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पटरी से उतरी डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था, लोग परेशान
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जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में पहुंचे शहर के पार्षद व कार्यकारी अभियंता।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। शहर के 31 वार्डों के 30 हजार से अधिक घरों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठान करने की व्यवस्था पटरी से उतरी दिख रही है। वाहन चालक कभी भी छुट्टी कर लेते हैं। इसके अलावा उनके मनमाने समय पर पहुंचने से शहरवासी कचरा नहीं डाल पा रहे हैं।
इसके अलावा बारिश के चलते सीवर ओवरफ्लो होने और सड़कों पर कई दिनों बाद सफाई कर्मचारी पहुंचने के चलते लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मच्छर ज्यादा होने से बीमारियां होने की आशंका भी बढ़ गई है। सीवर ओवरफ्लो होने से शहर में कई जगह पानी भरा हुआ है। इसको लेकर शुक्रवार को पार्षद जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता से भी मिले हैं।
सूखा व गीला कचरा भी नहीं हो रहा अलग-अलग
दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित रामसिंहपुरा गांव की 14.6 एकड़ जमीन कूड़ा निस्तारण संयंत्र के लिए निर्धारित की गई थी। बीते 4 साल से यहां पर कचरा भी डाला जा रहा है। यहां कचरा पहाड़ का रूप लेता जा रहा है। लेकिन सिस्टम ऐसा है कि यहां पर आज तक कचरा निस्तारण व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सकी है। नगर परिषद की ओर से दिए गए टेंडर के तहत कचरा कलेक्शन की गाड़ी में गीला व सूखा कचरा डालने की अलग से व्यवस्था की गई थी। लेकिन एजेंसी ने गाड़ी पर चालक के अलावा सहायक को नियुक्त नहीं किया। चालक भी गाड़ी से उतरकर नीचे नहीं आता और लोग गीला व सूखा कचरा एक ही जगह डाल देते हैं। इसके चलते भू-जल से लेकर जिले की हवा खराब हो रही है।
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टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले उठान का था दावा
नगर परिषद की ओर से नया टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले शहर के सभी घरों से कचरा उठाने का दावा किया गया था। लेकिन आज तक इसकी व्यवस्था नहीं बन पाई है। जनवरी में नप चेयरमैन की शपथ लेने के बाद पहली ही बैठक में सफाई कर्मचारियों की कमी व सीवर ओवरफ्लो होना प्रमुख मुद्दा रहा था। लेकिन 6 माह बीत जाने के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिख रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बारिश के दिनों में शहर की गलियों में निकलना तक मुश्किल है। पार्षद के घरों तक सिमटी सफाई व्यवस्था
शहर में सफाई के लिए करीब 370 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जबकि आबादी के हिसाब से 500 से अधिक की जरूरत है। नप अधिकारी मानते हैं कि इन दिनों एक-एक कर्मचारी पांच के बराबर काम कर रहा है। लेकिन कहां पर कार्य होता है नहीं दिखाई देता। लोगों का आरोप है कि पार्षदों के घरों के आसपास की सफाई व अन्य गलियों में सफाई में अंतर देखा जा सकता है। जो भी पार्षद बनता है सफाई कर्मचारी उसकी गली में शिफ्ट हो जाते हैं। बता दें कि शहर की कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर महीनों तक सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं।
मुख्य सफाई निरीक्षक, रेवाड़ी संदीप सिंह ने बताया कि सुबह पांच बजे डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रवाना किया जाता है। सभी गाड़ियों में जीपीएस लगाया हुआ है। यदि इस तरह की लापरवाही है तो कार्रवाई की जाएगी। सूखा व गीला कचरा लोगों को भी अलग-अलग डालना चाहिए। बारिश के चलते एक-एक कर्मचारी 7 के बराबर काम कर रहे हैं। बारिश के चलते कुछ परेशानी हुई है, इसको दुरुस्त किया जाएगा। कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है।
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इसके अलावा बारिश के चलते सीवर ओवरफ्लो होने और सड़कों पर कई दिनों बाद सफाई कर्मचारी पहुंचने के चलते लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मच्छर ज्यादा होने से बीमारियां होने की आशंका भी बढ़ गई है। सीवर ओवरफ्लो होने से शहर में कई जगह पानी भरा हुआ है। इसको लेकर शुक्रवार को पार्षद जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता से भी मिले हैं।
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सूखा व गीला कचरा भी नहीं हो रहा अलग-अलग
दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित रामसिंहपुरा गांव की 14.6 एकड़ जमीन कूड़ा निस्तारण संयंत्र के लिए निर्धारित की गई थी। बीते 4 साल से यहां पर कचरा भी डाला जा रहा है। यहां कचरा पहाड़ का रूप लेता जा रहा है। लेकिन सिस्टम ऐसा है कि यहां पर आज तक कचरा निस्तारण व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सकी है। नगर परिषद की ओर से दिए गए टेंडर के तहत कचरा कलेक्शन की गाड़ी में गीला व सूखा कचरा डालने की अलग से व्यवस्था की गई थी। लेकिन एजेंसी ने गाड़ी पर चालक के अलावा सहायक को नियुक्त नहीं किया। चालक भी गाड़ी से उतरकर नीचे नहीं आता और लोग गीला व सूखा कचरा एक ही जगह डाल देते हैं। इसके चलते भू-जल से लेकर जिले की हवा खराब हो रही है।
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टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले उठान का था दावा
नगर परिषद की ओर से नया टेंडर देकर सुबह 11 बजे से पहले शहर के सभी घरों से कचरा उठाने का दावा किया गया था। लेकिन आज तक इसकी व्यवस्था नहीं बन पाई है। जनवरी में नप चेयरमैन की शपथ लेने के बाद पहली ही बैठक में सफाई कर्मचारियों की कमी व सीवर ओवरफ्लो होना प्रमुख मुद्दा रहा था। लेकिन 6 माह बीत जाने के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिख रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बारिश के दिनों में शहर की गलियों में निकलना तक मुश्किल है। पार्षद के घरों तक सिमटी सफाई व्यवस्था
शहर में सफाई के लिए करीब 370 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जबकि आबादी के हिसाब से 500 से अधिक की जरूरत है। नप अधिकारी मानते हैं कि इन दिनों एक-एक कर्मचारी पांच के बराबर काम कर रहा है। लेकिन कहां पर कार्य होता है नहीं दिखाई देता। लोगों का आरोप है कि पार्षदों के घरों के आसपास की सफाई व अन्य गलियों में सफाई में अंतर देखा जा सकता है। जो भी पार्षद बनता है सफाई कर्मचारी उसकी गली में शिफ्ट हो जाते हैं। बता दें कि शहर की कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर महीनों तक सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं।
मुख्य सफाई निरीक्षक, रेवाड़ी संदीप सिंह ने बताया कि सुबह पांच बजे डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाड़ियों को रवाना किया जाता है। सभी गाड़ियों में जीपीएस लगाया हुआ है। यदि इस तरह की लापरवाही है तो कार्रवाई की जाएगी। सूखा व गीला कचरा लोगों को भी अलग-अलग डालना चाहिए। बारिश के चलते एक-एक कर्मचारी 7 के बराबर काम कर रहे हैं। बारिश के चलते कुछ परेशानी हुई है, इसको दुरुस्त किया जाएगा। कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है।