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खुलासा : अपशिष्ट निपटान नियमों का 169 कंपनियां कर रहीं उल्लंघन, इनसे सीओडी और बीओडी का स्तर 9 गुना बढ़ा
Wed, 04 Dec 2024 11:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:29 PM IST
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शांति नगर स्थित नासियाजी एसटीपी प्लांट।
रेवाड़ी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव बनाम हरियाणा राज्य मामले में औद्योगिक प्रदूषण और जलशोधन से जुड़े मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पीएचईडी की आपत्तियों को रिकॉर्ड में शामिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर 2024 को होगी।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के वकील ने एनजीटी को बताया कि उनकी तरफ से जो आपत्तियां थीं, वह पहले तकनीकी कारणों से रिकॉर्ड में नहीं आ सकी थीं। अब उन्हें रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। विभाग ने एनजीटी को बताया कि जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को एसटीपी की गुणवत्ता और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए अध्ययन कराया था। जिससे पता चला कि औद्योगिक इकाइयां घरेलू सीवरेज में अपशिष्ट मिला रही हैं, जिससे एसटीपी की कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार विभाग की तरफ से उन 169 औद्योगिक इकाइयों की सूची हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी है, जिन पर अपशिष्ट निपटान नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। सभी एसटीपी में अतिरिक्त क्लोरीनेशन यूनिट स्थापित की गईं हैं ताकि अंतिम डिस्पोजल से पहले पानी को सुरक्षित बनाया जा सके। रेवाड़ी के कालूवास एसटीपी को 6.5 एमएलडी से 10 एमएलडी क्षमता में अपग्रेड किया जा रहा है।
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औद्योगिक अपशिष्ट के कारण एसटीपी की कार्य क्षमता हुई प्रभावित
बता दें कि रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा में औद्योगिक इकाइयां बड़ी संख्या में घरेलू सीवरेज नेटवर्क के पास स्थित हैं। ये इकाइयां बिना किसी अनुमति के अपना अपशिष्ट एसटीपी में छोड़ रही हैं। जबकि एसटीपी केवल घरेलू सीवरेज के लिए डिजाइन किए गए हैं। ऐसे में औद्योगिक अपशिष्ट के कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
साहबी बैराज में दूषित पानी छोड़ने से जुड़ा है पूरा मामला
बता दें कि यह पूरा मामला साहबी बैराज में एसटीपी के पानी छोड़ने से जुड़ा हुआ है। मामले में सामाजिक कार्यकर्ता खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने जिले के 6 एसटीपी द्वारा शोधित किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि यह पानी काफी गंदा है। जलशोधम में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण साहबी बैराज का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। उसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने जब एसटीपी के गुणवत्ता की जांच की तो पता चला कि यह काफी गंदा है। अब मामले में विभाग ने अपना बचाव करते हुए 169 औद्योगिक इकाइयां पर गंदा पानी छोड़ने का आरोप लगाया है।
याचिकाकर्ता बोला- प्रदूषण नियंत्रण के लिए मामला अहम मोड़ पर पहुंच चुका
याचिकाकर्ता यादव ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग और एचएसपीसीबी की जिम्मेदारी है कि वे औद्योगिक इकाइयों के अनधिकृत अपशिष्ट निपटान को रोकें। एनजीटी से यह उम्मीद है कि वह दोषी इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी करेगा। करीब 3 साल से मामला एनजीटी में चल रहा है।
रिपोर्ट में खुलासा- औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी और बीओडी का स्तर 9 गुना अधिक
रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू सीवरेज के मुकाबले औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) के स्तर 9 गुना तक अधिक थे। औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित 5 मुख्य स्थानों पर जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई है। एसटीपी के आउटलेट्स पर पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रहीं।
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एनजीटी ने इन एसटीपी की जांच के दिए थे निर्देश
खरखड़ा:: 9.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
धारूहेड़ा :: 5 एमएलडी एसटीपी:: (एचएसवीपी)
नासियाजी रोड ::16 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
नासियाजी रोड :: 8 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
कालूवास ::: 6.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
बावल ::: 3.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
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विभाग की तरफ से रिपोर्ट एनजीटी को सबमिट कर दी गई है। 169 औद्योगिक इकाइयों को विभाग ने चिन्हित किया है। यह औद्योगिक इकाइयां हमारे सीवरेज सिस्टम में पानी डाल रही हैं, जबकि विभाग संशोधित सिस्टम औद्योगिक इकाइयों के लिए नहीं बना है। इसकी जांच के लिए सूची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी है।
-विनय चौहान, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी।
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जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के वकील ने एनजीटी को बताया कि उनकी तरफ से जो आपत्तियां थीं, वह पहले तकनीकी कारणों से रिकॉर्ड में नहीं आ सकी थीं। अब उन्हें रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। विभाग ने एनजीटी को बताया कि जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को एसटीपी की गुणवत्ता और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए अध्ययन कराया था। जिससे पता चला कि औद्योगिक इकाइयां घरेलू सीवरेज में अपशिष्ट मिला रही हैं, जिससे एसटीपी की कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है।
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रिपोर्ट के अनुसार विभाग की तरफ से उन 169 औद्योगिक इकाइयों की सूची हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी है, जिन पर अपशिष्ट निपटान नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। सभी एसटीपी में अतिरिक्त क्लोरीनेशन यूनिट स्थापित की गईं हैं ताकि अंतिम डिस्पोजल से पहले पानी को सुरक्षित बनाया जा सके। रेवाड़ी के कालूवास एसटीपी को 6.5 एमएलडी से 10 एमएलडी क्षमता में अपग्रेड किया जा रहा है।
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औद्योगिक अपशिष्ट के कारण एसटीपी की कार्य क्षमता हुई प्रभावित
बता दें कि रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा में औद्योगिक इकाइयां बड़ी संख्या में घरेलू सीवरेज नेटवर्क के पास स्थित हैं। ये इकाइयां बिना किसी अनुमति के अपना अपशिष्ट एसटीपी में छोड़ रही हैं। जबकि एसटीपी केवल घरेलू सीवरेज के लिए डिजाइन किए गए हैं। ऐसे में औद्योगिक अपशिष्ट के कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
साहबी बैराज में दूषित पानी छोड़ने से जुड़ा है पूरा मामला
बता दें कि यह पूरा मामला साहबी बैराज में एसटीपी के पानी छोड़ने से जुड़ा हुआ है। मामले में सामाजिक कार्यकर्ता खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने जिले के 6 एसटीपी द्वारा शोधित किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि यह पानी काफी गंदा है। जलशोधम में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण साहबी बैराज का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। उसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने जब एसटीपी के गुणवत्ता की जांच की तो पता चला कि यह काफी गंदा है। अब मामले में विभाग ने अपना बचाव करते हुए 169 औद्योगिक इकाइयां पर गंदा पानी छोड़ने का आरोप लगाया है।
याचिकाकर्ता बोला- प्रदूषण नियंत्रण के लिए मामला अहम मोड़ पर पहुंच चुका
याचिकाकर्ता यादव ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग और एचएसपीसीबी की जिम्मेदारी है कि वे औद्योगिक इकाइयों के अनधिकृत अपशिष्ट निपटान को रोकें। एनजीटी से यह उम्मीद है कि वह दोषी इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी करेगा। करीब 3 साल से मामला एनजीटी में चल रहा है।
रिपोर्ट में खुलासा- औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी और बीओडी का स्तर 9 गुना अधिक
रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू सीवरेज के मुकाबले औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) के स्तर 9 गुना तक अधिक थे। औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित 5 मुख्य स्थानों पर जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई है। एसटीपी के आउटलेट्स पर पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रहीं।
एनजीटी ने इन एसटीपी की जांच के दिए थे निर्देश
खरखड़ा:: 9.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
धारूहेड़ा :: 5 एमएलडी एसटीपी:: (एचएसवीपी)
नासियाजी रोड ::16 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
नासियाजी रोड :: 8 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
कालूवास ::: 6.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
बावल ::: 3.5 एमएलडी एसटीपी:: (पीएचईडी)
विभाग की तरफ से रिपोर्ट एनजीटी को सबमिट कर दी गई है। 169 औद्योगिक इकाइयों को विभाग ने चिन्हित किया है। यह औद्योगिक इकाइयां हमारे सीवरेज सिस्टम में पानी डाल रही हैं, जबकि विभाग संशोधित सिस्टम औद्योगिक इकाइयों के लिए नहीं बना है। इसकी जांच के लिए सूची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी है।
-विनय चौहान, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी।