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें कक्षा में रचनात्मक और अभिनव प्रयोग करने के लिए प्रेरित भी करेगी।
नाटक कला के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे जिससे वे विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षित कर सकें।
इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो शिक्षकों के पेशेवर विकास के साथ-साथ विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को भी समृद्ध करेगा। इससे शिक्षकों को काफी फायदा मिलेगा।
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सीसीआरटी अनिल यादव ने बताया कि कार्यशाला में जिले के सभी पांचों खंडों से लगभग 150 से 175 शिक्षक भाग लेंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और छात्र-केंद्रित बनाना है। इसके अंतर्गत नाटक कला के माध्यम से विषयों को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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विशेषज्ञ अध्यापकों को यह भी बताएंगे कि किस प्रकार नाटक और अभिनय के जरिए कक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रम में आधुनिक शिक्षण विधियों के साथ पारंपरिक ज्ञान के समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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सांस्कृतिक संवेदनशीलता, विविधता के सम्मान और अनुभवात्मक अधिगम तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर भी सत्र आयोजित होंगे। आगे बताया कि यह कार्यशाला शिक्षकों को न केवल नवीन शिक्षण कौशल प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें कक्षा में रचनात्मक और अभिनव प्रयोग करने के लिए प्रेरित भी करेगी।
नाटक कला के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे जिससे वे विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षित कर सकें।
इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो शिक्षकों के पेशेवर विकास के साथ-साथ विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को भी समृद्ध करेगा। इससे शिक्षकों को काफी फायदा मिलेगा।