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धारूहेड़ा वार्ड-16 चुनाव विवाद: विजेता पार्षद को शपथ लेने से नहीं रोका जाएगा
Wed, 10 Jun 2026 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 10 Jun 2026 11:51 PM IST
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रेवाड़ी। धारूहेड़ा नगर पालिका के वार्ड नंबर-16 से महिला पार्षद के चुनाव को लेकर दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमित वर्मा की अदालत ने विजेता प्रत्याशी को शपथ लेने और पद संभालने से रोकने की मांग खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने चुनाव से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और शिकायतों पर नियमानुसार कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता दीपा ने अदालत में दावा किया कि 13 मई को घोषित चुनाव परिणाम में वह मात्र तीन वोटों से हार गई थीं। उनके अनुसार चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने फर्जी मतदान किया, मृत व्यक्ति के नाम पर वोट डाला गया तथा अस्पताल में भर्ती मतदाताओं के नाम पर भी मतदान दर्शाया गया।
दूसरी ओर प्रतिवादियों की ओर से कहा गया कि विजेता प्रत्याशी को शपथ लेने से रोकने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए।
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अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी निर्वाचित उम्मीदवार को केवल आरोपों के आधार पर पद ग्रहण करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी वार्ड या क्षेत्र को प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं रखा जा सकता। यदि चुनाव रद्द कराना है तो याचिकाकर्ता को फर्जी मतदान और प्रतिरूपण के आरोपों को ठोस मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से साबित करना होगा।
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21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई:
हालांकि अदालत ने जनहित को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि चुनाव याचिका लंबित रहने तक विजेता पार्षद वित्तीय मामलों से जुड़े निर्णय लेने से परहेज करें। साथ ही एसडीएम-कम-रिटर्निंग अधिकारी को मतदाता रजिस्टर, मतदान रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और ईवीएम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
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याचिकाकर्ता दीपा ने अदालत में दावा किया कि 13 मई को घोषित चुनाव परिणाम में वह मात्र तीन वोटों से हार गई थीं। उनके अनुसार चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने फर्जी मतदान किया, मृत व्यक्ति के नाम पर वोट डाला गया तथा अस्पताल में भर्ती मतदाताओं के नाम पर भी मतदान दर्शाया गया।
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दूसरी ओर प्रतिवादियों की ओर से कहा गया कि विजेता प्रत्याशी को शपथ लेने से रोकने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए।
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अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी निर्वाचित उम्मीदवार को केवल आरोपों के आधार पर पद ग्रहण करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी वार्ड या क्षेत्र को प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं रखा जा सकता। यदि चुनाव रद्द कराना है तो याचिकाकर्ता को फर्जी मतदान और प्रतिरूपण के आरोपों को ठोस मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से साबित करना होगा।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई:
हालांकि अदालत ने जनहित को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि चुनाव याचिका लंबित रहने तक विजेता पार्षद वित्तीय मामलों से जुड़े निर्णय लेने से परहेज करें। साथ ही एसडीएम-कम-रिटर्निंग अधिकारी को मतदाता रजिस्टर, मतदान रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और ईवीएम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।