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Rewari News: औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रत्येक विद्यालयों को मिलेंगे 32 हजार
Wed, 27 Mar 2024 08:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 27 Mar 2024 08:38 PM IST
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रेवाड़ी। शिक्षा विभाग की ओर से व आयुष विभाग के सहयोग से सरकारी विद्यालयों में किचन गार्डन की तर्ज पर अब हर्बल गार्डन भी स्थापित किए जाएंगे। हर्बल गार्डन में करीब 15 प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यह औषधीय पौधे रोग की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन में अहम भूमिका निभाएंगे। सरकार की ओर से प्रत्येक विद्यालय को 32 हजार की सहायता राशि दी जाएगी, इसमें 25 हजार रुपये पौधे खरीद के लिए और 7 हजार रुपये रखरखाव के लिए शामिल होंगे।
स्कूलों में 500 वर्ग मीटर में हर्बल गार्डन स्थापित होंगे। इसके लिए निदेशालय ने पत्र जारी कर दिया है। जिन स्कूलों में हर्बल गार्डन स्थापित किए जाएंगे, उनको अगले चार साल तक पौधों की देखभाल करने के लिए 7 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। सरकार द्वारा कुल 32 हजार की सहायता राशि दी जाएगी, इसमें 25 हजार रुपये पौध खरीद के लिए और 7 हजार रुपये रखरखाव के लिए शामिल होंगे। सरकारी विद्यालयों में बनने वाले हर्बल गार्डन 500 वर्ग मीटर में स्थापित किए जाएंगे। इनमें करीब 15 प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। विद्यालय हर्बल गार्डन में सिंचाई व रखरखाव की जिम्मेदारी विद्यार्थियों सहित शिक्षक व सामाजिक संगठनों की होगी।
रोगों को ठीक करने में पौधे होंगे उपयोगी
निदेशालय की ओर से जारी किए गए पत्र में लिखा है कि यह औषधीय पौधे रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन में अहम भूमिका निभाएंगे तथा रोगों को ठीक करने में भी उपयोगी होंगे। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इससे पहले शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में किचन गार्डन बनाए थे, ताकि विद्यालय में ही बच्चों को रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध हो सकें।
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2020 में राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड की स्थापना की गई
औषधीय पौधों के क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की तरफ से 2020 में राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड की स्थापना भी की गई थी। यह बोर्ड वर्तमान में आयुष मंत्रालय भारत सरकार के एक अनुभाग के रूप में कार्य कर रहा है। आयुष विभाग की तरफ से हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल, विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सरकारी विद्यालयों से हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए आवेदन मांगे हैं।
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शिक्षा निदेशालय ने सभी विद्यालय मुखियाओं को दिशा निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव आयुष विभाग को भेजने के बारे में निर्देशित करने के लिए पत्र जारी किया है, ताकि विभाग द्वारा विद्यालयों को हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।
डॉ. अशोक नामवाल, डीएमएस रेवाड़ी।
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स्कूलों में 500 वर्ग मीटर में हर्बल गार्डन स्थापित होंगे। इसके लिए निदेशालय ने पत्र जारी कर दिया है। जिन स्कूलों में हर्बल गार्डन स्थापित किए जाएंगे, उनको अगले चार साल तक पौधों की देखभाल करने के लिए 7 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। सरकार द्वारा कुल 32 हजार की सहायता राशि दी जाएगी, इसमें 25 हजार रुपये पौध खरीद के लिए और 7 हजार रुपये रखरखाव के लिए शामिल होंगे। सरकारी विद्यालयों में बनने वाले हर्बल गार्डन 500 वर्ग मीटर में स्थापित किए जाएंगे। इनमें करीब 15 प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। विद्यालय हर्बल गार्डन में सिंचाई व रखरखाव की जिम्मेदारी विद्यार्थियों सहित शिक्षक व सामाजिक संगठनों की होगी।
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रोगों को ठीक करने में पौधे होंगे उपयोगी
निदेशालय की ओर से जारी किए गए पत्र में लिखा है कि यह औषधीय पौधे रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन में अहम भूमिका निभाएंगे तथा रोगों को ठीक करने में भी उपयोगी होंगे। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इससे पहले शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में किचन गार्डन बनाए थे, ताकि विद्यालय में ही बच्चों को रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध हो सकें।
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2020 में राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड की स्थापना की गई
औषधीय पौधों के क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की तरफ से 2020 में राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड की स्थापना भी की गई थी। यह बोर्ड वर्तमान में आयुष मंत्रालय भारत सरकार के एक अनुभाग के रूप में कार्य कर रहा है। आयुष विभाग की तरफ से हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल, विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सरकारी विद्यालयों से हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए आवेदन मांगे हैं।
शिक्षा निदेशालय ने सभी विद्यालय मुखियाओं को दिशा निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव आयुष विभाग को भेजने के बारे में निर्देशित करने के लिए पत्र जारी किया है, ताकि विभाग द्वारा विद्यालयों को हर्बल गार्डन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।
डॉ. अशोक नामवाल, डीएमएस रेवाड़ी।