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Rewari News: पार्षदों और अधिकारियों की खींचतान में दब गया शहर का विकास
Sun, 02 Apr 2023 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 02 Apr 2023 11:52 PM IST
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नगर परिषद रेवाड़ी।
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेवाड़ी नगरपरिषद में पिछले एक साल के दौरान प्रधान, पार्षदों व अधिकारियों के साथ खींचतान के चलते शहर के विकास कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। हालांकि डोर-टू-डोर कचरा उठान से लेकर स्ट्रीट लाइट, सड़कों के सुधारीकरण सहित अन्य विकास कार्यों के हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास किए गए हैं, लेकिन खींचतान के कारण किसी भी कार्य के टेंडर नहीं हो पाए। गुटबंदी के कारण विकास कार्य कागजों तक ही सिमट गए।
रेवाड़ी नगर परिषद के खाते में करीब 10 करोड़ रुपये हैं, जिनसे शहर में विकास कराना था, लेकिन 31 मार्च 2023 तक यह राशि खर्च ही नहीं हो पाई। बता दें कि नगरपरिषद के चुनावों को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। पहले एक साल शहर के विकास को लेकर प्रधान, उपप्रधान से लेकर पार्षदों ने गंभीरता दिखाई, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया शहर का विकास पीछे छूटता गया। आलम यह है कि शहर के पॉश कहे जाने वाले मॉडल टाउन, सेक्टर 1, सेक्टर 3, सेक्टर 4 आदि में भी सड़कें बदहाल हैं, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्ट्रीट लाइटों के अभाव में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। ऐसा नहीं है कि नगर परिषद के खजाने में पैसा नहीं है। करीब 10 करोड़ रुपये होने के बावजूद भी रेवाड़ी शहर की हालत गांवों के ढाणियों से भी बदत्तर हो गई है। लेकिन शायद शहर के जनप्रतिनिधियों को शहर के विकास कार्यों में रूची नहीं है।
लटका है डोर-टू-डोर कूड़ा उठान
लंबे समय से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की मांग की जा रही है। शहर में कूड़ा को लेकर हालात बदत्तर है। लंबे समय से शहरवासियों के साथ ही पार्षदों की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का टेंडर छोड़े जाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों और पार्षदों की आपसी खींचतान के कारण यह टेंडर नहीं हो पा रहे। जिसका परिणाम यह है कि शहर में कूड़ा का उठान नहीं होने से जगह-जगह कूड़ा के ढेर लगे हुए हैं। कचरा उठान के टेंडर चार बार रिजेक्ट हो चुके हैं। नगर परिषद की ओर से एक फिर टेंडर छोड़कर स्वीकृति के लिए पंचकूला भेजा गया है।
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स्ट्रीट लाइटें खराब, शहर में छाया रहता है अंधेरा
शहर में इस समय अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। लाइटों की रिपेयरिंग का टेंडर भी नहीं हुआ है। यही कारण है कि शहर के 31 वार्डों में स्ट्रीट लाइट खराब होने के चलते अंधेरा छाया हुआ है। इस समस्या के चलते पार्षद परेशान हैं तो वहीं नगर परिषद कर्मी भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। क्योंकि स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग करने के लिए कर्मचारी लगे हुए थे जो टेंडर दोबारा न लगने के कारण हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दूसरी ओर स्ट्रीट लाइटों को लेकर डीसी की ओर से भी सख्त आदेश दिए गए थे, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। डीसी कार्यालय के समीप चौक पर ही रात को अंधेरा रहता है।
शौचालयों की सफाई व्यवस्था बदहाल, नहीं हो रही सफाई
शहर के शौचालयों की सफाई का टेंडर खत्म हुए लंबा समय बीत गया है। यही कारण है कि शहर के मोबाइल शौचालयों से लेकर सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। नगर परिषद द्वारा नए बनाए गए शौचालय भी बदबू मार रहे हैं। नाईवाली चौक व मोती चौक के शौचालयों की हालत दयनीय बनी हुई है।
फाइनेंस कमेटी बनने के बाद शुरू हुई खींचतान
शहरवासियों को उम्मीद थी कि फाइनेंस कमेटी बनते हुए कई बड़े प्रोजेक्ट पर आसानी से नगरपरिषद काम शुरू कर सकता है। लेकिन फाइनेंस कमेटी में दो सदस्यों के चयन को लेकर प्रधान और पार्षदों में आपसी खींचतान शुरू हो गई है। हालांकि अनेक पार्षद ऐसे थे, जो प्रधान के आगे पीछे घूमते रहते थे, लेकिन कमेटी गठन के बाद दूर तक भी प्रधान के नजदीक नजर नहीं आते।
डीएमसी के साथ पार्षदों का छत्तीस का आंकड़ा
डीएमसी सुभिता ढाका के रेवाड़ी का कार्यभार संभाले एक साल से अधिक समय हो गया, लेकिन पार्षदों के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है। पार्षदों ने डीएमसी पर अभ्रता करने का आरोप लगाने के साथ नगर परिषद कार्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। पार्षदों का आरोप था कि डीएमसी उनकी फाइलों को जानबूझकर अटका देती है।
स्ट्रीट लाइट, सड़कों की मरम्मत व नई सड़कों के निर्माण के टेंडर लगाए हुए हैं। जल्द ही टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर होने के बाद शहर के विकास को गति मिलेगी। प्रधान और पार्षदों में भी मधुर संबंध हैं। जल्द ही सफाई कर्मियों की भी भर्ती की जाएगी।
-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। रेवाड़ी नगरपरिषद में पिछले एक साल के दौरान प्रधान, पार्षदों व अधिकारियों के साथ खींचतान के चलते शहर के विकास कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। हालांकि डोर-टू-डोर कचरा उठान से लेकर स्ट्रीट लाइट, सड़कों के सुधारीकरण सहित अन्य विकास कार्यों के हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास किए गए हैं, लेकिन खींचतान के कारण किसी भी कार्य के टेंडर नहीं हो पाए। गुटबंदी के कारण विकास कार्य कागजों तक ही सिमट गए।
रेवाड़ी नगर परिषद के खाते में करीब 10 करोड़ रुपये हैं, जिनसे शहर में विकास कराना था, लेकिन 31 मार्च 2023 तक यह राशि खर्च ही नहीं हो पाई। बता दें कि नगरपरिषद के चुनावों को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। पहले एक साल शहर के विकास को लेकर प्रधान, उपप्रधान से लेकर पार्षदों ने गंभीरता दिखाई, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया शहर का विकास पीछे छूटता गया। आलम यह है कि शहर के पॉश कहे जाने वाले मॉडल टाउन, सेक्टर 1, सेक्टर 3, सेक्टर 4 आदि में भी सड़कें बदहाल हैं, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्ट्रीट लाइटों के अभाव में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। ऐसा नहीं है कि नगर परिषद के खजाने में पैसा नहीं है। करीब 10 करोड़ रुपये होने के बावजूद भी रेवाड़ी शहर की हालत गांवों के ढाणियों से भी बदत्तर हो गई है। लेकिन शायद शहर के जनप्रतिनिधियों को शहर के विकास कार्यों में रूची नहीं है।
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लटका है डोर-टू-डोर कूड़ा उठान
लंबे समय से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की मांग की जा रही है। शहर में कूड़ा को लेकर हालात बदत्तर है। लंबे समय से शहरवासियों के साथ ही पार्षदों की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का टेंडर छोड़े जाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों और पार्षदों की आपसी खींचतान के कारण यह टेंडर नहीं हो पा रहे। जिसका परिणाम यह है कि शहर में कूड़ा का उठान नहीं होने से जगह-जगह कूड़ा के ढेर लगे हुए हैं। कचरा उठान के टेंडर चार बार रिजेक्ट हो चुके हैं। नगर परिषद की ओर से एक फिर टेंडर छोड़कर स्वीकृति के लिए पंचकूला भेजा गया है।
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स्ट्रीट लाइटें खराब, शहर में छाया रहता है अंधेरा
शहर में इस समय अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। लाइटों की रिपेयरिंग का टेंडर भी नहीं हुआ है। यही कारण है कि शहर के 31 वार्डों में स्ट्रीट लाइट खराब होने के चलते अंधेरा छाया हुआ है। इस समस्या के चलते पार्षद परेशान हैं तो वहीं नगर परिषद कर्मी भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। क्योंकि स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग करने के लिए कर्मचारी लगे हुए थे जो टेंडर दोबारा न लगने के कारण हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दूसरी ओर स्ट्रीट लाइटों को लेकर डीसी की ओर से भी सख्त आदेश दिए गए थे, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। डीसी कार्यालय के समीप चौक पर ही रात को अंधेरा रहता है।
शौचालयों की सफाई व्यवस्था बदहाल, नहीं हो रही सफाई
शहर के शौचालयों की सफाई का टेंडर खत्म हुए लंबा समय बीत गया है। यही कारण है कि शहर के मोबाइल शौचालयों से लेकर सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। नगर परिषद द्वारा नए बनाए गए शौचालय भी बदबू मार रहे हैं। नाईवाली चौक व मोती चौक के शौचालयों की हालत दयनीय बनी हुई है।
फाइनेंस कमेटी बनने के बाद शुरू हुई खींचतान
शहरवासियों को उम्मीद थी कि फाइनेंस कमेटी बनते हुए कई बड़े प्रोजेक्ट पर आसानी से नगरपरिषद काम शुरू कर सकता है। लेकिन फाइनेंस कमेटी में दो सदस्यों के चयन को लेकर प्रधान और पार्षदों में आपसी खींचतान शुरू हो गई है। हालांकि अनेक पार्षद ऐसे थे, जो प्रधान के आगे पीछे घूमते रहते थे, लेकिन कमेटी गठन के बाद दूर तक भी प्रधान के नजदीक नजर नहीं आते।
डीएमसी के साथ पार्षदों का छत्तीस का आंकड़ा
डीएमसी सुभिता ढाका के रेवाड़ी का कार्यभार संभाले एक साल से अधिक समय हो गया, लेकिन पार्षदों के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है। पार्षदों ने डीएमसी पर अभ्रता करने का आरोप लगाने के साथ नगर परिषद कार्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। पार्षदों का आरोप था कि डीएमसी उनकी फाइलों को जानबूझकर अटका देती है।
स्ट्रीट लाइट, सड़कों की मरम्मत व नई सड़कों के निर्माण के टेंडर लगाए हुए हैं। जल्द ही टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर होने के बाद शहर के विकास को गति मिलेगी। प्रधान और पार्षदों में भी मधुर संबंध हैं। जल्द ही सफाई कर्मियों की भी भर्ती की जाएगी।
-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।