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Rewari News: चार साल से नहीं मिली डीएनए रिपोर्ट, दुष्कर्म के आरोपी को मिली जमानत
Sun, 12 Oct 2025 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 12 Oct 2025 01:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दुष्कर्म के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल की अदालत ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश के एक आरोपी की नियमित जमानत याचिका मंजूर की है। इस मामले में चार साल से डीएनए रिपोर्ट नहीं मिली थी। दुष्कर्म और अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियम के तहत वर्ष 2021 में रेवाड़ी में मामला दर्ज हुआ था।
कोर्ट में आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि मुकदमे का निपटान अभी लंबित है और आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में रखने का कोई सार्थक उद्देश्य नहीं होगा। इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। पीड़ित पक्ष की तरफ से तर्क दिया गया कि एफएसएल रिपोर्ट सकारात्मक है और डीएनए रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि अभियुक्त की पहली और दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं लेकिन तब तक महत्वपूर्ण गवाहों की जांच पूरी नहीं हुई थी। अब सभी महत्वपूर्ण गवाहों की जांच हो चुकी है। मुकदमे का निपटान अभी लंबित है और आरोपी 2021 से हिरासत में है। चूंकि डीएनए रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, जबकि 4 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है,
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इस आधार पर अदालत ने परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए आरोपी को नियमित जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अंतिम निर्णय के समय पीड़िता के बयानों और डीएनए रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान आरोपी को जांच में सहयोग देना होगा और न्यायालय के निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।
ये था पूरा मामला
घटना मार्च 2021 में हुई थी। मध्य प्रदेश की निवासी पीड़िता रेवाड़ी के एक गांव में किराये के कमरे में अपने पति के साथ रहती थी। आरोप है कि आरोपी में महिला के साथ दुष्कर्म किया। उस दौरान महिला का पति घर पर नहीं था। आरोपी की गिरफ्तारी जुलाई 2021 को हुई थी। डीएनए रिपोर्ट की प्रतीक्षा थी। जांच पूरी होने पर अभियुक्त के खिलाफ चालान अदालत में प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक जमानत याचिकाएं सितंबर 2022 और जुलाई 2024 को खारिज की गई थीं। आरोपी रेवाड़ी में कार्य करने के लिए आया था।
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रेवाड़ी। दुष्कर्म के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल की अदालत ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश के एक आरोपी की नियमित जमानत याचिका मंजूर की है। इस मामले में चार साल से डीएनए रिपोर्ट नहीं मिली थी। दुष्कर्म और अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियम के तहत वर्ष 2021 में रेवाड़ी में मामला दर्ज हुआ था।
कोर्ट में आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि मुकदमे का निपटान अभी लंबित है और आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में रखने का कोई सार्थक उद्देश्य नहीं होगा। इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। पीड़ित पक्ष की तरफ से तर्क दिया गया कि एफएसएल रिपोर्ट सकारात्मक है और डीएनए रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
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अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि अभियुक्त की पहली और दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं लेकिन तब तक महत्वपूर्ण गवाहों की जांच पूरी नहीं हुई थी। अब सभी महत्वपूर्ण गवाहों की जांच हो चुकी है। मुकदमे का निपटान अभी लंबित है और आरोपी 2021 से हिरासत में है। चूंकि डीएनए रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, जबकि 4 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है,
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इस आधार पर अदालत ने परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए आरोपी को नियमित जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अंतिम निर्णय के समय पीड़िता के बयानों और डीएनए रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान आरोपी को जांच में सहयोग देना होगा और न्यायालय के निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।
ये था पूरा मामला
घटना मार्च 2021 में हुई थी। मध्य प्रदेश की निवासी पीड़िता रेवाड़ी के एक गांव में किराये के कमरे में अपने पति के साथ रहती थी। आरोप है कि आरोपी में महिला के साथ दुष्कर्म किया। उस दौरान महिला का पति घर पर नहीं था। आरोपी की गिरफ्तारी जुलाई 2021 को हुई थी। डीएनए रिपोर्ट की प्रतीक्षा थी। जांच पूरी होने पर अभियुक्त के खिलाफ चालान अदालत में प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक जमानत याचिकाएं सितंबर 2022 और जुलाई 2024 को खारिज की गई थीं। आरोपी रेवाड़ी में कार्य करने के लिए आया था।