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‘किसानों को अधिग्रहित जमीन का मुआवजा दिया जाए’
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रेवाड़ी। एमआरटीएस परियोजना के लिए एचएसआईडीसी की ओर से दो साल पहले अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा अभी तक नहीं मिलने की वजह से किसान आर्थिक तंगहाली झेल रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के जिलाध्यक्ष समय सिंह के अनुसार ऐसे किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं। जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में आज संगठन सदस्य केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव और भाजपा की केंद्रीय संसदीय समिति की सदस्य डॉ. सुधा यादव से मिले और उनको इस विषय में ज्ञापन सौंपे। समय सिंह ने कहा कि यह जमीन धारूहेड़ा क्षेत्र के गांव खालियावास, डूंगरवास और मसानी से संबंधित किसानों की है। किसानों की भूमि का मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह में मांगें पूरी न हुई तो लघु सचिवालय पर किसान धरना प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि एमआरटीएस परियोजना (मास रेपिड ट्रांजिट सिस्टम एंड एलाइ यूज एवं अरली प्रोजेक्ट डीएमआईसी) के विस्तारीकरण के लिए एचएसआईआईडीसी ने ली, जिसका अवॉर्ड 7 अगस्त 2020 को सुनाया गया और यह जमीन अधिग्रहित कर ली गई। 2020-21 में जिला रेवाड़ी में इस परियोजना के तहत कुल 201 करोड़ 53 लाख 62 हजार 130 रुपये मुआवजा राशि का अवार्ड हुआ, जिसमें से 120 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण के नाम पर किसानों को जारी भी कर दिए गए, मगर शेष 81 करोड़, 53 लाख, 62 हजार 130 रुपये इस जमीन पर बने भवन की क्षतिपूर्ति के तौर पर 10 सितंबर 2021 को अवार्ड घोषित करने के बाद संबंधित लोगों को मिल जाने थे, मगर ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के पास बार-बार चक्कर लगाने पर अधिकारी दो टूक जवाब देते हैं कि ऊपर से यह धनराशि नहीं आई। यदि एक सप्ताह के अंदर किसानों को यह धनराशि नहीं मिली तो किसान लघु सचिवालय के सामने राजीव चौक पर धरना एवं प्रदर्शन शुरू कर देंगे। उधर जिले से उक्त संगठन के किसान सदस्य 5 सितंबर को कुरूक्षेत्र में जुमला मुस्तरका मालकान जमीन मामले में आयोजित बैठक में भाग लेने जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिलाध्यक्ष समय सिंह ने बताया कि 6 सितंबर को सुबह 9 बजे उक्त संगठन की मासिक बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन बारे चर्चा होगी। बाद में बैठक में इस मुआवजे को लेकर उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि एमआरटीएस परियोजना (मास रेपिड ट्रांजिट सिस्टम एंड एलाइ यूज एवं अरली प्रोजेक्ट डीएमआईसी) के विस्तारीकरण के लिए एचएसआईआईडीसी ने ली, जिसका अवॉर्ड 7 अगस्त 2020 को सुनाया गया और यह जमीन अधिग्रहित कर ली गई। 2020-21 में जिला रेवाड़ी में इस परियोजना के तहत कुल 201 करोड़ 53 लाख 62 हजार 130 रुपये मुआवजा राशि का अवार्ड हुआ, जिसमें से 120 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण के नाम पर किसानों को जारी भी कर दिए गए, मगर शेष 81 करोड़, 53 लाख, 62 हजार 130 रुपये इस जमीन पर बने भवन की क्षतिपूर्ति के तौर पर 10 सितंबर 2021 को अवार्ड घोषित करने के बाद संबंधित लोगों को मिल जाने थे, मगर ऐसा नहीं हुआ।
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उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के पास बार-बार चक्कर लगाने पर अधिकारी दो टूक जवाब देते हैं कि ऊपर से यह धनराशि नहीं आई। यदि एक सप्ताह के अंदर किसानों को यह धनराशि नहीं मिली तो किसान लघु सचिवालय के सामने राजीव चौक पर धरना एवं प्रदर्शन शुरू कर देंगे। उधर जिले से उक्त संगठन के किसान सदस्य 5 सितंबर को कुरूक्षेत्र में जुमला मुस्तरका मालकान जमीन मामले में आयोजित बैठक में भाग लेने जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिलाध्यक्ष समय सिंह ने बताया कि 6 सितंबर को सुबह 9 बजे उक्त संगठन की मासिक बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन बारे चर्चा होगी। बाद में बैठक में इस मुआवजे को लेकर उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
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