{"_id":"688911ea029270aa9f034619","slug":"dipesh-murder-case-main-witness-turned-hostile-in-court-accused-not-identified-as-attacker-rewari-news-c-198-1-rew1001-223340-2025-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"दीपेश हत्याकांड : कोर्ट में मुख्य गवाह मुकरे, अभियुक्त की हमलावर के रूप में नहीं हुई पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दीपेश हत्याकांड : कोर्ट में मुख्य गवाह मुकरे, अभियुक्त की हमलावर के रूप में नहीं हुई पहचान
विज्ञापन
रेवाड़ी। एडिशन सेशन जज नरेंद्र पाल की अदालत ने दीपेश की हत्या के आरोप में गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका गवाहों के मुकरने के बाद मंजूर कर ली है। आरोपी विशाल उर्फ कालू ने चौथी बार जमानत याचिका लगाई थी।
दोनों पक्षों की दलीलों पर गंभीरता से विचार करने के बाद न्यायालय ने कहा कि इस मामले के सभी महत्वपूर्ण गवाह जो मृतक के करीबी रिश्तेदार थे, पहले ही मुकर चुके हैं और उन्होंने वर्तमान अभियुक्त की हमलावर के रूप में पहचान नहीं की थी। सह अभियुक्त भूपेंद्र के खिलाफ गंभीर और संगीन आरोप लगाए गए थे, अब हाईकोर्ट ने उसकी नियमित जमानत पर स्वीकार कर ली है।
अभियोजन पक्ष का पूरा मामला अब परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। इसलिए, यह ध्यान में रखते हुए कि सह अभियुक्त भूपेंद्र को पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा जमानत पर स्वीकार कर लिया गया है और वर्तमान अभियुक्त ने समानता का दावा किया है, जब अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाह मुकर गए हैं, नियमित जमानत दी जा सकती है। अभियुक्त विशाल उर्फ कालू की जमानत याचिका 1 लाख रुपये के व्यक्तिगत जमानत बांड और उतनी ही राशि के एक जमानतदार के प्रस्तुत करने की शर्त पर स्वीकार की जाती है।
विज्ञापन
26 अक्टूबर 2022 को मिला था दीपेश का शव
26 अक्टूबर 2022 को टीपी बाईपास रोड के पास दीपेश उर्फ छोटू का शव मिला था। परिवार के सदस्यों ने मनोज कुमार के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि उनके मृतक बड़े भाई नरेश के दो बेटे प्रिंस और दीपेश उर्फ छोटू हैं। 25 अक्टूबर 2022 की शाम को दीपेश घर से गया था और उसे उसके बड़े भाई प्रिंस ने भूपेंद्र उर्फ काका के साथ देखा था और फिर दीपेश को घर लौटने को कहा था लेकिन काफी देर होने के बावजूद वह घर नहीं लौटा।
प्रिंस के सोते समय पुलिस ने सुबह 8 बजे सूचना दी कि काली माता मंदिर से सनसिटी बाई पास की ओर जाने वाली सड़क पर दीपेश का शव मिला है और उन्होंने शव की पहचान कर ली, जिस पर कई चोटें हैं और उन्हें पूरी आशंका है कि दीपेश की हत्या भूपेंद्र उर्फ काका ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचकर की है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
-- -- -- -- -- -- -- --
आरोपियों ने सबूतों को मिटाने की की थी कोशिश
पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि उन्होनें आरोपी भूपेंद्र उर्फ काका को गिरफ्तार किया था, जिसने अपना बयान दिया और अपराध में शामिल सह-अभियुक्त विशाल उर्फ कालू का नाम बताया और विशाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों आरोपियों ने उस जगह को चिह्नित किया जहां उन्होंने मृतक की हत्या की थी और साथ ही उस जगह का भी जहां उन्होंने शव को फेंका था।
अपराध करने में इस्तेमाल की गई लाठी और स्कूटी बरामद कर ली गई थी। आरोपियों ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी इसलिए धारा 201 आईपीसी जोड़ी गई थी। मृतक और आरोपी के मोबाइल फोन के कॉल विवरण प्राप्त किए गए और फिर यह पता चला था कि उन्होंने प्रासंगिक समय पर एक-दूसरे से बात की थी।
महत्वपूर्ण गवाह पहले ही मुकर चुके
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाह पहले ही मुकर चुके हैं और उनमें से किसी ने भी अभियुक्त को अपराधी नहीं माना है और अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा उसके खिलाफ कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया है और अब अभियोजन पक्ष का पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी भी पूरी नहीं हुई है।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की दलीलों पर गंभीरता से विचार करने के बाद न्यायालय ने कहा कि इस मामले के सभी महत्वपूर्ण गवाह जो मृतक के करीबी रिश्तेदार थे, पहले ही मुकर चुके हैं और उन्होंने वर्तमान अभियुक्त की हमलावर के रूप में पहचान नहीं की थी। सह अभियुक्त भूपेंद्र के खिलाफ गंभीर और संगीन आरोप लगाए गए थे, अब हाईकोर्ट ने उसकी नियमित जमानत पर स्वीकार कर ली है।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष का पूरा मामला अब परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। इसलिए, यह ध्यान में रखते हुए कि सह अभियुक्त भूपेंद्र को पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा जमानत पर स्वीकार कर लिया गया है और वर्तमान अभियुक्त ने समानता का दावा किया है, जब अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाह मुकर गए हैं, नियमित जमानत दी जा सकती है। अभियुक्त विशाल उर्फ कालू की जमानत याचिका 1 लाख रुपये के व्यक्तिगत जमानत बांड और उतनी ही राशि के एक जमानतदार के प्रस्तुत करने की शर्त पर स्वीकार की जाती है।
विज्ञापन
26 अक्टूबर 2022 को मिला था दीपेश का शव
26 अक्टूबर 2022 को टीपी बाईपास रोड के पास दीपेश उर्फ छोटू का शव मिला था। परिवार के सदस्यों ने मनोज कुमार के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि उनके मृतक बड़े भाई नरेश के दो बेटे प्रिंस और दीपेश उर्फ छोटू हैं। 25 अक्टूबर 2022 की शाम को दीपेश घर से गया था और उसे उसके बड़े भाई प्रिंस ने भूपेंद्र उर्फ काका के साथ देखा था और फिर दीपेश को घर लौटने को कहा था लेकिन काफी देर होने के बावजूद वह घर नहीं लौटा।
प्रिंस के सोते समय पुलिस ने सुबह 8 बजे सूचना दी कि काली माता मंदिर से सनसिटी बाई पास की ओर जाने वाली सड़क पर दीपेश का शव मिला है और उन्होंने शव की पहचान कर ली, जिस पर कई चोटें हैं और उन्हें पूरी आशंका है कि दीपेश की हत्या भूपेंद्र उर्फ काका ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचकर की है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
आरोपियों ने सबूतों को मिटाने की की थी कोशिश
पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि उन्होनें आरोपी भूपेंद्र उर्फ काका को गिरफ्तार किया था, जिसने अपना बयान दिया और अपराध में शामिल सह-अभियुक्त विशाल उर्फ कालू का नाम बताया और विशाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों आरोपियों ने उस जगह को चिह्नित किया जहां उन्होंने मृतक की हत्या की थी और साथ ही उस जगह का भी जहां उन्होंने शव को फेंका था।
अपराध करने में इस्तेमाल की गई लाठी और स्कूटी बरामद कर ली गई थी। आरोपियों ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी इसलिए धारा 201 आईपीसी जोड़ी गई थी। मृतक और आरोपी के मोबाइल फोन के कॉल विवरण प्राप्त किए गए और फिर यह पता चला था कि उन्होंने प्रासंगिक समय पर एक-दूसरे से बात की थी।
महत्वपूर्ण गवाह पहले ही मुकर चुके
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाह पहले ही मुकर चुके हैं और उनमें से किसी ने भी अभियुक्त को अपराधी नहीं माना है और अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा उसके खिलाफ कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया है और अब अभियोजन पक्ष का पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी भी पूरी नहीं हुई है।