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Rewari News: पचास किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती करने का प्रशिक्षण
Fri, 15 May 2026 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 15 May 2026 11:44 PM IST
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गांव मोहम्मदपुर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में किसानों को जानकारी देते कृषि उपनिदेशक डॉ. जितेंद
बावल। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन गांव मोहम्मदपुर में किया गया। इसमें 50 किसानों ने प्राकृतिक खेती करना का प्रशिक्षण लिया।
कृषि उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र अहलावत ने किसानों को लागत मुक्त खेती का तरीका बताया। उन्होंने बताया कि यदि किसान गोबर और गोमूत्र का उपयोग करें तो खेती की लागत कम होने के साथ जोखिम भी घटेगा और लाभ बढ़ेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विज्ञानी डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा रासायनिक खेती में नहीं बल्कि जैविक संतुलन में निहित है। कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से लाभकारी कीट समाप्त हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
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उन्होंने किसानों को ट्रैप क्रॉपिंग, नीम एवं दशपर्णी अर्क के उपयोग और खेतों में लाभकारी पक्षियों व कीटों के अनुकूल वातावरण बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में कीट नियंत्रण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन से संभव है।
रोग विज्ञानी डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने के साथ ही पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कृषि अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी को पुनर्जीवित करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि अब कृषि को उच्च लागत-उच्च उत्पादन मॉडल से निकालकर कम लागत-टिकाऊ उत्पादन मॉडल की ओर ले जाना आवश्यक है।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र अहलावत ने किसानों को लागत मुक्त खेती का तरीका बताया। उन्होंने बताया कि यदि किसान गोबर और गोमूत्र का उपयोग करें तो खेती की लागत कम होने के साथ जोखिम भी घटेगा और लाभ बढ़ेगा।
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कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विज्ञानी डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा रासायनिक खेती में नहीं बल्कि जैविक संतुलन में निहित है। कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से लाभकारी कीट समाप्त हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
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उन्होंने किसानों को ट्रैप क्रॉपिंग, नीम एवं दशपर्णी अर्क के उपयोग और खेतों में लाभकारी पक्षियों व कीटों के अनुकूल वातावरण बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में कीट नियंत्रण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन से संभव है।
रोग विज्ञानी डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने के साथ ही पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कृषि अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी को पुनर्जीवित करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि अब कृषि को उच्च लागत-उच्च उत्पादन मॉडल से निकालकर कम लागत-टिकाऊ उत्पादन मॉडल की ओर ले जाना आवश्यक है।