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वार्ड नंबर 4 से पूर्व पार्षद के मैदान में आने से रोचक हुआ चुनावी मुकाबला
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रेवाड़ी। पंचायत समिति खोल की चेयरपर्सन पद पर बैठने के लिए अब दो वार्डों में चुनावी घमासान तेज हो गया है। समिति में अनुसूचित जाति ( अजा) वर्ग की महिला के लिए महज वार्ड आठ रिजर्व है। इसलिए इस वार्ड से जीतने वाली प्रत्याशी का चेयरपर्सन पद पर बैठना तय माना जा रहा था, लेकिन अब महिला आरक्षित वार्ड नंबर चार में अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाली पूर्व पार्षद कुमारी गीता के चुनाव मैदान में कूदने से चुनावी समीकरण रोचक हो गया। गीता केंद्रीय मंत्री समर्थित हैं। अब समिति के सभी लोगों की निगाहें वार्ड नंबर चार व आठ पर टिक गई हैं।
वार्ड 4 महिला के लिए आरक्षित है। इसमें किसी भी वर्ग की महिला चुनाव लड़ सकती हैं। यहीं कारण है कि अजा वर्ग की महिला वार्ड से चुनाव लड़ रही हैं। इस वार्ड करीब 2359 मतदाता हैं, जिसमें कुंड व पाडला दो गांव शामिल हैैं। जबकि वार्ड नंबर 8 में खालेटा व मायण गांव शामिल है, जिनमें 4 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में पंचायत समिति के चुनाव में दिलचस्प समीकरण बन गया है। ऐसे में देखना होगा कि खोल पंचायत समिति की चौधर किस महिला के हाथ में होगी।
पद आरक्षित होने से महिलाओं को मिला मौका
पंचायत चुनाव में महिलाओं की अहम भूमिका होती हैं। बहुत कम गांवों में महिलाओं को पंचायत सदस्य व ग्राम सरपंच चुना जाता है, लेकिन इस बार महिलाओं को 5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद चुनावों की महिलाएं बराबरी पर आ खड़ी हुइ हैं। लेकिन ज्यादातर गांव में ऐसा होता है कि सरपंच या पंच तो महिला को ही चुना जाता है, परंतु उसके स्थान पर काम उसका पति या परिवार का कोई पुरुष ही करता है। महिलाओं का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद चयनित महिला प्रतिनिधि को अपने कार्य खुद करने चाहिए। इसमें किसी प्रकार की कोई दखल नहीं होनी चाहिए। इस लोकतंत्र पर्व में महिलाओं को बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए।
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वार्ड 4 महिला के लिए आरक्षित है। इसमें किसी भी वर्ग की महिला चुनाव लड़ सकती हैं। यहीं कारण है कि अजा वर्ग की महिला वार्ड से चुनाव लड़ रही हैं। इस वार्ड करीब 2359 मतदाता हैं, जिसमें कुंड व पाडला दो गांव शामिल हैैं। जबकि वार्ड नंबर 8 में खालेटा व मायण गांव शामिल है, जिनमें 4 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में पंचायत समिति के चुनाव में दिलचस्प समीकरण बन गया है। ऐसे में देखना होगा कि खोल पंचायत समिति की चौधर किस महिला के हाथ में होगी।
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पद आरक्षित होने से महिलाओं को मिला मौका
पंचायत चुनाव में महिलाओं की अहम भूमिका होती हैं। बहुत कम गांवों में महिलाओं को पंचायत सदस्य व ग्राम सरपंच चुना जाता है, लेकिन इस बार महिलाओं को 5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद चुनावों की महिलाएं बराबरी पर आ खड़ी हुइ हैं। लेकिन ज्यादातर गांव में ऐसा होता है कि सरपंच या पंच तो महिला को ही चुना जाता है, परंतु उसके स्थान पर काम उसका पति या परिवार का कोई पुरुष ही करता है। महिलाओं का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद चयनित महिला प्रतिनिधि को अपने कार्य खुद करने चाहिए। इसमें किसी प्रकार की कोई दखल नहीं होनी चाहिए। इस लोकतंत्र पर्व में महिलाओं को बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए।
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