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Rewari News: अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर हुआ प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन का आयोजन
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रेवाड़ी। अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के मौके पर केएलपी कॉलेज के ऑडिटोरियम में प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल ने अहिल्यादेवी होल्कर की जीवनी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. आंचल जैनजी ने महिलाओं द्वारा उद्योग चलाने के बारे प्रकाश डाला। जिला प्रचार प्रमुख योगेश त्यागी ने बताया कि कार्यक्रम में समाज के लगभग सभी श्रेणियों के 1560 श्रोता एवं 127 लोग व्यवस्थाओं में प्रबंधक उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र पाल ने कहा कि लोकमाता पुण्यश्लोका के योगदान को समग्रता के साथ समझने के लिए उनके अन्तर्बोध और जीवन मूल्यों को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उनकी राजशाही में लोकतान्त्रिक परम्पराओं की झलक मिलती है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर ने 300 वर्ष पूर्व महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी भारतीय नारी के अदम्य साहस और संघर्षशीलता की प्रतीक हैं। जिन्होंने 28 वर्ष तक मालवा पर शासन कर यह सिद्ध किया कि भारतीय महिलाओं की क्षमता का न केवल सम्मान था बल्कि उन्हें समान अवसर भी प्राप्त हुए।
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उन्होंने कहा कि लोकमाता हमारी पृथ्वी पर देवी का रूप थीं। वह संघर्षशील, क्रांतिकारी, दयालु व धार्मिक प्रकृति की शासक रहीं थीं। उन्होंने जीवन में संघर्ष के साथ समाज का उत्थान करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए अलग हर इंसान को अपनी मर्यादा के अनुसार कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित एवं शिक्षित होने की आवश्यकता है तभी सफलता निश्चित है। उन्होंने कहा कि जो समाज राजनीति से दूर है उनकी तरक्की नहीं हो सकती। यदि समाज की तरक्की चाहिए तो समाज के युवाओं को संगठित रहने के साथ राजनीति में उतरना होगा। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का जन्मोत्सव मनाते हुए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ रामबाबू , सह संयोजक संजय डाटा ने सभी का धन्यवाद किया, कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत से हुआ।
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मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र पाल ने कहा कि लोकमाता पुण्यश्लोका के योगदान को समग्रता के साथ समझने के लिए उनके अन्तर्बोध और जीवन मूल्यों को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उनकी राजशाही में लोकतान्त्रिक परम्पराओं की झलक मिलती है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर ने 300 वर्ष पूर्व महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
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उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी भारतीय नारी के अदम्य साहस और संघर्षशीलता की प्रतीक हैं। जिन्होंने 28 वर्ष तक मालवा पर शासन कर यह सिद्ध किया कि भारतीय महिलाओं की क्षमता का न केवल सम्मान था बल्कि उन्हें समान अवसर भी प्राप्त हुए।
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उन्होंने कहा कि लोकमाता हमारी पृथ्वी पर देवी का रूप थीं। वह संघर्षशील, क्रांतिकारी, दयालु व धार्मिक प्रकृति की शासक रहीं थीं। उन्होंने जीवन में संघर्ष के साथ समाज का उत्थान करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए अलग हर इंसान को अपनी मर्यादा के अनुसार कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित एवं शिक्षित होने की आवश्यकता है तभी सफलता निश्चित है। उन्होंने कहा कि जो समाज राजनीति से दूर है उनकी तरक्की नहीं हो सकती। यदि समाज की तरक्की चाहिए तो समाज के युवाओं को संगठित रहने के साथ राजनीति में उतरना होगा। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का जन्मोत्सव मनाते हुए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ रामबाबू , सह संयोजक संजय डाटा ने सभी का धन्यवाद किया, कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत से हुआ।