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सॉफ्टवेयर के फेर में अटकी बिजली रीडिंग.
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 15 Oct 2016 01:01 AM IST
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electricity price increases
- फोटो : Demo Pic
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बिजली निगम की ओर से मंथली बिल सिस्टम एक बार फिर से दो महीने करने का काम सॉफ्टवेयर के फेर में अटक कर रह गया है। जुलाई महीने से बिजली निगम की ओर से निगम उपभोक्ताओं को दो महीने की मंथली बिल सिस्टम शुरू कर दिया गया था। जिसका विरोध सभी स्तरों पर किया गया था।
राजनैतिक विरोध के बाद निगम ने एक बार फिर से बिल को दो महीने का करने का आश्वासन दिया था। बिजली निगम के सूत्रों के अनुसार बिजली बिल तैयार करने वाली कंपनी एचईएल द्वारा हाथ खींचे जाने से उपभोक्ताओं को और कुछ महीने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इधर निगम अधिकारियों का दावा है कि नवंबर महीने से उपभोक्ताओं के बिल दो महीने वाले सिस्टम से भेजे जाएंगे।
पहले भी झेल चुके सॉफ्टवेयर का नुकसान
यह पहली बार नहीं जब सॉफ्टवेयर की अड़चन से बिजली उपभोक्ता परेशानी का सामना कर रहे हों। अक्तूबर महीने से पहले भी निगम की ओर से उपभोक्ताओं को मनमाने बिजली बिल भेजे जा रहे थे। जबकि कंप्यूटर से प्रिंट होकर आने वाले बिलों में मीटर रीडिंग जीरो आ रही थी। ग्रीवेंट कमेटी की मीटिंग से लेकर मुख्य अभियंता के खुले दरबार में उपभोक्ता इसका विरोध कर चुके थे। लेकिन करीब चार महीनों मे भी इसका समाधान नहीं हो पाया था। हालांकि अक्तूबर महीने में आने वाले बिलों में रीडिंग दर्शाई गई है। लेकिन बिल में जो रीडिंग दर्शाई गई है,उसके हिसाब से उपभोक्ताओं से निगम ज्यादा बिल वसूल चुका है।
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उपभोक्ताओं में निगम के प्रति गहरा रोष
जीरो रीडिंग एवं मनमाने बिजली बिल भेजने के विरोध में सैकड़ों उपभोक्ताओं ने झज्जर रोड स्थित शक्ति भवन पहुंचकर जबरदस्त विरोध जताया था। विरोध के बाद कार्यकारी अभियंता ने स्वयं आगे आकर उपभोक्ताओं की समस्याओं को हल करने का आश्वासन दिया था। इतना ही नहीं उपभोक्ताओ ने स्थानीय विधायक रणधीर सिंह कापडीवास का दरवाजा भी खटखटाया था। कापडीवास ने कहा था कि सरकार से बात कर बिल को एक महीने की बजाय दो महीने का बिल बनवाने का प्रयास करेंगे।
वर्जन-
सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ बात कर ली गई है। एक नवंबर से एक बार फिर से मंथली की बजाय बिल दो महीने के बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
-इंद्रजीत यादव, एसई, रेवाड़ी सर्कल
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राजनैतिक विरोध के बाद निगम ने एक बार फिर से बिल को दो महीने का करने का आश्वासन दिया था। बिजली निगम के सूत्रों के अनुसार बिजली बिल तैयार करने वाली कंपनी एचईएल द्वारा हाथ खींचे जाने से उपभोक्ताओं को और कुछ महीने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इधर निगम अधिकारियों का दावा है कि नवंबर महीने से उपभोक्ताओं के बिल दो महीने वाले सिस्टम से भेजे जाएंगे।
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पहले भी झेल चुके सॉफ्टवेयर का नुकसान
यह पहली बार नहीं जब सॉफ्टवेयर की अड़चन से बिजली उपभोक्ता परेशानी का सामना कर रहे हों। अक्तूबर महीने से पहले भी निगम की ओर से उपभोक्ताओं को मनमाने बिजली बिल भेजे जा रहे थे। जबकि कंप्यूटर से प्रिंट होकर आने वाले बिलों में मीटर रीडिंग जीरो आ रही थी। ग्रीवेंट कमेटी की मीटिंग से लेकर मुख्य अभियंता के खुले दरबार में उपभोक्ता इसका विरोध कर चुके थे। लेकिन करीब चार महीनों मे भी इसका समाधान नहीं हो पाया था। हालांकि अक्तूबर महीने में आने वाले बिलों में रीडिंग दर्शाई गई है। लेकिन बिल में जो रीडिंग दर्शाई गई है,उसके हिसाब से उपभोक्ताओं से निगम ज्यादा बिल वसूल चुका है।
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उपभोक्ताओं में निगम के प्रति गहरा रोष
जीरो रीडिंग एवं मनमाने बिजली बिल भेजने के विरोध में सैकड़ों उपभोक्ताओं ने झज्जर रोड स्थित शक्ति भवन पहुंचकर जबरदस्त विरोध जताया था। विरोध के बाद कार्यकारी अभियंता ने स्वयं आगे आकर उपभोक्ताओं की समस्याओं को हल करने का आश्वासन दिया था। इतना ही नहीं उपभोक्ताओ ने स्थानीय विधायक रणधीर सिंह कापडीवास का दरवाजा भी खटखटाया था। कापडीवास ने कहा था कि सरकार से बात कर बिल को एक महीने की बजाय दो महीने का बिल बनवाने का प्रयास करेंगे।
वर्जन-
सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ बात कर ली गई है। एक नवंबर से एक बार फिर से मंथली की बजाय बिल दो महीने के बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
-इंद्रजीत यादव, एसई, रेवाड़ी सर्कल