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Rewari News: बाजरे की सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का धरना
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बावल अनाज मंडी में धरने पर बैठे किसान। स्रोत : किसान
बावल। अनाज मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से नाराज किसानों ने आंबेडकर पार्क में धरना देकर प्रदर्शन किया। किसानों ने बाजरे की फसल को निर्धारित समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग उठाई। इसके बाद किसानों ने नायब तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने बताया कि सरकार की ओर से बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार मंडी में बाजरे के करीब 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहे हैं। इससे उन्हें समर्थन मूल्य की तुलना में करीब 700 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने कहा कि बाजरे की फसल तैयार होने के बाद उसे अधिक समय तक घर पर रखना संभव नहीं है। ऐसे में सरकारी खरीद नहीं होने का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के हित में 1 अक्तूबर से बाजरे की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर शुरू की जाए
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किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 1 अक्तूबर से खरीद शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर सरजीत सिंह, रामकिशन, भजनलाल खटाना, महेंद्र सिंह ककरावत सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
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किसानों ने बताया कि सरकार की ओर से बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार मंडी में बाजरे के करीब 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहे हैं। इससे उन्हें समर्थन मूल्य की तुलना में करीब 700 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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किसानों ने कहा कि बाजरे की फसल तैयार होने के बाद उसे अधिक समय तक घर पर रखना संभव नहीं है। ऐसे में सरकारी खरीद नहीं होने का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के हित में 1 अक्तूबर से बाजरे की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर शुरू की जाए
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किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 1 अक्तूबर से खरीद शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर सरजीत सिंह, रामकिशन, भजनलाल खटाना, महेंद्र सिंह ककरावत सहित अनेक किसान मौजूद रहे।