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Rewari News: हौसले से दिव्यांगता को हराया...पैर के अंगूठे से ईवीएम का बटन दबाएंगे प्रवीण
Tue, 21 May 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 21 May 2024 11:56 PM IST
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रेवाड़ी। प्रवीण कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली (रेवाड़ी)। दिव्यांगता को मात देकर लोगों के लिए मिसाल बने जिले के गांव कोहारड़ निवासी 23 वर्षीय प्रवीण कुमार 25 मई को पहली बार अपने पैर के अंगूठे से देश के लिए मतदान करेंगे। प्रवीण के बचपन से ही हाथ काम नहीं करते। हाथों से वजन हटाना तो दूर चीजों को पकड़ भी नहीं सकते, लेकिन अपनी इस कमजोरी से प्रवीण ने हार नहीं मानी और जज्बे और हौसले को अपनी ताकत बनाया।
प्रवीण ने खुद के जज्बे से ही स्कूल में प्रवेश के दौरान ही दाएं पैर के अंगूठे व अंगुली से पेन पकड़कर लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया। अब वह स्नातक पास हो गए, जिनमें एक एग्जाम को छोड़कर अन्य परीक्षाओं में लिखने के लिए कोई राइटर तक नहीं लिया। सभी पेपर में खुद ही लिखा और अच्छे नंबर से पास हुए। प्रवीण का कहना है कि इस बार मतदाता पहचान पत्र भी बन गया है, अब लोकसभा चुनाव में वोट भी डालेंगे। वह अपने पैर के अंगूठे से ही ईवीएम का बटन दबाएंगे।
9 वर्ष की उम्र में पैर से लिखने का अभ्यास किया था शुरू
तीन बहनों में सबसे बड़े प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने 10वीं की परीक्षा गांव के ही राजकीय स्कूल से 76 फीसदी अंक से उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2020 में 12वीं की परीक्षा नाहड़ गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 66 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। उन्होंने बताया कि 2023 में बीए की परीक्षा नाहड़ के राजकीय कॉलेज से उत्तीर्ण की है। इन सभी परीक्षाओं में एक वर्ष को छोड़ सभी में खुद पैर के अंगूठे से पेन पकड़कर लिखा। प्रवीण के अनुसार, उन्होंने 9 वर्ष की उम्र में पैर से लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो गया। प्रवीण ने स्कूली पढ़ाई के दौरान पेंटिंग स्पर्धा में जिले से लेकर राज्य स्तर तक अपनी छाप छोड़ी है। कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। पैर के अंगूठे में ही चित्रकारी की पेंसिल पकड़कर बेहतर पेंटिंग बनाई है।
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कोसली (रेवाड़ी)। दिव्यांगता को मात देकर लोगों के लिए मिसाल बने जिले के गांव कोहारड़ निवासी 23 वर्षीय प्रवीण कुमार 25 मई को पहली बार अपने पैर के अंगूठे से देश के लिए मतदान करेंगे। प्रवीण के बचपन से ही हाथ काम नहीं करते। हाथों से वजन हटाना तो दूर चीजों को पकड़ भी नहीं सकते, लेकिन अपनी इस कमजोरी से प्रवीण ने हार नहीं मानी और जज्बे और हौसले को अपनी ताकत बनाया।
प्रवीण ने खुद के जज्बे से ही स्कूल में प्रवेश के दौरान ही दाएं पैर के अंगूठे व अंगुली से पेन पकड़कर लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया। अब वह स्नातक पास हो गए, जिनमें एक एग्जाम को छोड़कर अन्य परीक्षाओं में लिखने के लिए कोई राइटर तक नहीं लिया। सभी पेपर में खुद ही लिखा और अच्छे नंबर से पास हुए। प्रवीण का कहना है कि इस बार मतदाता पहचान पत्र भी बन गया है, अब लोकसभा चुनाव में वोट भी डालेंगे। वह अपने पैर के अंगूठे से ही ईवीएम का बटन दबाएंगे।
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9 वर्ष की उम्र में पैर से लिखने का अभ्यास किया था शुरू
तीन बहनों में सबसे बड़े प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने 10वीं की परीक्षा गांव के ही राजकीय स्कूल से 76 फीसदी अंक से उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2020 में 12वीं की परीक्षा नाहड़ गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 66 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। उन्होंने बताया कि 2023 में बीए की परीक्षा नाहड़ के राजकीय कॉलेज से उत्तीर्ण की है। इन सभी परीक्षाओं में एक वर्ष को छोड़ सभी में खुद पैर के अंगूठे से पेन पकड़कर लिखा। प्रवीण के अनुसार, उन्होंने 9 वर्ष की उम्र में पैर से लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो गया। प्रवीण ने स्कूली पढ़ाई के दौरान पेंटिंग स्पर्धा में जिले से लेकर राज्य स्तर तक अपनी छाप छोड़ी है। कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। पैर के अंगूठे में ही चित्रकारी की पेंसिल पकड़कर बेहतर पेंटिंग बनाई है।
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