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Rewari News: बिजली चोरी के मामले में डीएचबीवीएन की अपील मंजूर
Fri, 06 Feb 2026 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:52 PM IST
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अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। बिजली चोरी के आकलन को लेकर दायर दीवानी वाद में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) को बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने डीएचबीवीएन की अपील स्वीकार करते हुए सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की ओर से पारित पूर्व निर्णय को रद्द कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 145 के तहत ऐसे मामलों में दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं बनता।
मामला गांव गोकलगढ़ निवासी राजेंद्र से जुड़ा है, जिनके बिजली कनेक्शन की जांच के बाद विभाग ने एलएल-1 रिपोर्ट के आधार पर 62,334 रुपये का आकलन व 8 हजार रुपये कंपाउंडिंग शुल्क का मेमो जारी किया था।
उपभोक्ता ने विभाग पर गलत तरीके से बिजली चोरी का आरोप लगाने का दावा करते हुए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभागीय मेमो रद्द कर दिए थे।
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इस निर्णय के खिलाफ डीएचबीवीएन ने जिला अदालत में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि बिजली चोरी व अनियमित उपयोग से जुड़े मामलों में आकलन व कार्रवाई विद्युत अधिनियम के तहत विशेष प्रावधानों के अंतर्गत आती है, जिन पर सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
वहीं उपभोक्ता पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराने की दलील दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। बिजली चोरी के आकलन को लेकर दायर दीवानी वाद में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) को बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने डीएचबीवीएन की अपील स्वीकार करते हुए सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की ओर से पारित पूर्व निर्णय को रद्द कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 145 के तहत ऐसे मामलों में दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं बनता।
मामला गांव गोकलगढ़ निवासी राजेंद्र से जुड़ा है, जिनके बिजली कनेक्शन की जांच के बाद विभाग ने एलएल-1 रिपोर्ट के आधार पर 62,334 रुपये का आकलन व 8 हजार रुपये कंपाउंडिंग शुल्क का मेमो जारी किया था।
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उपभोक्ता ने विभाग पर गलत तरीके से बिजली चोरी का आरोप लगाने का दावा करते हुए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभागीय मेमो रद्द कर दिए थे।
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इस निर्णय के खिलाफ डीएचबीवीएन ने जिला अदालत में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि बिजली चोरी व अनियमित उपयोग से जुड़े मामलों में आकलन व कार्रवाई विद्युत अधिनियम के तहत विशेष प्रावधानों के अंतर्गत आती है, जिन पर सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
वहीं उपभोक्ता पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराने की दलील दी।