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Rewari News: जलनिकासी न होने से खेतों में पानी भरा, किसानों में गुस्सा
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फोटो : 10खेत में हुआ जलभराव। संवाद
कोसली। जलनिकासी नहीं होने के चलते खेतों में पानी भरा है और किसानों में गुस्सा है। जिले के 35 से अधिक गांवों में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण खरीफ फसलें कपास और बाजरा बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अभी भी कई गांव में जलभराव है। हजारों एकड़ में खड़ी फसलें जलभराव के कारण नष्ट हो चुकी हैं। इस नुकसान से किसान बेहद परेशान हैं।
खास तौर पर जाटूसाना, खोल और नाहड़ ब्लॉक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। कृषि विभाग की तरफ से फील्ड सर्वे के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी जा चुकी है ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत पहुंचाई जा सके।
जाटूसाना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लाला, सुम्मा खेड़ा रोजहुवास, रोहड़ाई, खेड़ा आलमपुर, पाल्हावास, पजंरवास, चांग, सैदपुर, चांदनवास, बस्तोड़ा, जिवडा, गोपालपुर गाजी, करावरा मनकपुर गांवों में कपास की फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
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इसी प्रकार नाहड़ ब्लॉक के बहाला, बिसवा, लुखी, अहमदपुर पर्टाल, बब्बा, नेहरूगढ़ और करौली गांवों में भी फसलें भारी मात्रा में खराब हुई हैं। वहीं, खोल ब्लॉक के नागल जमालपुर, कोलाना, प्रानपुरा और निमोठ गांवों में भी किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
मानसून कहर बनकर टूटा
गांव बव्वा, रतनथल, बास और मलेसियावास के किसानों पर इस बार मानसून कहर बनकर टूटा है। इन गांवों की 1 हजार एकड़ जमीन पर खड़ी फसलें भारी बारिश के पानी में पूरी तरह डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस और समय रहते कदम नहीं उठाया गया जिससे अब अगली फसल की बुआई पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
किसान राजेश, रामपाल व विकास का कहना है कि खेतों में पानी जमा है और प्रशासन उसे निकालने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। पानी की निकासी के लिए सरकार ने करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर मोटरें लगवाई थीं लेकिन वे भी सिर्फ कागजों में समाधान साबित हुई हैं।
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जितना पानी निकलता है, उससे ज्यादा हर बारिश में भर रहा
गांव रतनथल और बास के किसान राजविजय तंवर ने बताया कि उनके गांवों में मोटरों के जरिये पानी निकालने के लिए दो करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन ये मोटरें पर्याप्त नहीं हैं। जितना पानी निकलता है उससे ज्यादा हर बारिश में फिर भर जाता है। हमारी बाजरा, ग्वार, कपास जैसी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और अब सरसों, गेहूं जैसी रबी फसलों की बुआई भी खतरे में है।
किसानों ने मांग की है कि सरकार खेतों से पानी की निकासी के स्थाई समाधान के साथ-साथ प्रति एकड़ 50 हजार का मुआवजा मिले, ताकि किसान अपनी बर्बाद फसल के नुकसान से उबर सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।
वर्जन:
बारिश की अधिकता के कारण जितना पानी निकाला जाता है, उससे अधिक भर जाता है। फिर भी प्रयास किए जा रहे हैं कि कम से कम अगली फसल की बुआई समय पर हो सके। -अनिल यादव, बीडीपीओ
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खास तौर पर जाटूसाना, खोल और नाहड़ ब्लॉक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। कृषि विभाग की तरफ से फील्ड सर्वे के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी जा चुकी है ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत पहुंचाई जा सके।
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जाटूसाना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लाला, सुम्मा खेड़ा रोजहुवास, रोहड़ाई, खेड़ा आलमपुर, पाल्हावास, पजंरवास, चांग, सैदपुर, चांदनवास, बस्तोड़ा, जिवडा, गोपालपुर गाजी, करावरा मनकपुर गांवों में कपास की फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
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इसी प्रकार नाहड़ ब्लॉक के बहाला, बिसवा, लुखी, अहमदपुर पर्टाल, बब्बा, नेहरूगढ़ और करौली गांवों में भी फसलें भारी मात्रा में खराब हुई हैं। वहीं, खोल ब्लॉक के नागल जमालपुर, कोलाना, प्रानपुरा और निमोठ गांवों में भी किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
मानसून कहर बनकर टूटा
गांव बव्वा, रतनथल, बास और मलेसियावास के किसानों पर इस बार मानसून कहर बनकर टूटा है। इन गांवों की 1 हजार एकड़ जमीन पर खड़ी फसलें भारी बारिश के पानी में पूरी तरह डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस और समय रहते कदम नहीं उठाया गया जिससे अब अगली फसल की बुआई पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
किसान राजेश, रामपाल व विकास का कहना है कि खेतों में पानी जमा है और प्रशासन उसे निकालने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। पानी की निकासी के लिए सरकार ने करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर मोटरें लगवाई थीं लेकिन वे भी सिर्फ कागजों में समाधान साबित हुई हैं।
जितना पानी निकलता है, उससे ज्यादा हर बारिश में भर रहा
गांव रतनथल और बास के किसान राजविजय तंवर ने बताया कि उनके गांवों में मोटरों के जरिये पानी निकालने के लिए दो करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन ये मोटरें पर्याप्त नहीं हैं। जितना पानी निकलता है उससे ज्यादा हर बारिश में फिर भर जाता है। हमारी बाजरा, ग्वार, कपास जैसी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और अब सरसों, गेहूं जैसी रबी फसलों की बुआई भी खतरे में है।
किसानों ने मांग की है कि सरकार खेतों से पानी की निकासी के स्थाई समाधान के साथ-साथ प्रति एकड़ 50 हजार का मुआवजा मिले, ताकि किसान अपनी बर्बाद फसल के नुकसान से उबर सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।
वर्जन:
बारिश की अधिकता के कारण जितना पानी निकाला जाता है, उससे अधिक भर जाता है। फिर भी प्रयास किए जा रहे हैं कि कम से कम अगली फसल की बुआई समय पर हो सके। -अनिल यादव, बीडीपीओ