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Rewari News: 11 में से 9 कॉलेजों में डीपीई का पद खाली
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रेवाड़ी। कोसली स्थित राजकीय महाविद्यालय। संवाद
रेवाड़ी। जिले के 11 राजकीय कॉलेजों में से 9 कॉलेजों में काफी वर्षों से शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता (डीपीई) के पद खाली हैं। इससे कॉलेजों में नियमित खेल गतिविधियां भी नहीं हो पा रही हैं। इस वजह से खेलों में भी कॉलेजों के विद्याथीZ खेलों में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं।
बताया जाता है कि डीपीई के अभाव में कॉलेजों में खेल मैदानों की हालत भी दयनीय हो गई है। कुछ जगह ही मैदानों की दशा ठीक है। अन्य जगह सिर्फ खेल गतिविधियां कराए जाने के समय ही मैदानों को दुरुस्त किया जाता है। जिन विद्यार्थियों की खेलों में रुचि है, उनको डीपीई न होने से बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में रोष है।
जिले में 11 कॉलेजों में केवल राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा और राजकीय महिला महाविद्यालय सेक्टर-18 रेवाड़ी में ही शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता कार्यरत हैं। पाली कॉलेज, नाहड़, कंवाली, गुरावड़ा, जाटूसाना, बावल राजकीय कॉलेज और महिला कॉलेज बावल, रेवाड़ी राजकीय कॉलेज व कोसली राजकीय कॉलेज में लंबे समय से डीपीई का पद रिक्त है। नियमानुसार 500 विद्यार्थियों पर एक डीपीई की पोस्ट स्वीकृत होनी जरूरी है।
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नाम नहीं छापने की शर्त पर विद्यार्थियों का कहना है कि डीपीई के न होने से खेल मैदानों की हालत भी खराब है। जब कोई खेल गतिविधि होती हैं, तब ही मैदान को सुधारा जाता है। अगर डीपीई हो तो नियमित खेल गतिविधि के साथ ही कॉलेजों के विद्यार्थी भी पदक जीत सकते हैं। साथ ही यूनिवर्सिटी लेवल पर भी प्रतिभागिता बढ़ सकती है। कॉलेजों के विद्यार्थियों का कहना है कि सालभर में केवल दो दिन खेलकूद प्रतियोगिता कराकर कार्य पूरा कर दिया जाता है। इसके बाद पूरे वर्ष खेलकूद गतिविधियों से वंचित रहना पड़ता है।
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इंसेट
कॉलेजों से निकल सकते हैं अच्छे खिलाड़ी
खेल जानकारों के अनुसार कॉलेजों में डीपीई का पद भरा हो तो हर रोज खेल गतिविधियां कराई जा सकती हैं। कॉलेज से यूनिवर्सिटी हो या अन्य जगह सहभागिता ज्यादा हो सकती है। विद्यार्थी शारीरिक रूप से फिट रहेंगे। सालभर में समय-समय पर गतिविधियां होती रहेंगी। इस वजह से खेलों में अच्छे खिलाड़ी निकल सकते हैं।
विद्यार्थी बोले: खेल मैदान तक खराब पड़े, डीपीई हो तो सुधरे हालात:
वर्जन:
रेवाड़ी कन्या महाविद्यालय और खरखड़ा कॉलेज में डीपीई के पद भरे हैं। यदि इनकी ड्यूटी हर कॉलेजों में दो दिनों की निर्धारित कर दी जाए तो वहां के विद्यार्थियों को खेलकूद गतिविधियों से वंचित रहना नहीं पड़ेगा। डीपीई के पदों को भरने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र भी लिख चुके हैं।- डॉ. सुधीर यादव, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय कोसली
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बताया जाता है कि डीपीई के अभाव में कॉलेजों में खेल मैदानों की हालत भी दयनीय हो गई है। कुछ जगह ही मैदानों की दशा ठीक है। अन्य जगह सिर्फ खेल गतिविधियां कराए जाने के समय ही मैदानों को दुरुस्त किया जाता है। जिन विद्यार्थियों की खेलों में रुचि है, उनको डीपीई न होने से बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में रोष है।
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जिले में 11 कॉलेजों में केवल राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा और राजकीय महिला महाविद्यालय सेक्टर-18 रेवाड़ी में ही शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता कार्यरत हैं। पाली कॉलेज, नाहड़, कंवाली, गुरावड़ा, जाटूसाना, बावल राजकीय कॉलेज और महिला कॉलेज बावल, रेवाड़ी राजकीय कॉलेज व कोसली राजकीय कॉलेज में लंबे समय से डीपीई का पद रिक्त है। नियमानुसार 500 विद्यार्थियों पर एक डीपीई की पोस्ट स्वीकृत होनी जरूरी है।
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नाम नहीं छापने की शर्त पर विद्यार्थियों का कहना है कि डीपीई के न होने से खेल मैदानों की हालत भी खराब है। जब कोई खेल गतिविधि होती हैं, तब ही मैदान को सुधारा जाता है। अगर डीपीई हो तो नियमित खेल गतिविधि के साथ ही कॉलेजों के विद्यार्थी भी पदक जीत सकते हैं। साथ ही यूनिवर्सिटी लेवल पर भी प्रतिभागिता बढ़ सकती है। कॉलेजों के विद्यार्थियों का कहना है कि सालभर में केवल दो दिन खेलकूद प्रतियोगिता कराकर कार्य पूरा कर दिया जाता है। इसके बाद पूरे वर्ष खेलकूद गतिविधियों से वंचित रहना पड़ता है।
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कॉलेजों से निकल सकते हैं अच्छे खिलाड़ी
खेल जानकारों के अनुसार कॉलेजों में डीपीई का पद भरा हो तो हर रोज खेल गतिविधियां कराई जा सकती हैं। कॉलेज से यूनिवर्सिटी हो या अन्य जगह सहभागिता ज्यादा हो सकती है। विद्यार्थी शारीरिक रूप से फिट रहेंगे। सालभर में समय-समय पर गतिविधियां होती रहेंगी। इस वजह से खेलों में अच्छे खिलाड़ी निकल सकते हैं।
विद्यार्थी बोले: खेल मैदान तक खराब पड़े, डीपीई हो तो सुधरे हालात:
वर्जन:
रेवाड़ी कन्या महाविद्यालय और खरखड़ा कॉलेज में डीपीई के पद भरे हैं। यदि इनकी ड्यूटी हर कॉलेजों में दो दिनों की निर्धारित कर दी जाए तो वहां के विद्यार्थियों को खेलकूद गतिविधियों से वंचित रहना नहीं पड़ेगा। डीपीई के पदों को भरने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र भी लिख चुके हैं।- डॉ. सुधीर यादव, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय कोसली