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Rewari News: किसानों ने खेती की नई तकनीक सीखी
Wed, 05 Nov 2025 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 05 Nov 2025 11:40 PM IST
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फोटो : 13एग्रो फार्म में विजिट के दौरान एकत्रित हुए किसान। स्रोत : विभाग
- फोटो : -मीडिया से बातचीत करते लोक जनशक्ति पार्टी के राष्टीय प्रवक्ता एके वाजपेई। स्रोत वीडियो ग्रैब
धारूहेड़ा। जिला बागवानी विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला के तहत बुधवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने धारूहेड़ा स्थित एग्रो फार्म का दौरा किया। इस दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को नजदीक से समझा और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की।
फील्ड विजिट में रोहतक, जींद, सोनीपत, गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फतेहाबाद जिलों के किसान शामिल रहे। उन्होंने खेतों में जाकर इनपुट लैब, जमीन की स्थिति, तपड़ बिजाई, बफर जोन, सिंचाई पद्धति, अच्छादन, पशुपालन और गेहूं, सरसों, जौ, चना और सब्जियों की विभिन्न वैरायटी का अवलोकन किया। किसानों को प्राकृतिक उत्पादन की मार्केटिंग से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लागत घटाने का भी प्रभावी तरीका है। साथ ही यह भी बताया गया कि इस विधि में किन गलतियों से बचना चाहिए। किसानों ने इस दौरान कई सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए जिससे चर्चा और भी उपयोगी बन गई।
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सीआरपी इंद्रजीत ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण को सफल बनाने के लिए दोनों ओर से संवाद जरूरी होता है। किसान जब अपने मन के सवाल पूछते हैं, तभी विषय की गहराई तक समझ विकसित होती है। यहां किसानों ने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पक्षों को समझते हुए इसे अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर किसान राकेश सहित बागवानी विभाग गुरुग्राम के कई अधिकारी और स्टाफ भी मौजूद रहे।
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फील्ड विजिट में रोहतक, जींद, सोनीपत, गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फतेहाबाद जिलों के किसान शामिल रहे। उन्होंने खेतों में जाकर इनपुट लैब, जमीन की स्थिति, तपड़ बिजाई, बफर जोन, सिंचाई पद्धति, अच्छादन, पशुपालन और गेहूं, सरसों, जौ, चना और सब्जियों की विभिन्न वैरायटी का अवलोकन किया। किसानों को प्राकृतिक उत्पादन की मार्केटिंग से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी दी गई।
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कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लागत घटाने का भी प्रभावी तरीका है। साथ ही यह भी बताया गया कि इस विधि में किन गलतियों से बचना चाहिए। किसानों ने इस दौरान कई सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए जिससे चर्चा और भी उपयोगी बन गई।
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सीआरपी इंद्रजीत ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण को सफल बनाने के लिए दोनों ओर से संवाद जरूरी होता है। किसान जब अपने मन के सवाल पूछते हैं, तभी विषय की गहराई तक समझ विकसित होती है। यहां किसानों ने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पक्षों को समझते हुए इसे अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर किसान राकेश सहित बागवानी विभाग गुरुग्राम के कई अधिकारी और स्टाफ भी मौजूद रहे।