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डेटा से अनुसंधान की गुणवत्ता होगी मजबूत : डॉ.अलीशा
Wed, 07 May 2025 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 07 May 2025 12:26 AM IST
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फोटो: 09रेवाड़ी। कृषि महाविद्यालय बावल में आयोजित कार्यक्रम में सहायक प्रोफेसरों को संबोधि
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में कृषि और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में डेटा विश्लेषण के लिए सांख्यिकीय उपकरण के प्रयोग, क्षमता व निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 6 से 19 मई तक होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के 7 राज्यों से 30 साहयक प्रोफेसर ने भाग ले रहे हैं। कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज के नेतृत्व में कार्यक्रम शुरू हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अजीत सिंह यादव ने साक्ष्य आधारित निर्णय लेने और नीति निर्माण का समर्थन करने के लिए डेटा एकत्र करने, विश्लेषण करने पर चर्चा की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि इस कार्यक्रम में सीखी गई तकनीकों का फायदा उठाएं और कृषि की उन्नति के लिए उन्हें सहायक बनाएं। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि एकत्र किए गए डेटा और इसके सही अनुप्रयोग की व्याख्या करने के लिए शोधकर्ताओं के लिए सांख्यिकीय उपकरणों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है।
डॉ. अलीशा ने बताया कि यह पहल अनुसंधान की गुणवत्ता को मजबूत करने, अंतः विषय सहयोग को बढ़ावा देने और कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों में सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करने में योगदान देगा। इस कार्यक्रम की आयोजन समिति के सदस्य डॉ. प्रशांत चौहान, डॉ. परवीन निम्ब्रायण, डॉ. चरण सिंह, डॉ. तन्वी भाटिया, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. भारत जैन और डॉ. अभिषेक उपस्थित रहे।
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बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में कृषि और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में डेटा विश्लेषण के लिए सांख्यिकीय उपकरण के प्रयोग, क्षमता व निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 6 से 19 मई तक होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के 7 राज्यों से 30 साहयक प्रोफेसर ने भाग ले रहे हैं। कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज के नेतृत्व में कार्यक्रम शुरू हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अजीत सिंह यादव ने साक्ष्य आधारित निर्णय लेने और नीति निर्माण का समर्थन करने के लिए डेटा एकत्र करने, विश्लेषण करने पर चर्चा की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि इस कार्यक्रम में सीखी गई तकनीकों का फायदा उठाएं और कृषि की उन्नति के लिए उन्हें सहायक बनाएं। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि एकत्र किए गए डेटा और इसके सही अनुप्रयोग की व्याख्या करने के लिए शोधकर्ताओं के लिए सांख्यिकीय उपकरणों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है।
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डॉ. अलीशा ने बताया कि यह पहल अनुसंधान की गुणवत्ता को मजबूत करने, अंतः विषय सहयोग को बढ़ावा देने और कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों में सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करने में योगदान देगा। इस कार्यक्रम की आयोजन समिति के सदस्य डॉ. प्रशांत चौहान, डॉ. परवीन निम्ब्रायण, डॉ. चरण सिंह, डॉ. तन्वी भाटिया, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. भारत जैन और डॉ. अभिषेक उपस्थित रहे।
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