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Rewari News: सरकारी खरीद के इंतजार में किसान नुकसान पर बेच रहे बाजरा की फसल
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रमेश कुमार, गांव भाकली बी
- फोटो : Videograb
रेवाड़ी। बाजरे की सरकारी खरीद शुरू होने को लेकर किसान अभी भी असमंजस में हैं। जिले की मंडियों में बाजरे की आवक लगातार बढ़ रही है।सरकारी खरीद शुरू होने के आदेश नहीं आने के कारण किसानों को व्यापारियों के हाथों कम भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि उन्हें समर्थन मूल्य की अपेक्षा करीब 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में मंडियों में व्यापारी करीब 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक बाजरा खरीद रहे हैं। कई किसान 2250 रुपये तक के भाव पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं।
इस बार जिले में करीब 1.4 लाख एकड़ में बाजरे की फसल है। किसानों के अनुसार जिले में अब तक करीब 70 प्रतिशत बाजरे की कटाई हो चुकी है, जबकि करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में थ्रेसिंग का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब पांच हजार क्विंटल बाजरा मंडियों में पहुंच रहा है।
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इसमें करीब 90 प्रतिशत आवक राजस्थान क्षेत्र से पहुंचने वाले बाजरे की बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि बाजरे की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, जुताई, कटाई और थ्रेसिंग पर खर्च बढ़ने के बावजूद मंडी में अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। सरकारी खरीद शुरू होने की उम्मीद में कई किसानों ने अपनी फसल रोक रखी है। लंबे समय तक घर पर रखना भी किसानों के लिए संभव नहीं है।
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किसानों का कहना है कि उन्हें समर्थन मूल्य की अपेक्षा करीब 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में मंडियों में व्यापारी करीब 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक बाजरा खरीद रहे हैं। कई किसान 2250 रुपये तक के भाव पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं।
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इस बार जिले में करीब 1.4 लाख एकड़ में बाजरे की फसल है। किसानों के अनुसार जिले में अब तक करीब 70 प्रतिशत बाजरे की कटाई हो चुकी है, जबकि करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में थ्रेसिंग का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब पांच हजार क्विंटल बाजरा मंडियों में पहुंच रहा है।
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इसमें करीब 90 प्रतिशत आवक राजस्थान क्षेत्र से पहुंचने वाले बाजरे की बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि बाजरे की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, जुताई, कटाई और थ्रेसिंग पर खर्च बढ़ने के बावजूद मंडी में अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। सरकारी खरीद शुरू होने की उम्मीद में कई किसानों ने अपनी फसल रोक रखी है। लंबे समय तक घर पर रखना भी किसानों के लिए संभव नहीं है।

रमेश कुमार, गांव भाकली बी- फोटो : Videograb

रमेश कुमार, गांव भाकली बी- फोटो : Videograb

रमेश कुमार, गांव भाकली बी- फोटो : Videograb

रमेश कुमार, गांव भाकली बी- फोटो : Videograb