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Rewari News: बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होने से किसान परेशान
Mon, 06 Oct 2025 01:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:10 AM IST
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फोटो : 22अनाज मंडी में लगा बाजरा का ढेर। संवाद
- फोटो : शहर के चौक में श्री बड़ी अंबे माता पूजा समिति के पंडाल में स्थापित देवी प्रतिमा।
रेवाड़ी। अनाज मंडी में बाजरे के ढेर लग गए हैं लेकिन सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते किसान परेशान हैं। निजी तौर पर आढ़ती औने-पौने दाम पर बाजरे की खरीद कर रहे हैं। इस वर्ष बारिश के चलते बाजरे के दाने काले पड़ गए हैं। गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
किसानों के अनुसार इस बार बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही है। इसी वजह से सरकारी खरीद एजेंसियां बाजरा खरीदने से परहेज कर रही हैं। इससे उन्हें फसल को मंडी में लंबे समय तक रखने से नुकसान हो रहा है।
कई किसान मौसम की मार और समय पर बिक्री न होने की चिंता में हैं। हरियाणा सरकार ने फसल पर प्रकृति की आपदा को ध्यान में रखते हुए ही भावांतर भरपाई का नियम बाजरा खरीद में लागू कर दिया है, जिससे कि किसी किसान को आर्थिक रूप से क्षति ना पहुंचे।
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मंडी में व्यापारियों का कहना है कि बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह से खरी नहीं उतर रही है। शनिवार को मंडी में दौरे पर आए हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने स्पष्ट किया था कि जो किसान मंडी में ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से आढ़ती को बाजरा की फसल बेचने के लिए आएंगे, उन्हें सरकार की ओर से भावांतर भरपाई स्कीम का लाभ दिया जाएगा।
हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने कहा है कि सरकार के मापदंड जो बाजरे की खरीद के लिए बनाए गए हैं, उस गुणवत्ता की आवक बहुत कम है। ई-खरीद के जरिए आढ़तियों ने जो बाजरा लिया है, उसका किसानों को भुगतान समय पर किया जाए और उनको भावांतर भरपाई के निर्धारित किए गए दाम 575 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ प्रदान किया जाए।
हैफेड एमडी मुकुल कुमार ने कहा कि यदि कोई बाजरा की ढेरी तय किए गए मापदंड के अनुरूप मिलती है तो उसकी सरकारी खरीद हो सकती है।
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किसानों के अनुसार इस बार बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही है। इसी वजह से सरकारी खरीद एजेंसियां बाजरा खरीदने से परहेज कर रही हैं। इससे उन्हें फसल को मंडी में लंबे समय तक रखने से नुकसान हो रहा है।
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कई किसान मौसम की मार और समय पर बिक्री न होने की चिंता में हैं। हरियाणा सरकार ने फसल पर प्रकृति की आपदा को ध्यान में रखते हुए ही भावांतर भरपाई का नियम बाजरा खरीद में लागू कर दिया है, जिससे कि किसी किसान को आर्थिक रूप से क्षति ना पहुंचे।
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मंडी में व्यापारियों का कहना है कि बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह से खरी नहीं उतर रही है। शनिवार को मंडी में दौरे पर आए हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने स्पष्ट किया था कि जो किसान मंडी में ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से आढ़ती को बाजरा की फसल बेचने के लिए आएंगे, उन्हें सरकार की ओर से भावांतर भरपाई स्कीम का लाभ दिया जाएगा।
हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने कहा है कि सरकार के मापदंड जो बाजरे की खरीद के लिए बनाए गए हैं, उस गुणवत्ता की आवक बहुत कम है। ई-खरीद के जरिए आढ़तियों ने जो बाजरा लिया है, उसका किसानों को भुगतान समय पर किया जाए और उनको भावांतर भरपाई के निर्धारित किए गए दाम 575 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ प्रदान किया जाए।
हैफेड एमडी मुकुल कुमार ने कहा कि यदि कोई बाजरा की ढेरी तय किए गए मापदंड के अनुरूप मिलती है तो उसकी सरकारी खरीद हो सकती है।